'पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन हानियां
''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन हानियां
74. (1) जहां किसी निर्धारण वर्ष के संबंध में, ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन संगणना का अंतिम परिणाम निर्धारिती की हानि है वहां संपूर्ण हानि, इस अध्याय के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी, और–
(क) जहां तक ऐसी हानि का संबंध किसी अल्पकालिक पूंजी आस्ति से है, वहां इसका मुजरा ऐसी आय के प्रति, यदि कोर्इ हो, किसी अन्य पूंजी आस्ति की बाबत उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन किया जाएगा;
(ख) जहां तक ऐसी हानि का संबंध किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति से है, वहां इसका मुजरा ऐसी आय के प्रति, यदि कोर्इ हो, किसी अन्य पूंजी आस्ति की बाबत, जो अल्पकालिक पूंजी आर्स्ति नहीं है, उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन किया जाएगा;
(ग) यदि हानि का मुजरा पूर्णतया इस प्रकार नहीं किया जा सकता है, तो हानि की ऐसी रकम, जिसका मुजरा इस प्रकार नहीं किया गया है, अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी और इसी प्रकार आगे भी किया जाएगा।
(2) कोर्इ भी हानि, उस निर्धारण वर्ष के, जिसके लिए उस हानि की संगणना पहली बार की गर्इ थी, ठीक बाद के आठ निर्धारण वर्षों से अधिक के लिए इस धारा के अधीन अग्रनीत नहीं की जाएगी।
(3) वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से लोप किया गया।]
[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

