आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 72

कारबार की हानियों का अग्रनीत किया जाना और मुजरा किया जाना

धारा

धारा संख्या

72

अध्याय शीर्षक

अध्याय VI - आय का एकत्रीकरण और हानि समायोजन या अग्रेषण

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2023

कारबार की हानियों का अग्रनीत किया जाना और मुजरा किया जाना

कारबार की हानियों का अग्रनीत किया जाना और मुजरा किया जाना

कारबार की हानियों का अग्रनीत किया जाना और मुजरा किया जाना

72. (1) जहां किसी निर्धारण वर्ष के लिए ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन संगणना का अंतिम परिणाम निर्धारिती के लिए हानि है, जो सट्टे के कारबार में उठार्इ गर्इ हानि नहीं है और ऐसी हानि का मुजरा धारा 71 के उपबंधों के अनुसार आय के किसी अन्य शीर्ष के अधीन होने वाली आय के प्रति नहीं किया जा सकता है या पूर्णत: नहीं किया गया है, वहां उस हानि का उतना भाग जितने का मुजरा इस प्रकार नहीं किया गया है, या जहां किसी अन्य शीर्ष के अधीन उसकी कोर्इ आय नहीं है वहां संपूर्ण हानि इस अध्याय के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी; और–

(i) उसका मुजरा उसके द्वारा चलाए गए उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय किसी कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभों के प्रति, यदि कोर्इ हो, किया जाएगा;

(ii) यदि उस हानि का मुजरा संपूर्णत: इस प्रकार नहीं किया जा सकता है तो हानि की ऐसी रकम जिसका मुजरा उस प्रकार नहीं किया जा सका, अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी और आगे भी इस प्रकार की जाती रहेगी :

परन्तु जहां ऐसी हानि संपूर्णत: या भागत: धारा 33ख में यथानिर्दिष्ट किसी ऐसे कारबार में हुर्इ हो जो उन परिस्थितियों में बंद किया गया है जिन्हें उस धारा में निर्दिष्ट किया गया है और तत्पश्चात् उस धारा में निर्दिष्ट तीन वर्ष की कालावधि की समाप्ति के पूर्व किसी भी समय निर्धारिती द्वारा ऐसा कारबार पुन:स्थापित किया गया हो, पुन: सन्निर्मित किया गया हो या पुन: चलाया गया हो, वहां ऐसी हानि का उतना भाग जितना ऐसे कारबार से हुआ माना जा सकता है ऐसे निर्धारण वर्ष को अग्रनीत किया जाएगा जो उस पूर्ववर्ष से सुसंगत है जिसमें वह कारबार इस प्रकार पुन:स्थापित किया गया है, पुन: सन्निर्मित किया गया है या पुन: चलाया गया है और–

() उसका मुजरा उसके द्वारा चलाए गए और उस निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारणीय उस कारबार या किसी अन्य कारबार के लाभों और अभिलाभों के प्रति, यदि कोर्इ हो, किया जाएगा; और

() यदि हानि का मुजरा संपूर्णत: इस प्रकार नहीं किया जा सकता है तो हानि की ऐसी रकम जिसका मुजरा उस प्रकार नहीं किया जा सके, उस दशा में, जिसमें इस प्रकार पुन:स्थापित, पुन: सन्निर्मित या पुन: चलाया गया कारबार निर्धारिती द्वारा चलाया जाता रहता है, अगले निर्धारण वर्ष के लिए अग्रनीत की जाएगी और इसी प्रकार से उसके ठीक बाद के सात निर्धारण वर्षों तक की जाती रहेगी।

(2) जहां किसी मोक या उसके भाग को धारा 32 की उपधारा (2) या धारा 35 की उपधारा (4) के अधीन अग्रनीत किया जाना हो, वहां इस धारा के उपबंधों को पहले प्रभावी किया जाएगा।

(3) कोर्इ ऐसी हानि (जो इस धारा की उपधारा (1) के परन्तुक में निर्दिष्ट हानि से भिन्न है) उस निर्धारण वर्ष के लिए जिसके लिए हानि की संगणना पहले की गर्इ थी, ठीक बाद के आठ निर्धारण वर्षों से अधिक के लिए इस धारा के अधीन अग्रनीत नहीं की जाएगी।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

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