ऐसे किसी आश्रित के, जो नि:शक्त व्यक्ति है, चिकित्सीय उपचार सहित भरण-पोषण की बाबत कटौती
62[असुविधाग्रस्त आश्रित के भरणपोषण, जिसमें चिकित्सीय उपचार भी है, की बाबत कटौती63
80घघ. 64[(1) जहां किसी निर्धारिती ने, जो भारत में निवासी है और व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है, पूर्ववर्ष के दौरान,–
(क) किसी असुविधाग्रस्त आश्रित के चिकित्सीय उपचार (जिसके अंतर्गत परिचर्या है), प्रशिक्षण और पुनर्वास के संबंध में कोर्इ व्यय उपगत किया है; या
(ख) उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन रहते हुए और बोर्ड द्वारा असुविधाग्रस्त आश्रित के भरणपोषण के लिए इस निमित्त अनुमोदित जीवन बीमा निगम या 64क[किसी अन्य बीमा कर्ता या] भारतीय यूनिट ट्रस्ट द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ किसी स्कीम के अधीन कोर्इ रकम संदत्त या जमा की है, वहां,
निर्धारिती को इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए पूर्ववर्ष की बाबत चालीस हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।]
(2) उपधारा (1) के खंड (ख) अधीन कटौती केवल तब अनुज्ञात की जाएगी जब निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाएं, अर्थात् :–
(क) उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट स्कीम में उस व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य की मृत्यु की दशा में, जिसके नाम से स्कीम में अंशदान किया गया है, असुविधाग्रस्त आश्रित के फायदे के लिए वार्षिकी या एकमुश्त रकम के भुगतान का उपबंध है;
(ख) निर्धारिती, असुविधाग्रस्त आश्रित के फायदे के लिए असुविधाग्रस्त आश्रित को या उसकी ओर से भुगतान प्राप्त करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या ट्रस्ट को नामनिर्दिष्ट करे।
(3) यदि असुविधाग्रस्त आश्रित की मृत्यु उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य से पहले हो जाती हो तो उपधारा (1) के खंड (ख) अधीन संदत्त या जमा रकम के बराबर रकम उस पूर्ववर्ष में निर्धारिती की आय समझी जाएगी जिसमें ऐसी रकम निर्धारिती द्वारा प्राप्त की जाती है और तदनुसार वह उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर के लिए प्रभार्य होगी।
(4) इस धारा में,–
(क) "सरकारी अस्पताल" के अंतर्गत सरकार के किसी विभाग द्वारा सरकारी सेवकों के वर्ग या वर्गों और उनके कुटुम्ब के सदस्यों की चिकित्सीय परिचर्या और उपचार के लिए स्थापित या चलाया जा रहा कोर्इ विभागीय औषद्यालय, जो चाहे पूर्णकालिक हो या अंशकालिक और किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुरक्षित कोर्इ अन्य अस्पताल तथा ऐसा कोर्इ अन्य अस्पताल भी है, जिसके साथ सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के उपचार के लिए व्यवस्था की है;
(ख) "असुविधाग्रस्त आश्रित" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है जो,–
(i) यथास्थिति, व्यष्टि का नातेदार है या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का सदस्य है और अपने रखरखाव तथा भरणपोषण के लिए उस व्यक्ति या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति पर आश्रित नहीं है; और
(ii) ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से (जिसके अंतर्गत अंधापन भी है) पीड़ित है या ऐसी मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों65 में धारा 80घघ के प्रयोजनों के लिए स्थायी शारीरिक नि:शक्तता या मानसिक मंदता है जिसे किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, किसी चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र चिकित्सक या मन:चिकित्सक ने प्रमाणित किया है और जिसका प्रभाव यह है कि सामान्य कार्य की अथवा अभिलाभपूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यक्ति की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है;
(ग) "भारतीय जीवन बीमा निगम" का वही अर्थ होगा जो धारा 88 की उपधारा (8) के खंड (iii) में है;
(घ) "भारतीय यूनिट ट्रस्ट" से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट अभिप्रेत है।]
62. धारा 80घघ वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से धारा 80घघ और धारा 80घघक के स्थान पर रखी गर्इ थी। इनके प्रतिस्थापन के पूर्व वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से यथा अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से और वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1994 से यथा संशोधित धारा 80घघ और वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से यथा अंत:स्थापित धारा 80घघक निम्नानुसार थीं :
"80घघ. असुविधाग्रस्त आश्रितों के चिकित्सीय उपचार आदि की बाबत कटौती–जहां किसी निर्धारिती ने, जो भारत में निवासी है और व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, पूर्ववर्ष के दौरान कोर्इ व्यय किसी ऐसे व्यक्ति के चिकित्सीय उपचार (जिसके अंतर्गत परिचर्या भी है), प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए उपगत किया है जो,–
(क) यथास्थिति उस व्यष्टि का नातेदार है या उस हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का सदस्य है और अपनी देखरेख या भरणपोषण के लिए ऐसे व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब से भिन्न किसी व्यक्ति पर आश्रित नहीं है, और
