धारा 269न का संशोधन
धारा 269न का संशोधन
69. आय-कर अधिनियम की धारा 269न में, 1 जून, 2015 से,—
(अ) आरंभिक भाग में,—
(क) ''उनको दिए गए किसी उधार या किए गए निक्षेप का प्रतिसंदाय'' शब्दों के पश्चात् ''या उसके द्वारा प्राप्त किसी विनिर्दिष्ट रकम का संदाय'' शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे;
(ख) ''उनको दिए गए किसी उधार या निक्षेप की रकम'' शब्दों के पश्चात् ''या संदत्त विनिर्दिष्ट अग्रिम'' शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे;
(आ) खंड (क) में, ''उधार या निक्षेप'' शब्दों के पश्चात् ''या विनिर्दिष्ट अग्रिम'' शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे;
(इ) खंड (ख) में, ''या'' शब्द अंत में अंत:स्थापित किया जाएगा;
(र्इ) खंड (ख) के पश्चात् और दीर्ध पंक्ति के पूर्व, निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :—
''(ग) ऐसे विनिर्दिष्ट अग्रिम पर संदेय ऐसे व्यक्ति द्वारा अपने नाम पर या किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्त: ऐसे संदाय की तारीख तक ब्याज, यदि कोर्इ है, के साथ, प्राप्त विनिर्दिष्ट अग्रिम की कुल रकम;'';
(उ) दूसरे परंतुक में ''किसी उधार या निक्षेप'' शब्दों के पश्चात् ''या विनिर्दिष्ट अग्रिम'' शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे;
(ऊ) स्पष्टीकरण में, खंड (iii) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात् :—
(iv) ''विनिर्दिष्ट अग्रिम'' से किसी स्थावर संपत्ति के अंतरण के संबंध में, चाहे अंतरण हुआ है या नहीं, चाहे जिस नाम से ज्ञात हो, अग्रिम की प्रकृति में की गई धनराशि अभिप्रेत है ;

