फर्म की हानियां
फर्म की हानियां
75. जहां निर्धारिती कोर्इ फर्म है, वहां 1 अप्रैल, 1992 को या उसके पूर्व प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष की बाबत कोर्इ ऐसी हानि, जिसका मुजरा फर्म की किसी अन्य आय के प्रति नहीं किया जा सका है और जो फर्म के किसी भागीदार को प्रभाजित की गर्इ थी किंतु 1 अप्रैल, 1993 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष के पूर्व ऐसे भागीदार द्वारा मुजरा नहीं की जा सकी है, फर्म की आय के प्रति इस शर्त के अधीन रहते हुए कि भागीदार उक्त फर्म में बना रहता है, मुजरा किए जाने के लिए और धारा 70, 71, 72, 73, 74 और 74क के अधीन मुजरा करने के लिए अग्रनीत किए जाने हेतु अनुज्ञात की जाएगी।
[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

