विनिर्दिष्ट कारबार द्वारा हानियों का अग्रनयन और मुजरा
विनिर्दिष्ट कारबार द्वारा हानियों का अग्रनयन और मुजरा
73क. (1) धारा 35कघ में निर्दिष्ट किसी विनिर्दिष्ट कारबार की बाबत संगणित किसी हानि का किसी अन्य विनिर्दिष्ट कारबार के संबंध में लाभों और अभिलाभों, यदि कोर्इ हों, के प्रति मुजरा किए जाने के सिवाय मुजरा नहीं किया जाएगा।
(2) जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए उपधारा (1) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट कारबार की बावत संगणित किसी हानि का उपधारा (1) के अधीन पूर्णतया मुजरा नहीं किया गया है वहां उतनी हानि को, जिसका इस प्रकार मुजरा नहीं किया गया है या संपूर्ण हानि को, जहां निर्धारिती की किसी अन्य विनिर्दिष्ट कारबार से कोर्इ आय नहीं है, इस अध्याय के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, पश्चात्वर्ती निर्धारण वर्ष में अग्रनीत किया जाएगा, और–
(i) उसका उसके द्वारा किए गए किसी विनिर्दिष्ट कारबार के लाभों और अभिलाभों के प्रति, यदि कोर्इ हों, जो उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय हैं, मुजरा किया जाएगा; और
(ii) यदि हानि का इस प्रकार पूर्णतया मुजरा नहीं किया जा सकता तो इस प्रकार मुजरा न की गर्इ हानि की रकम को आगामी निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत किया जाएगा और इसी प्रकार आगे भी किया जाएगा।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

