कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां
96[अध्याय 6क
कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां
क.–साधारण
कुल आय की संगणना करने में की जाने वाली कटौतियां
80क. (1) किसी निर्धारिती की कुल आय संगणित करने में, उसकी सकल कुल आय में से वे कटौतियां, जो धारा 80ग से 97[80प] तक में विनिर्दिष्ट हैं, इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार और अधीन अनुज्ञात की जाएंगी।
(2) इस अध्याय के अधीन कटौतियों98 की संकलित रकम निर्धारिती की सकल कुल आय से किसी भी दशा में अधिक न होगी।
99[(3) जहां किसी व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की कुल आय की संगणना करने में, धारा 80छ या धारा 80छछक 1[या धारा 80छछग] या धारा 80जज या धारा 80जजक या धारा 80जजख या धारा 80जजग या धारा 80जजघ या धारा 80झ या धारा 80झक 2[या धारा 80झख] 3[या धारा 80झग] 4[या धारा 80झघ या धारा 80झड़] या धारा 80ञ5 या धारा 80ञञ के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञेय है, वहां व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय के सदस्य की कुल आय की संगणना करने में उसी धारा के अधीन कोर्इ कटौती, व्यक्ति-संगम या व्यष्टि-निकाय की आय में ऐसे सदस्य के अंश के संबंध में नहीं की जाएगी।]
6[(4) धारा 10क या धारा 10कक या धारा 10ख या धारा 10खक या इस अध्याय के "ग-कतिपय आयों के संबंध में कटौतियां" शीर्ष के अधीन किसी उपबंध में किसी बात के होते हुए भी जहां किसी निर्धारिती की दशा में, किसी उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार के लाभों और अभिलाभों की किसी रकम का किसी निर्धारण वर्ष के लिए उन उपबंधों में किसी के अधीन कटौती के रूप में दावा किया जाता है और उसे अनुज्ञात किया जाता है, वहां ऐसे लाभों और अभिलाभों के संबंध में और उस सीमा तक कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए अनुज्ञात नहीं की जाएगी और किसी भी दशा में, यथास्थिति, ऐसे उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभों से अधिक नहीं होगी।
(5) जहां निर्धारिती धारा 10क या धारा 10कक या धारा 10ख या धारा 10खक या इस अध्याय के "ग–कतिपय आयों के संबंध में कटौतियां" शीर्ष के अधीन किन्हीं उपबंधों के अधीन किसी कटौती के लिए अपनी आय की विवरणी में दावा करने में असफल रहता है, वहां उसे उसके अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
6क[(6) धारा 10क या धारा 10कक या धारा 10ख या धारा 10खक या इस अध्याय के "ग–कतिपय आयों के संबंध में कटौतियां" शीर्ष के अधीन किसी उपबंध में किसी बात के होते हुए भी जहां किसी उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार के प्रयोजनों के लिए धारित कोर्इ माल या सेवाएं निर्धारिती द्वारा किए गए किसी अन्य कारबार को अंतरित की जाती हैं या जहां निर्धारिती द्वारा किए गए किसी अन्य कारबार के प्रयोजनों के लिए धारित कोर्इ माल या सेवाएं उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार को अंतरित की जाती हैं और उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार के लेखाओं में यथा अभिलिखित ऐसे अंतरण के लिए प्रतिफल, यदि कोर्इ हो, अंतरण की तारीख को ऐसे माल या सेवाओं के बाजार मूल्य के तत्समान नहीं होता है वहां इस अध्याय के अधीन किसी कटौती के प्रयोजनों के लिए ऐसे उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार के लाभ और अभिलाभों की संगणना इस प्रकार की जाएगी मानो अंतरण किसी भी दशा में उस तारीख को ऐसे माल या सेवाओं के बाजार मूल्य पर किया गया था।
स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, "बाजार मूल्य" पद से,–
(i) विक्रीत या प्रदाय किए गए किसी माल या सेवाओं के संबंध में वह कीमत अभिप्रेत है जो ऐसे माल या सेवाओं को तब मिलती यदि उन्हें ऐसे उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार द्वारा, कानूनी या विनियामक निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, यदि कोर्इ हों, खुले बाजार में विक्रय किया जाता;
(ii) अर्जित किए गए किसी माल या सेवाओं के संबंध में वह कीमत अभिप्रेत है जो ऐसे माल या सेवाओं को तब लागत होती जब उन्हें ऐसे उपक्रम या यूनिट या उद्यम या पात्र कारबार द्वारा, कानूनी या विनियामक निर्बन्धनों के अधीन रहते हुए, यदि कोर्इ हों, खुले बाजार में अर्र्जित किया जाता;]
वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से धारा 80क की उपधारा (6) के स्पष्टीकरण में खंड (ii) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड (iii) अंत:स्थापित किया जाएगा :
(iii) विक्रीत, प्रदत्त या अर्जित किसी माल या सेवाओं के संबंध में धारा 92च के खंड (ii) में यथापरिभाषित ऐसे माल या सेवाओं की असन्निकट कीमत अभिप्रेत है, यदि वह धारा 92खक में निर्दिष्ट कोर्इ विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार है।
6ख[(7) जहां इस अध्याय के "ग-कतिपय आयों के संबंध में कटौतियां" शीर्षक के अधीन किसी उपबंध के अधीन धारा 35कघ की उपधारा (8) के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी विनिर्दिष्ट कारबार के लाभों की बाबत किसी निर्धारण वर्ष के लिए कटौती का दावा किया जाता है और उसे अनुज्ञात किया जाता है वहां ऐसे विनिर्दिष्ट कारबार के संबंध में उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए धारा 35कघ के उपबंधों के अधीन कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
96. अध्याय 6क, जिसमें धाराएं 80क, 80ख, 80ग, 80घ, 80ड़, 80च, 80छ, 80ज, 80झ, 80 ञ, 80ट, 80ठ, 80ड, 80ढ, 80ण, 80त, 80थ, 80द, 80ध और 80न सम्मिलित हैं, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से प्रतिस्थापित किया गया था। मूल अध्याय जिसमें केवल धाराएं 80क से 80घ सम्मिलित थीं, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित किया गया था। मूल अध्याय में धारा 80क का वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से संशोधन किया गया था और वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से एक नर्इ धारा 80ड़ अंत:स्थापित की गर्इ थी।
97. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से "80फफ" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से "80प" के स्थान पर "80फफ" और वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1969 से "80न" के स्थान पर "80प" रखा गया था।
98. "कटौतियां" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.
99. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से उपधारा (3) के स्थान पर प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (3) कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से, वित्त अधिनियम, 1972 द्वारा 1.4.1972 से, प्रत्यक्ष कर (संशोधन) अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1974 से, वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1978 से, वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से, वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से, वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983/1.4.1984 से, वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से, वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से, प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से और वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से यथासंशोधित।
1. निर्वाचन और अन्य संबंधित विधियां (संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 11.9.2003 से अंत:स्थापित।
2. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
3. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2004 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
4. वित्त अधिनियम, 2007 द्वारा 1.4.2008 से अंत:स्थापित।
5. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से अब इसका लोप कर दिया गया है।
6. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2003 से अंत:स्थापित। इससे पूर्व उपधारा (4) का, जो वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से अंत:स्थापित की गर्इ थी, और वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से लोप किया गया था।
6क. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2009 से अंत:स्थापित।
6ख. वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा 1.4.2011 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