(ख) ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से (जिसके अंतर्गत अंधापन भी है) पीड़ित है, या ऐसी मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों में विनिर्दिष्ट स्थायी शारीरिक नि:शक्तता या मानसिक मंदता है, जिसे किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, किसी चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र चिकित्सक या मन:चिकित्सक ने प्रमाणित किया है और जिसका प्रभाव यह है कि सामान्य कार्य की अथवा अभिलाभ पूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यक्ति की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है,
वहां निर्धारिती को, इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए पंद्रह हजार रुपए की राशि की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।
(2) [* * *]
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "सरकारी अस्पताल" पद के अंतर्गत सरकार के किसी विभाग द्वारा सरकारी सेवकों के वर्ग या वर्गों और उनके कुटुम्ब के सदस्यों की चिकित्सीय परिचर्या और उपचार के लिए स्थापित और चलाया जा रहा कोर्इ विभागीय औषधालय, जो चाहे पूर्णकालिक हो या अंशकालिक और किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा अनुरक्षित कोर्इ अस्पताल तथा कोर्इ अन्य अस्पताल भी है जिसके साथ सरकार द्वारा सरकार के सेवकों के उपचार के लिए व्यवस्था की गर्इ है।
80घघक–असुविधाग्रस्त आश्रित के भरणपोषण के लिए किए गए निक्षेप की बाबत कटौती--(1) ऐसे निर्धारिती की कुल आय संगणित करने में जो भारत में निवासी है और व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट और इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित शर्तों के अधीन रहते हुए भारतीय बीमा निगम या भारतीय यूनिट ट्रस्ट द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ स्कीम के अधीन कर के लिए प्रभार्य उसकी आय में से उसके द्वारा पूर्ववर्ष में संदत्त या जमा उतनी रकम की कटौती इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन की जाएगी जो बीस हजार रुपए से अधिक न हो।
(2) उपधारा (1) के अधीन कटौती केवल तब अनुज्ञात की जाएगी जब निम्नलिखित शर्तें पूरी की जाएं, अर्थात् :--
(क) उपधारा (1) में अंकित स्कीम में उस व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य की मृत्यु की दशा में, जिसके नाम से स्कीम में अंशदान किया गया है, असुविधाग्रस्त आश्रित के फायदे के लिए वार्षिकी या एकमुश्त रकम के भुगतान का उपबंध है;
(ख) निर्धारिती असुविधाग्रस्त आश्रित के फायदे के लिए असुविधाग्रस्त आश्रित को या उसकी ओर से भुगतान प्राप्त करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति या ट्रस्ट को नामनिर्दिष्ट करे।
(3) यदि असुविधाग्रस्त आश्रित की मृत्यु उपधारा (2) में निर्दिष्ट व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य से पहले हो जाती है, तो उपधारा (1) के अधीन संदत्त या जमा रकम के बराबर रकम उस पूर्ववर्ष में निर्धारिती की आय समझी जाएगी जिसमें ऐसी रकम निर्धारिती द्वारा प्राप्त की जाती है और तद्नुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर के लिए प्रभार्य होगी।
(4) इस धारा में,–
(क) "सरकारी अस्पताल" का वही अर्थ होगा जो धारा 80घघ के स्पष्टीकरण में है;
(ख) "असुविधाग्रस्त आश्रित" से ऐसा व्यक्ति अभिप्रेत है, जो
(i) यथास्थिति, व्यष्टि का नातेदार है या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का सदस्य है और अपने रखरखाव तथा भरणपोषण के लिए उस व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्य से भिन्न किसी अन्य व्यक्ति पर आश्रित नहीं है; और
(ii) ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से (जिसके अन्तर्गत अंधापन भी है) पीड़ित है या ऐसी मानसिक मंदता से ग्रस्त है जो बोर्ड द्वारा इस निमित्त बनाए गए नियमों में धारा 80घघ के प्रयोजनों के लिए स्थायी शारीरिक नि:शक्तता या मानसिक मंदता है जिसे किसी सरकारी अस्पताल में कार्यरत, यथास्थिति, किसी चिकित्सक, शल्य चिकित्सक, नेत्र चिकित्सक या मन: चिकित्सक ने प्रमाणित किया है और जिसका प्रभाव यह है कि सामान्य कार्य की अथवा अभिलाभ पूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने की उस व्यक्ति की सामथ्र्य पर्याप्त रूप से घट गर्इ है;
(ग) 'भारतीय जीवन बीमा निगम' का वही अर्थ होगा जो धारा 88 की उपधारा (8) के खंड (iii) में है;
(घ) 'भारतीय यूनिट ट्रस्ट' से भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट अभिप्रेत है।"
63. देखिए परिपत्र सं. 775, तारीख 26.3.1999। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
64. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन के पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1999 से यथा प्रतिस्थापित उपधारा (1) निम्नानुसार थी :
"(1) ऐसे निर्धारिती की कुल आय संगणित करने में, जो भारत में निवासी है और व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है, कर के लिए प्रभार्य उसकी आय में से निम्नलिखित रकम की इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन कटौती की जाएगी :–
(क) किसी असुविधाग्रस्त आश्रित के चिकित्सीय उपचार (जिसके अंतर्गत परिचर्या है), प्रशिक्षण और पुनर्वास के संबंध में उपगत व्यय; या
(ख) असुविधाग्रस्त आश्रित के भरणपोषण के लिए उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट और इस निमित्त बोर्ड द्वारा अनुमोदित शर्तों के अधीन भारतीय जीवन बीमा निगम या भारतीय यूनिट ट्रस्ट द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ स्कीम के अधीन संदत्त या जमा रकम :
परन्तु यह कि खंड (क) या खंड (ख) या दोनों के अधीन ऐसी कुल रकम चालीस हजार रुपए से अधिक नहीं होगी।"
64क. इटैलिक शब्द वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से अंत:स्थापित किए जाएंगे।
65. देखिए नियम 11क.
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

