राष्ट्रीय बचत स्कीम के अधीन निक्षेप या आस्थगित वार्षिकी योजना में जमा की बाबत कटौती
राष्ट्रीय बचत स्कीम के अधीन निक्षेप या आस्थगित वार्षिकी योजना में जमा की बाबत कटौती
80गगक. (1) जहां किसी निर्धारिती ने, जो–
(क) व्यष्टि है; या
(ख) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है,
(ग) [* * *]
पूर्ववर्ष में कर से प्रभार्य अपनी आय में से–
(i) ऐसी स्कीम के अनुसार, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे कोर्इ रकम निक्षिप्त की है; या
(ii) जीवन बीमा निगम की ऐसी वार्षिकी योजना के लिए, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे, संविदा करने के लिए या उसे प्रवृत्त रखने के लिए किसी रकम का भुगतान किया है,
वहां उसे इस धारा के उपबंधों के अनुसार और उनके अधीन रहते हुए, उसकी कुल आय की संगणना करने में ऐसी समस्त निक्षिप्त या भुगतान की गर्इ रकम की (जिसके अंतर्गत निर्धारिती के खाते में प्रोद्भूत या जमा ब्याज या बोनस, आदि कोर्इ हो, नहीं है) जो उस पूर्ववर्ष में बीस हजार रुपए की रकम से अधिक नहीं है, कटौती अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु–
(क) 1 अप्रैल, 1989 और 1 अप्रैल, 1990 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्षों के संबंध में यह उपधारा इस प्रकार प्रभावी होगी मानो ''बीस हजार रुपए'' शब्दों के स्थान पर ''तीस हजार रुपए'' शब्द रख दिए गए हों;
(ख) 1 अप्रैल, 1991 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष और पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्षों के संबंध में यह उपधारा इस प्रकार प्रभावी होगी मानो ''बीस हजार रुपए'' शब्दों के स्थान पर ''चालीस हजार रुपए'' शब्द रख दिए गए हों:
परन्तु यह और कि खंड (i) और खंड (ii) के अधीन 1 अप्रैल, 1992 को या उसके पश्चात् जमा या भुगतान की गर्इ किसी रकम के संबंध में इस उपधारा के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।
(2) जहां कोर्इ रकम–
(क) उपधारा (1) के खंड(i) में निर्दिष्ट स्कीम के अधीन निर्धारिती के खाते में जमा थी और जिसके संबंध में उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात की गर्इ है, ऐसी रकम पर प्राप्त ब्याज सहित, पूर्णत: या भागत: किसी पूर्ववर्ष में वापस ली जाती है; या
(ख) जीवन बीमा निगम की वार्षिकी योजना के अनुसार पालिसी के अभ्यर्पण के कारण अथवा वार्षिकी या बोनस के रूप में किसी पूर्ववर्ष में प्राप्त की जाती है,
वहां खंड(क)या खंड(ख) में दर्शित संपूर्ण रकम के बराबर रकम निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी, जिसमें वह, यथास्थिति वापस ली गर्इ है या प्राप्त की गर्इ है और तदनुसार उस पूर्ववर्ष की आय समझी जाएगी, जिसमें वह, यथास्थिति वापस ली गर्इ है या प्राप्त की गर्इ है और तद्नुसार उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में कर से प्रभार्य होगी :
परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात किसी निर्धारिती द्वारा जीवन बीमा निगम की वार्षिकी योजना के निबंधनों के अनुसार पालिसी के अभ्यर्पण के कारण प्राप्त की गर्इ किसी रकम को, वहां लागू नहीं होगी, जहां निर्धारिती, उक्त वार्षिकी योजना को, जिसके संबंध में उसने उपधारा (1) के खंड (ii) के अधीन कोर्इ रकम 1 अप्रैल, 1992 के पूर्व जमा की है, 1 अक्तूबर, 1992 के पूर्व अभ्यर्पित करने का चयन करता है।
(3) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, जहां उपधारा (1) के अधीन कटौती अनुज्ञात किए जाने के पश्चात् किसी हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के सदस्यों के बीच विभाजन हो गया है या जहां व्यक्तियों का कोर्इ संगम विघटित कर दिया गया है, वहां उपधारा (2) के उपबंध ऐसे लागू होंगे मानो उसमें निर्दिष्ट आय प्राप्त करने वाला व्यक्ति निर्धारिती हो।
स्पष्टीकरण I.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषणा की जाती है कि उपधारा (1) के खंड (i) में निर्दिष्ट स्कीम के अधीन किए गए निक्षेपों पर ब्याज उपधारा (2) में उल्लिखित रीति से और सीमा तक ही कर से प्रभार्य होगा।
स्पष्टीकरण II.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "जीवन बीमा निगम" का वही अर्थ है जो धारा 80ग की उपधारा (8) के खंड (क) में है।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

