आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 55

'समायोजित'', ''सुधार की लागत'' और ''अर्जन की लागत'' के अर्थ

धारा

धारा संख्या

55

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

'समायोजित'', ''सुधार की लागत'' और ''अर्जन की लागत'' के अर्थ

'समायोजित'', ''सुधार की लागत'' और ''अर्जन की लागत'' के अर्थ

''समायोजित'', ''सुधार की लागत'' और ''अर्जन की लागत'' के अर्थ

55. (1) धारा 48 और 49 के प्रयोजनों के लिए–

() [* * *]

() ''किसी सुधार की लागत'' से,–

(1) किसी पूंजी आस्ति के संबंध में, जो किसी कारबार की गुडविल या किसी चीज या वस्तु के विनिर्माण, उत्पादन या प्रसंस्करण का अधिकार है या किसी कारबार को या वृत्ति  करने का अधिकार है, शून्य समझा जाएगा; और

(2) किसी अन्य पूंजी आस्ति के संबंध में,–

(i) जहां पूंजी आस्ति 1 अप्रैल, 71[2001], से पूर्व, पूर्वतन स्वामी या निर्धारिती की संपत्ति हो गई हो, वहां पूंजीगत प्रकृति का ऐसा सब व्यय अभिप्रेत है जो उक्त तारीख को या उसके पश्चात् पूंजी आस्ति में कोई परिवर्धन या परिवर्तन करने की बाबत पूर्वतन स्वामी या निर्धारिती द्वारा उपगत किया गया है, और

(ii) किसी अन्य दशा में, पूंजी आस्ति के निर्धारिती की संपत्ति हो जाने के पश्चात् उसके द्वारा और जहां पूंजी आस्ति धारा 49 की उपधारा (1) में दी गई किसी रीति से निर्धारिती की संपत्ति हो गई है, वहां पूर्वतन स्वामी द्वारा पूंजी आस्ति में कोई परिवर्तन करने में उपगत सभी पूंजीगत व्यय अभिप्रेत है,

किन्तु उसके अंतर्गत कोई ऐसा व्यय नहीं है जो ''प्रतिभूतियों पर ब्याज'', ''गृह संपत्ति से आय'', ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' अथवा ''अन्य स्रोतों से आय'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में कटौती योग्य है तथा ''सुधार'' पद का अर्थान्वयन तदनुसार किया जाएगा।

(2) धारा 48 और धारा 49 के प्रयोजनों के लिए ''अर्जन की लागत'' से–

71क[(क) किसी पूंजी आस्ति के संबंध में, जो किसी कारबार या वृत्ति की गुडविल या किसी कारबार से सहबद्ध कोई व्यापार चिन्ह या ब्रांड नाम है या किसी वस्तु या चीज का विनिर्माण, उत्पादन या प्रसंस्करण करने का अधिकार है या किसी कारबार या वृत्ति को चलाने का अधिकार है या कोई अभिधारण अधिकार या किसी मंजिली गाड़ी के परमिट या करघा घंटे हैं, —

   (i) ऐसी आस्ति के निर्धारिती द्वारा किसी पूर्वतन स्वामी से क्रय के द्वारा अर्जन की दशा में, क्रय कीमत की रकम अभिप्रेत है; और

  (ii) धारा 49 की उपधारा (1) के उपखंड (i) से उपखंड (iv) के अधीन आने वाले मामलों की दशा में और जहां आस्ति का अर्जन पूर्वतर स्वामी (जैसा कि उस धारा में परिभाषित किया गया है) द्वारा क्रय करके किया गया था, वहां ऐसे पूर्वतर स्वामी के लिए क्रय कीमत की रकम अभिप्रेत है; और

 (iii) किसी अन्य दशा में, उसे शून्य के रूप में माना जाएगा:

