आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 6

योजनाएं में के लिए प्रदान किया जा सकता है जो योगदान और मामलों

धारा

धारा संख्या

6

अध्याय शीर्षक

अधिनियम

कर्मचारी भविष्य निधि और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम , 1952

वर्ष

योजनाएं में के लिए प्रदान किया जा सकता है जो योगदान और मामलों

योजनाओं में दिए जाने वाले अंशदान और विषय

योजनाओं में दिए जाने वाले अंशदान और विषय।

6. [* * *] नियोजक द्वारा निधि में दिया जाने वाला अंशदान प्रत्येक कर्मचारी को [ ( चाहे वह उसके द्वारा प्रत्यक्ष रूप से या ठेकेदार के माध्यम से नियोजित हो ) ] समय के लिए देय मूल वेतन, [महंगाई भत्ता और प्रतिधारण भत्ता ( यदि कोई हो)] का [दस] प्रतिशत] होगा और कर्मचारी का अंशदान नियोजक द्वारा उसके संबंध में देय अंशदान के बराबर होगा और [ यदि कोई कर्मचारी ऐसा चाहे तो, यह राशि उसके मूल वेतन, महंगाई भत्ता और प्रतिधारण भत्ता (यदि कोई हो) के [दस ] प्रतिशत से अधिक हो सकती है, इस शर्त के अधीन कि नियोजक इस धारा के अधीन देय अपने अंशदान से अधिक कोई अंशदान देने के लिए बाध्य नहीं होगा:]

[[बशर्ते कि यह कि किसी ऐसे स्थापन या स्थापनों के वर्ग पर लागू होने में, जिसे केन्द्रीय सरकार ऐसी जांच करने के पश्चात्, जैसा वह ठीक समझे, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट कर सकती है, यह धारा इस संशोधन के अधीन होगी कि " [ दस ] प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर, जहां-जहां वे आते हैं, दोनों स्थानों पर " [ बारह ] प्रतिशत" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे :]

[ आगे यह भी प्रावधान है कि] जहां इस अधिनियम के अधीन देय किसी अंशदान की रकम में एक रुपए का अंश अन्तर्वलित है, वहां स्कीम में ऐसे अंश को निकटतम रुपए, आधे रुपए या चौथाई रुपए तक पूर्णांकित करने का उपबंध किया जा सकेगा।

[ स्पष्टीकरण 1 ] : इस धारा के प्रयोजनों के लिए , महंगाई भत्ते में कर्मचारी को दी गई किसी खाद्य रियायत का नकद मूल्य भी सम्मिलित समझा जाएगा।

[ स्पष्टीकरण 2: इस [धारा] के प्रयोजनों के लिए, "प्रतिधारण भत्ता" से किसी कारखाने या अन्य स्थापन के किसी कर्मचारी को किसी ऐसी अवधि के दौरान, जिसमें स्थापन काम नहीं कर रहा हो, उसकी सेवाएं प्रतिधारित करने के लिए तत्समय संदेय भत्ता अभिप्रेत है।]

(2) और (3) [* * *]

 
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