नए वर्गों 153क, 153ख और 153ग के निवेशन
नर्इ धारा 153क, 153ख और 153ग का अंत:स्थापन
65. आय-कर अधिनियम की धारा 153 के पश्चात् निम्नलिखित धाराएं 1 जून, 2003 से अंत:स्थापित की जाएंगी, अर्थात्:–
"153क. तलाशी या अध्यपेक्षा की दशा में निर्धारण – धारा 139, धारा 147, धारा 148, धारा 149, धारा 151 और धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे व्यक्ति की दशा में जहां 31 मर्इ, 2003 के पश्चात् धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132क के अधीन लेखा बहियों, अन्य दस्तावेजों या किन्हीं आस्तियों की अध्यपेक्षा की जाती है वहां निर्धारण अधिकारी–
(क) ऐसे व्यक्ति को सूचना जारी करेगा जिसमें उससे ऐसी अवधि के भीतर जो सूचना में विनिर्दिष्ट की जाए खंड (ख) में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों में आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत विहित प्ररूप में और विहित रीति से सत्यापित आय की विवरणी देने तथा ऐसी अन्य विशिष्टियां उपदर्शित करने की, जो विहित की जाएं, अपेक्षा की जाएगी तथा इस अधिनियम के उपबंध जहां तक हो सके तदनुसार इस प्रकार लागू होंगे मानो यह विवरणी ऐसी विवरणी है जो धारा 139 के अधीन दी जानी अपेक्षित है;
(ख) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें ऐसी तलाशी ली जाती है या अध्यपेक्षा की जाती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष से ठीक पूर्व के छह निर्धारण वर्षों की कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करेगा:
परंतु निर्धारण अधिकारी ऐसे छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत कुल आय का निर्धारण या पुनर्निर्धारण करेगा :
परंतु यह और कि इस धारा में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों की अवधि के भीतर आने वाले किसी निर्धारण वर्ष से संबंधित निर्धारण या पुनर्निर्धारण का, यदि कोर्इ हो, जो, यथास्थिति, धारा 132 के अधीन तलाशी लेने या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा करने की तारीख को लंबित हो, उपशमन हो जाएगा।
स्पष्टीकरण–शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा यह घोषणा की जाती है कि,–
(i) इस धारा 153ख और धारा 153ग में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के सभी अन्य उपबंध इस धारा के अधीन किए गए निर्धारण को लागू होंगे;
(ii) इस धारा के अधीन किसी निर्धारण वर्ष की बाबत किए गए किसी निर्धारण या पुनर्निधारण में, कर ऐसे निर्धारण वर्ष के लिए लागू दर या दरों पर प्रभार्य होगा।
153ख. धारा 153 के अधीन निर्धारण पूरा करने के लिए समय-सीमा–(1) धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी निर्धारण अधिकारी,–
(क) धारा 153क के खंड (ख) में निर्दिष्ट छह निर्धारण वर्षों के भीतर आने वाले प्रत्येक निर्धारण वर्ष की बाबत उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारों में से अंतिम का निष्पादन किया गया था, समाप्ति से दो वर्ष की अवधि के भीतर ;
(ख) उस पूर्ववर्ष से, जिसमें धारा 132 के अधीन तलाशी ली जाती है या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की जाती है, सुसंगत निर्धारण वर्ष की बाबत उस वित्तीय वर्ष की, जिसमें धारा 132 के भीतर तलाशी के लिए या धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा के लिए प्राधिकारों में से अंतिम का निष्पादन किया गया था, समाप्ति से, दो वर्ष की अवधि के भीतर,
निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करेगा।
स्पष्टीकरण–इस धारा के प्रयोजनों के लिए परिसीमा की अवधि की संगणना करने में,–
(i) वह अवधि, जिसके दौरान निर्धारण की कार्यवाही पर किसी न्यायालय के आदेश या व्यादेश के द्वारा रोक लगा दी जाती है; या
(ii) उस दिन से, जिसको निर्धारण अधिकारी धारा 142 की उपधारा (2क) के अधीन उसके लेखाओं की संपरीक्षा कराने का निदेश देता है, प्रारंभ होने वाली और उस दिन को, जिसको निर्धारिती से उस उपधारा के अधीन ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट देेने की अपेक्षा की जाती है, समाप्त होने वाली अवधि; या
(iii) पूरी कार्यवाही या उसके किसी भाग को पुन: शुरू करने में या निर्धारिती को धारा 129 के परन्तुक के अधीन पुन:सुनवार्इ का अवसर देने में लगा समय; या
(iv) उस दशा में जहां धारा 245ग के अधीन समझौता आयोग के समक्ष किया गया कोर्इ आवेदन उसके द्वारा नामंजूर कर दिया जाता है या उसके द्वारा उस पर कार्यवाही करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती है, वहां जिसको ऐसा आवेदन किया जाता है और प्रारंभ होने वाली उस तारीख से उसको धारा 245घ की उपधारा (1) के अधीन किया गया आदेश उस धारा की उपधारा (2) के अधीन आयुक्त द्वारा प्राप्त किया जाता है, समाप्त होने वाली अवधि,
अपवर्जित की जाएगी:
परंतु जहां पूर्वोक्त अवधि के अपवर्जन के ठीक पश्चात् इस धारा के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट परिसीमा की अवधि, यथास्थिति, निर्धारण या पुनर्निर्धारण का आदेश करने के लिए निर्धारण अधिकारी के पास साठ दिन से कम उपलब्ध है वहां ऐसी शेष अवधि को बढ़ाकर साठ दिन तक कर दिया जाएगा और परिसीमा की पूर्वोक्त अवधि को तदनुसार बढ़ाया गया समझा जाएगा।
(2) उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) में निर्दिष्ट प्राधिकार को,–
(क) तलाशी की दशा में, किसी ऐसे व्यक्ति की बाबत, जिसके मामले में प्राधिकार का वारंट जारी किया गया है, लिखे गए अंतिम पंचनामे में यथा अभिलिखित तलाशी पूरी होने पर,
(ख) धारा 132क के अधीन अध्यपेक्षा की दशा में, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लेखाबहियों या अन्य दस्तावेजों या आस्तियों के वस्तुत: प्राप्त होने पर,
निष्पादित किया गया समझा जाएगा।
153ग. किसी अन्य व्यक्ति की आय का निर्धारण – धारा 139, धारा 147, धारा 148, धारा 149, धारा 151 और धारा 153 में किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि कोर्इ धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य बहुमूल्य वस्तु या चीज या अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखाबहियां या दस्तावेज धारा 153क में निर्दिष्ट व्यक्ति से भिन्न किसी व्यक्ति का है या के हैं वहां अभिगृहीत या अध्यपेक्षित लेखाबहियां, दस्तावेज या आस्तियां ऐसे अन्य व्यक्ति पर अधिकारिता रखने वाले निर्धारण अधिकारी को सौंप दी जाएंगी और वह निर्धारण अधिकारी प्रत्येक ऐसे अन्य व्यक्ति के विरुद्ध कार्यवाही करेगा और ऐसे अन्य व्यक्ति को सूचना जारी करेगा तथा धारा 153क के उपबंधों के अनुसार ऐसे अन्य व्यक्ति की आय का निर्धारण या पुनर्निधारण करेगा।'।
[वित्त अधिनियम, 2003]

