विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए अप्रतिसंहरणीय अंतरण
विनिर्दिष्ट कालावधि के लिए अप्रतिसंहरणीय अंतरण
62. (1) धारा 61 के उपबंध किसी ऐसी आय को लागू नहीं होंगे जो किसी व्यक्ति को ऐसे अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त होती है, जो–
(i) ऐसे न्यास के तौर पर किया गया है जो हिताधिकारी के जीवन काल के दौरान प्रतिसंहरणीय नहीं है, तथा, अन्य किसी अंतरण की दशा में जो अंतरिती के जीवनकाल के दौरान प्रतिसंहरणीय नहीं है; या
(ii) 1 अप्रैल, 1961 से पूर्व किया गया हो और जो छह वर्ष से अधिक की कालावधि तक अप्रतिसंहरणीय नहीं हो :
परन्तु यह तब जबकि अंतरक किसी भी दशा में ऐसी आय से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: कोर्इ फायदा प्राप्त नहीं करता है।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी ऐसी सब आय जो किसी व्यक्ति को ऐसे किसी अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त होती है जब अंतरक को प्रतिसंहृत करने की शक्ति उत्पन्न हो, अंतरक की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगी और तब उसकी कुल आय में सम्मिलित की जाएगी।
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

