धारा 206ग का संशोधन।
धारा 206ग का संशोधन।
72. आय-कर अधिनियम की धारा 206ग में,-
(क) उपधारा (1घ) का लोप किया जाएगा;
(ख) उपधारा (1ड़) का लोप किया जाएगा;
(ग) उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (3क) और उपधारा (9) में ''या उपधारा (1घ)'' शब्दों, कोष्ठकों, अंक और अक्षर का, जहां-जहां वे आते है, लोप किया जाएगा;
(घ) उपधारा (6क) के पहले परंतुक में, ''उपधारा (1घ) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति से भिन्न'' शब्दों, कोष्ठकों, अंक और अक्षर का लोप किया जाएगा;
(ड़) उपधारा (7) के परंतुक में, ''उपधारा (1घ) में निर्दिष्ट किसी व्यक्ति से भिन्न'' शब्दों, कोष्ठकों, अंक और अक्षर का लोप किया जाएगा;
(च) उपधारा (11) के पश्चात् आने वाले स्पष्टीकरण में,-
(अ) खंड (कक) में,-
(I) उपखंड (ii) का लोप किया जाएगा;
(II) उपखंड (ii) में, स्पष्टीकरण के पश्चात्, निम्नलिखित उपखण्ड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात्:-
"(iii) उपधारा (1च) के संबंध में ऐसा कोर्इ व्यक्ति अभिप्रेत है, जो किसी विक्रय या उक्त उपधारा में विनिर्दिष्ट प्रकृति का माल अभिप्राप्त करता है, किंतु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं हैं,-
(अ) केंद्रीय सरकार, कोर्इ राज्य सरकार, किसी विदेशी राज्य का कोर्इ राजदूतावास, कोर्इ उच्चायोग, दूतावास, आयोग, कौंसल कार्यालय और व्यापार प्रतिनिधित्व; या
(आ) धारा 10 के खंड (20) के स्पष्टीकरण में यथा परिभाषित कोर्इ स्थानीय प्राधिकारी; या
(इ) कोर्इ ऐसी पब्लिक सेक्टर कंपनी, जो यात्रियों का वहन करने के कारबार में लगी हुर्इ है।";
(आ) खंड (कख) का लोप किया जाएगा।
(इ) खंड (ग) में, ''उपधारा (1) या उपधारा (1घ) की सारणी में विनिर्दिष्ट प्रकृति के माल का विक्रय किया जाता है या उपधारा (1घ) में निर्दिष्ट सेवाएं प्रदान की जाती हैं'' शब्दों, कोष्ठकों, अंकों और अक्षरों के स्थान पर, ''सारणी में विनिर्दिष्ट प्रकृति के माल का विक्रय किया जाता है'' शब्द रखें जाएंगे।'।

