समामेलन या अविलयन आदि में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध
समामेलन या अविलयन आदि में संचयित हानि और शेष अवक्षयण मोक के अग्रनयन और मुजरा करने से संबंधित उपबंध
72क. (1) जहां,–
(क) किसी औद्योगिक उपक्रम या किसी पोत या किसी होटल का स्वामित्व रखने वाली किसी कंपनी का किसी अन्य कंपनी से; या
(ख) बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खंड (ग) में निर्दिष्ट किसी बैंककारी कंपनी का किसी विनिर्दिष्ट बैंक से; या
(ग) वायुयान के प्रचालन के कारबार में लगी हुर्इ एक पब्लिक सेक्टर कंपनी या अधिक पब्लिक सेक्टर कंपनियों का उसी प्रकार के कारबार में लगी हुर्इ एक पब्लिक सेक्टर कंपनी या अधिक पब्लिक सेक्टर कंपनियों से,
समामेलन हुआ है, वहां इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, समामेलक कंपनी की संचयित हानि और अनामेलित अवक्षयण, उस पूर्ववर्ष के लिए, जिसमें समामेलन किया गया था, समामेलित कंपनी के आमेलित न किए गए अवक्षयण के लिए, यथास्थिति, हानि या मोक माने जाएंगे और इस अधिनियम के अवक्षयण के लिए हानि या मोक के मुजरा और अग्रनयन से संबंधित अन्य उपबंध तदनुसार लागू होंगे।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी संचयित हानि मुजरा या अग्रनीत नहीं की जाएगी और शेष अवक्षयण समामेलित कंपनी के निर्धारण में तब तक अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जब तक कि,–
(क) समामेलक कंपनी,–
(i) ऐसे कारबार में न लगी हो जिसमें तीन वर्ष या अधिक के लिए संचयित हानि हुर्इ थी या अवक्षयण अनामेलित रहा था;
(ii) समामेलन की तारीख को, समामेलन की तारीख के पूर्व दो वर्ष तक इसके द्वारा धारित स्थिर आस्तियों के कम से कम तीन बटा चार बही मूल्य को लगातार प्रतिधारित न करती हो;
(ख) समामेलित कंपनी,–
(i) समामेलन की तारीख से कम से कम पांच वर्ष की अवधि के लिए समामेलन की स्कीम में अर्जित की गर्इ समामेलक कंपनी की स्थिर आस्तियों के कम से कम तीन बटा चार बही मूल्य को लगातार प्रतिधारित न करती हो;
(ii) समामेलन की तारीख से कम से कम पांच वर्ष की अवधि के लिए समामेलक कंपनी का कारबार चालू न रखती हो;
(iii) ऐसी अन्य शर्तों को पूरा न करती हो, जो समामेलक कंपनी के कारबार को पुनर्जीवित करने को सुनिश्चित करने के लिए या यह सुनिश्चित करने के लिए कि समामेलन असली कारबार के प्रयोजन के लिए है, विहित की जाएं।
(3) किसी ऐसी दशा में, जिसमें उपधारा (2) में अधिकथित शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, समामेलित कंपनी के पास किसी पूर्ववर्ष में हानि या अवक्षयण मोक का मुजरा उस वर्ष के लिए, जिसमें ऐसी शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, कर से प्रभार्य समामेलित कंपनी की आय समझा जाएगा।
(4) जहां किसी उपक्रम का अविलयन हुआ है, वहां अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी अविलयित कंपनी की संचित हानि और शेष अवक्षयण के लिए मोक :–
(क) जहां हानि या शेष अवक्षयण प्रत्यक्षत: परिणामी कंपनी को अंतरित से संबंधित है, वहां पारिणामी कंपनी को अग्रनीत और मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा;
(ख) जहां ऐसी हानि और शेष अवक्षयण प्रत्यक्षत: परिणामी कंपनी को अंतरित उपक्रमों से संबंधित नहीं है, वहां अविलयित कंपनी और परिणामी कंपनी के बीच उसी अनुपात में प्रभाजित किया जाएगा जिसमें उपक्रम की आस्तियां अविलयित कंपनी द्वारा प्रतिधारित की गर्इ हैं और परिणामी कंपनी को अंतरित की गर्इ हैं, यथास्थिति, अविलयित कंपनी या परिणामी कंपनी को अग्रनीत या मुजरा किए जाने के लिए अनुज्ञात किया जाएगा।
(5) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसी शर्तें विनिर्दिष्ट कर सकेगी जो वह यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक समझे कि अविलयन असली कारबार के लिए है।
(6) जहां कारबार का पुनर्गठन होता है, जिसके द्वारा धारा 47 के खंड (xiii) में दी गर्इ शर्तों को पूरा करने वाली कोर्इ कंपनी किसी फर्म की उत्तरवर्ती होती है या धारा 47 के खंड (xiv) में दी गर्इ शर्तों को पूरा करने वाली कोर्इ कंपनी किसी स्वत्वधारी समुत्थान की उत्तरवर्ती होती है, वहां इस अधिनियम के किन्हीं अन्य उपबंधों में उल्लिखित किसी बात के होते हुए भी, यथास्थिति, पूर्ववर्ती फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान की संचित हानि और शेष अवक्षयण उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें कारबार का पुनर्गठन प्रभावी किया गया था, उत्तरवर्ती कंपनी के अवक्षयण के लिए हानि या मोक समझा जाएगा और अवक्षयण के लिए हानि और मोक का मुजरा करने और उसे अग्रनीत करने से संबंधित इस अधिनियम के अन्य उपबंध तदनुसार लागू होंगे:
