कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना
80[कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना
79. इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,—
(क) किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध है और जो खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी कंपनी से भिन्न है, पूर्ववर्ष में शेयरधृति में कोर्इ परिवर्तन हुआ है, वहां किसी भी ऐसी हानि को, जो उस पूर्ववर्ष के किसी पूर्ववर्ष में उपगत हुर्इ थी, तब तक अग्रनीत नहीं किया जाएगा या पूर्ववर्ष की आय के प्रति उसका मुजरा तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को कंपनी के वे शेयर, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे, ऐसे व्यक्तियों द्वारा फायदाप्रद रूप से धारित है, न रहे हों, जो उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें हानि उपगत हुर्इ थी, अंतिम दिन कंपनी के ऐसे शेयरों को फायदाप्रद रूप से धारण करते थे, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे;
(ख) किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध है किन्तु जो इस अधिनियम की धारा 80झकग में यथानिर्दिष्ट पात्र स्टार्ट अप है, पूर्ववर्ष से पूर्व किसी वर्ष में उपगत हानि को अग्रनीत किया जाएगा और पूर्ववर्ष की आय के प्रति उसका मुजरा किया जाएगा, यदि ऐसी कंपनी के सभी शेयर धारकों ने, जो उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें ऐसी हानि उपगत हुर्इ थी, अंतिम दिन को मतदान शक्ति वाले शेयरों को धारण कर रहे थे:
(i) ऐसे पूर्ववर्ष के अंतिम दिन उन शेयरों को धारण करना जारी रखा था; और
(ii) ऐसी हानि उन सात वर्षों की अवधि के दौरान उपगत हुर्इ है, जो उस वर्ष से आरंभ हुर्इ थी, जिसमें ऐसी कंपनी को निगमित किया गया था:
परंतु इस धारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात उस दशा में लागू नहीं होगी जहां उक्त मत देने की शक्ति और शेयरधृति में पूर्ववर्ष में कोर्इ परिवर्तन, किसी शेयर धारक की मृत्यु या ऐसा दान करने वाले शेयर धारक द्वारा शेयरधारक के नातेदार को किसी दान के माध्यम से शेयरों के अंतरण के फलस्वरूप होता है:
परंतु यह और कि इस धारा की कोर्इ बात किसी ऐसी भारतीय कंपनी के, जो विदेशी कंपनी के समामेलन या निर्विलयन के परिणामस्वरूप किसी विदेशी कंपनी की समनुषंगी है, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि समामेलित या निर्विलीन विदेशी कंपनी के इक्यावन प्रतिशत शेयरधारक, समामेलित या परिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते है, शेयरधृति में किसी परिवर्तन को लागू नहीं होगी:]
81[परंतु यह भी कि इस धारा की कोर्इ बात, किसी कंपनी को लागू नहीं होगी जहां दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता के अधीन अनुमोदित किसी संकल्प के अनुसरण में अधिकारिता रखने वाले प्रधान आयुक्त या आयुक्त को युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् किसी पूर्ववर्ष में शेयर धारण में कोर्इ परिवर्तन होता है।]
वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से विधमान धारा 79 के स्थान पर निम्नलिखित धारा 79 प्रतिस्थापित की जाएगी:
कतिपय कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना—
79. (1) इस अध्याय में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है, जिसमें जनता सारवान् रूप से हितबद्ध है, पूर्ववर्ष में शेयरधृति में कोर्इ परिवर्तन हुआ है, वहां किसी भी ऐसी हानि को, जो उस पूर्ववर्ष के किसी पूर्ववर्ष में उपगत हुर्इ थी, तब तक अग्रनीत नहीं किया जाएगा या पूर्ववर्ष की आय के प्रति उसका मुजरा तब तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को कंपनी के वे शेयर, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे, ऐसे व्यक्तियों द्वारा फायदाप्रद रूप से धारित है, न रहे हों, जो उस वर्ष या उन वर्षों के, जिसमें या जिनमें हानि उपगत हुर्इ थी, अंतिम दिन कंपनी के ऐसे शेयरों को फायदाप्रद रूप से धारण करते थे, जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे:
