कर के दायरे में मुनाफा
कर से प्रभार्य लाभ
59. (1) धारा 41 की उपधारा (1) के उपबंध धारा 56 के अधीन निर्धारिती को आय की संगणना करने में, यावत्शक्य, वैसे ही लागू होंगे जैसे वे "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन निर्धारिती की आय की संगणना करने में लागू होते हैं।
(2) 9[* * *]
(3) 10[* * *]
11[* * *]
9. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। इससे पहले उपधारा (2) इस प्रकार थी :
"(2) जहां कोर्इ भवन, मशीनरी, संयंत्र या फर्नीचर जिन्हें धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (ii) और (iii) लागू होते हैं, बेचे जाएं, तिरस्कृत, तोड़े या नष्ट किए जाएं तो धारा 41 की उपधारा (2) के उपबंध, यावत्शक्य, धारा 56 के अधीन निर्धारिती की आय की संगणना में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे 'कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ' शीर्ष के अधीन निर्धारिती की आय की संगणना करते समय लागू होते हैं।"
10. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। इससे पहले कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1971 द्वारा यथा अंत:स्थापित उपधारा (3) इस प्रकार थी :
"(3) जहां ऐसे भवन में या के संबंध में जिसे धारा 56 की उपधारा (2) का खंड (iii) लागू होता है, धारा 32 की उपधारा (1क) में निर्दिष्ट कोर्इ संरचना या संकर्म बेचा जाए तिरस्कृत किया जाए, तोड़ा जाए या नष्ट किया जाए या भवन संबंधी पट्टे या भोग के अन्य अधिकार की समाप्ति के फलस्वरूप अभ्यर्पित किया जाए वहां धारा 41 की उपधारा (2क) के उपबंध यथासंभव धारा 56 के अधीन निर्धारिती की आय की संगणना करते समय उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे 'कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ' शीर्ष के अधीन निर्धारिती की आय की संगणना करते समय लागू होते हैं।"
11. कराधान विधि (संशोधन और प्रकीर्ण उपबंध) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। लोप से पूर्व स्पष्टीकरण इस प्रकार था :
'स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "बेचा जाए" शब्द का वही अर्थ होगा जो धारा 32 की उपधारा (1) में है।'
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