परन्तु यदि धारा 47 के खंड (xiii) के परन्तुक में या खंड (xiv)के परन्तुक में दी गर्इ किन्हीं शर्तों का पालन नहीं किया जाता है तो उत्तरवर्ती कंपनी के पास किसी पूर्ववर्ष में किए गए अवक्षयण की हानि या मोक के मुजरा को उस वर्ष में, जिसमें ऐसी शर्त का पालन नहीं किया गया है, कर से प्रभार्य कंपनी की आय समझा जाएगा।
(6क) जहां कारबार का पुनर्गठन होता है, जिसके द्वारा धारा 47 के खंड (xiiiख) के परंतुक में अधिकथित शर्तों को पूरा करने वाली सीमित दायित्व वाली भागीदारी किसी प्राइवेट कंपनी या असूचीबद्ध पब्लिक कंपनी की उत्तरवर्ती होती है, वहां इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, पूर्ववर्ती कंपनी की संचित हानि और शेष अवक्षयण को उस पूर्व वर्ष के प्रयोजन के लिए, जिसमें कारबार का पुनर्गठन किया गया था। उत्तरवर्ती सीमित दायित्व वाली भागीदारी के अवक्षयण के लिए हानि या मोक समझा जाएगा और अवक्षयण के लिए हानि या मोक का मुजरा करने और उसे अग्रनीत करने से संबंधित इस अधिनियम के उपबंध तदनुसार लागू होंगे :
परंतु यदि धारा 47 के खंड (xiiiख) के परंतुक में अधिकथित किन्हीं शर्तों का पालन नहीं किया जाता है तो उत्तरवर्ती सीमित दायित्व वाली भागीदारी की किसी पूर्व वर्ष में किए गए अवक्षयण की हानि या मोक के मुजरा को उस वर्ष में, जिसमें ऐसी शर्तों का पालन नहीं किया गया है, कर से प्रभार्य सीमित दायित्व वाली भागीदारी की आय समझा जाएगा।
(7) इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(क) "संचित हानि" से यथास्थिति, पूर्ववर्ती फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान या प्राइवेट कंपनी या सीमित दायित्व वाली भागीदारी में संपरिवर्तन से पूर्व असूचीबद्ध पब्लिक कंपनी या समामेलक कंपनी या अविलयित कंपनी की "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" (जो सट्टे के कारबार से हुर्इ हानि नहीं है) शीर्षक के अधीन उतनी हानि अभिप्रेत है जो ऐसी पूर्ववर्ती फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान या कंपनी या समामेलक कंपनी या अविलयित कंपनी धारा 72 के उपबंधों के अधीन अग्रनीत करने और मुजरा करने की हकदार होती, यदि कारबार का पुनर्गठन या संपरिवर्तन या समामेलन या अविलयन नहीं हुआ होता;
(कक) ''औद्योगिक उपक्रम'' से कोर्इ ऐसा उपक्रम अभिप्रेत है जो,–
(i) माल के विनिर्माण या प्रसंस्करण में; या
(ii) कंप्यूटर साफ्टवेयर के विनिर्माण में; या
(iii) विद्युत या शक्ति के किसी अन्य रूप के उत्पादन या वितरण के कारबार में; या
(iiiक) दूरसंचार सेवाएं, चाहे आधारिक हों या सेलुलर, जिनके अंतर्गत रेडियो पेजिंग, घरेलू सेटेलाइट सेवा, टं्रकिंग नेटवर्क, ब्राडबैंड नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं भी हैं, उपलब्ध कराने के कारबार में; या
(iv) खनन में; या
(v) पोत, वायुयान या रेल प्रणाली के विनिर्माण में,
लगा हुआ है;
(ख) "शेष अवक्षयण" से यथास्थिति, पूर्ववर्ती फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान या प्राइवेट कंपनी या सीमित दायित्व वाली भागीदारी में संपरिवर्तन से पूर्व असूचीबद्ध पब्लिक कंपनी या समामेलक कंपनी या अविलयित कंपनी का उतना अवक्षयण मोक अभिप्रेत है, जो अनुज्ञात बना रहता है और जो इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन, यथास्थिति, पूर्ववर्ती फर्म या स्वत्वधारी समुत्थान या कंपनी या समामेलक कंपनी या अविलयित कंपनी को अनुज्ञात हुआ होता यदि कारबार का पुनर्गठन या संपरिवर्तन या समामेलन या अविलयन नहीं हुआ होता;
(ग) ''विनिर्दिष्ट बैंक'' से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक या भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में यथापरिभाषित कोर्इ समनुषंगी बैंक या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित कोर्इ तत्स्थानी नया बैंक अभिप्रेत है।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

