धारा 201 का संशोधन
धारा 201 का संशोधन
79. आय-कर अधिनियम की धारा 201 में, -
(ए) 1 जुलाई, 2012 से, -
(i) उपधारा (1) में, -
(क) परंतुक के पूर्व, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् : -
"परंतु ऐसा कोई व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है, जो किसी निवासी को संदत्त राशि पर या किसी निवासी के खाते में जमा राशि पर इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, ऐसे कर की बाबत व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाएगा, यदि उस निवासी ने-
(i) धारा 139 के अधीन आय की अपनी विवरणी प्रस्तुत कर दी है ;
(ii) आय की उस विवरणी में आय की संगणना करने के लिए ऐसी राशि को हिसाब में लिया है ; और
(iii) ऐसी विवरणी में उसके द्वारा घोषित आय पर देय कर का संदाय कर दिया है,
और वह व्यक्ति किसी लेखापाल से इस आशय का एक प्रमाणपत्र, ऐसे प्ररूप में, जो विहित किया जाए, प्रस्तुत कर देता है :"
(ख) परंतुक में "परंतु" शब्द के स्थान पर, "परंतु यह और कि" शब्द रखे जाएंगे ;
(ii) उपधारा (1क) के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"परंतु यदि कोई व्यक्ति, जिसके अंतर्गत किसी कंपनी का प्रधान अधिकारी भी है, किसी निवासी को संदत्त राशि पर या किसी निवासी के खाते में जमा राशि पर इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार संपूर्ण कर या उसके किसी भाग की कटौती करने में असफल रहता है, किंतु उसे उपधारा (1) के पहले परंतुक के अधीन व्यतिक्रमी निर्धारिती नहीं समझा जाता है, तो खंड (i) के अधीन ब्याज उस तारीख से, जिसको ऐसा कर कटौती योग्य था, ऐसे निवासी द्वारा आय की विवरणी फाइल करने की तारीख तक के लिए संदेय होगा ।";
(बी) उपधारा (3) के खंड (ii) में, "चार वर्ष " शब्दों के स्थान पर, "छह वर्ष" शब्द रखे जाएंगे और 1 अप्रैल, 2010 से रखे गए समझे जाएंगे ;
(सी) उपधारा (4) के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण, 1 जुलाई, 2012 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-
"स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "लेखापाल" पद का वही अर्थ है जो धारा 288 की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में उसका है ।"।
[वित्त अधिनियम, 2012]