परंतु यदि धारा 80झकग में यथानिर्दिष्ट किसी पात्र स्टार्ट-अप की दशा में पूर्वोक्त शर्त को पूरा भी नहीं किया जाता है, पूर्ववर्ती वर्ष से पूर्व किसी वर्ष में उपगत हानि को फिर भी पूर्ववर्ती वर्ष की आय के विरुद्ध अग्रनीत करने और मुजरा करने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा, यदि ऐसी कंपनी के सभी शेयरधारक, जो उस वर्ष या वर्षों के, जिनमें हानि उपगत हुर्इ थी, अंतिम दिन मतदान शक्ति वाले शेयर धारण करते थे, ऐसे पूर्ववर्ती वर्ष के अंतिम दिन और यदि ऐसी हानि उस वर्ष, जिसमें ऐसी कंपनी निगमित हुर्इ है, से प्रारंभ होने वाले सात वर्ष के दौरान ऐसी हानि उपगत हुर्इ है, उन शेयरों को धारण करना जारी रखेंगे।
(2) इस उपधारा (1) में अंतर्विष्ट कोर्इ बात,—
(क) उस दशा में लागू नहीं होगी, जहां उक्त मतदान शक्ति और शेयर धारण में कोर्इ परिवर्तन किसी शेयरधारक की मृत्यु के परिणामस्वरूप या शेयरधारक के किसी नातेदार को उपहार के माध्यम से शेयरों के अंतरण के मद्दे हुआ हो;
(ख) किसी भारतीय कंपनी, जो किसी विदेशी कंपनी के समामेलन या निर्विलयन के परिणामस्वरूप किसी विदेशी कंपनी की समनुषंगी है, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि समामेलित या निर्विलियत विदेशी कंपनी के इक्यावन प्रतिशत शेयर समामेलित या परिणामिक विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहेंगे, के शेयरधारण में किसी परिवर्तन को लागू नहीं होगी;
(ग) किसी कंपनी को लागू नहीं होगी, जहां अधिकारिता रखने वाले प्रधान आयुक्त या आयुक्त को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता, 2016 (2016 का 31) के अधीन अनुमोदित संकल्प योजना के अनुसरण में किसी पूर्ववर्ष में शेयरधारण में कोर्इ परिवर्तन होता है;
(घ) इस धारा में अंतर्विष्ट कोर्इ बात किसी कंपनी को और उसकी समनुषंगियों को और ऐसी समनुषंगी की समनुषंगी को लागू नहीं होगी, जहां,—
(i) केंद्रीय सरकार द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 241 के अधीन किए गए आवेदन पर अधिकरण ने ऐसी कंपनी के निदेशक बोर्ड को निलंबित कर दिया है और नए निदेशकों की नियुक्ति की है, जिन्हें केंद्रीय सरकार द्वारा उक्त अधिनियम की धारा 242 के अधीन नामनिर्दिष्ट किया गया है; और
(ii) ऐसी कंपनी और उसकी समनुषंगियों तथा ऐसी समनुषंगी की समनुषंगी कंपनी के शेयरधारण में कोर्इ परिवर्तन पूर्ववर्ष में अधिकारिता रखने वाले प्रधान आयुक्त या आयुक्त को सुने जाने का युक्तियुक्त अवसर प्रदान करने के पश्चात् कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 242 के अधीन अधिकरण द्वारा अनुमोदित संकल्प योजना के परिणामस्वरूप हुआ है।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(i) कोर्इ कंपनी किसी अन्य कंपनी की समनुषंगी होगी यदि ऐसी अन्य कंपनी, कंपनी की साम्या शेयर पूंजी के आधे से अधिक अभिहित मूल्य को धारण करती है;
(ii) "अधिकरण" का वही अर्थ होगा, जो कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 2 के खंड (90) में उसका है।
80. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व धारा 79 निम्नलिखित प्रकार थी:
"79. कुछ कंपनियों की दशा में हानियों का अग्रनीत किया जाना और उनका मुजरा किया जाना.—इस अध्याय में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी कंपनी की दशा में, जो ऐसी कंपनी नहीं है जिसमें जनता पर्याप्त रूप से हितबद्ध है, पूर्ववर्ष में शेयरधारण में तब्दीली हुर्इ है वहां किसी भी ऐसी हानि को, जो उस पूर्ववर्ष के पूर्व किसी वर्ष में उठार्इ गर्इ हो, तब तक अग्रनीत नहीं किया जाएगा जब तक कि—
(क) पूर्ववर्ष के अंतिम दिन को कंपनी के ऐसे शेयर जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे, ऐसे व्यक्तियों द्वारा फायदाप्रद रूप से धारित न रहे हों जो उस वर्ष या उन वर्षों के अंतिम दिन, जिसमें या जिनमें हानि उठार्इ गर्इ थी कंपनी के ऐसे शेयरों को फायदाप्रद रूप से धारण करते थे जो इक्यावन प्रतिशत से अन्यून मतदान शक्ति वाले थे:
परन्तु इस धारा की कोर्इ बात उस दशा में लागू नहीं होगी जहां किसी शेयरधारक की मृत्यु के परिणामस्वरूप या ऐसे शेयरधारक के, जो ऐसा दान करता है, किसी संबंधी को दान के रूप में शेयरों के अंतरण के कारण पूर्ववर्ष में उक्त मतदान शक्ति में कोर्इ परिवर्तन होता है:
परन्तु यह और कि इस धारा की कोर्इ बात, किसी ऐसी भारतीय कंपनी के, जो विदेशी कंपनी के समामेलन या अविलयन के परिणामस्वरूप किसी विदेशी कंपनी की समनुषंगी है, इस शर्त के अधीन रहते हुए कि समामेलित या अविलयित विदेशी कंपनी के इक्यावन प्रतिशत शेयरधारक, समामेलित या पारिणामी विदेशी कंपनी के शेयरधारक बने रहते हैं, शेयर धारण में किसी परिवर्तन को लागू नहीं होगी।
(ख) [***]"
81. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