परन्तु जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कारबार या वृत्ति की गुडविल है, जिसके संबंध में धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 2021 को या उसके पश्चात् आरंभ होने वाले पूर्ववर्ष से सुसंगत निर्धारण वर्ष से पूर्ववर्ती किसी पूर्ववर्ष में अवक्षयण के मद्दे कोई कटौती अभिप्राप्त की गई है, वहां उपखंड (i) और उपखंड (ii) के उपबंध इस उपांतरण के साथ लागू होंगे कि निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 2021 को आरंभ होने वाले निर्धारण वर्ष से पूर्व धारा 32 की उपधारा (1) के अधीन अभिप्राप्त की गई अवक्षयण की कुल रकम को क्रय कीमत की रकम से घटा दिया जाएगा;]

(कक) उस दशा में, जहां ऐसी पूंजी आस्ति को, जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) की धारा 2 के खंड () के अर्थ में शेयर या कोई अन्य प्रतिभूति है (जिसे इस खंड में इसके पश्चात् वित्तीय आस्ति कहा गया है), धारण करने के आधार पर निर्धारिती–

() किसी अतिरिक्त वित्तीय आस्ति में अभिदाय करने का हकदार बन जाता है; या

() उसे बिना संदाय के अतिरिक्त वित्तीय आस्ति आबंटित की जाती है,

वहां खंड () के उपखंड (i) और उपखंड (ii)के उपबंधों के अधीन रहते हुए,–

(i) ऐसी मूल आस्ति के संबंध में, जिसके आधार पर निर्धारिती किसी अतिरिक्त वित्तीय आस्ति का हकदार बन जाता है, वहां ऐसी मूल वित्तीय आस्ति का अर्जन करने के लिए वास्तव में संदत्त गई रकम अभिप्रेत है;

(ii) ऐसी वित्तीय आस्ति में अभिदाय करने के लिए उक्त हकदारी का त्याग करने के किसी अधिकार के संबंध में, जब ऐसे अधिकार का निर्धारिती द्वारा किसी व्यक्ति के पक्ष में त्याग किया जाए, तो ऐसे निर्धारिती की दशा में लागत शून्य समझी जाएगी;

(iii) ऐसी वित्तीय आस्ति के संबंध में, जिसमें निर्धारिती ने उक्त हकदारी के आधार पर अभिदाय किया है, ऐसी आस्ति का अर्जन करने के लिए उसके द्वारा वास्तव में संदत्त रकम अभिप्रेत है;

(iiiक) धन दिए बिना निर्धारिती को आबंटित वित्तीय आस्ति के संबंध में और किसी अन्य आस्ति के धारण के आधार पर ऐसे निर्धारिती की दशा में शून्य समझी जाएगी; और

(iv) किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा खरीदी गई किसी आस्ति के संबंध में जिसके पक्ष में ऐसी आस्ति में अभिदाय करने के अधिकार का त्याग किया गया है, उसके द्वारा ऐसे अधिकार का त्याग करने वाले व्यक्ति को संदत्त की गई क्रय कीमत राशि और उसके द्वारा ऐसी वित्तीय आस्ति का अर्जन करने के लिए कंपनी या संस्था, जो भी हो, को संदत्त की गई रकम का योग अभिप्रेत है;

(कख) ऐसी पूंजी आस्ति के संबंध में जो साधारण शेयर हैं या भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) की धारा 3 के अधीन स्थापित भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा अनुमोदित अनपरस्परीकरण या निगमीकरण की किसी स्कीम के अधीन भारत में मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज के किसी शेयरधारक को आबंटित शेयर हैं, एक्सचेंज की उसकी मूल सदस्यता प्राप्त करने की कीमत होगी:

परन्तु किसी पूंजी आस्ति की लागत को, जो किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज के ऐसे शेयर धारक द्वारा अर्जित व्यापार या समाशोधन संबंधी अधिकार हैं, जिसे अनपरस्परीकरण या निगमीकरण की ऐसी स्कीम के अधीन साधारण शेयर या शेयरों का आबंटन किया गया है, शून्य समझा जाएगा;

72[(कग) खंड () के उपखंड (i) और उपखंड (ii) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के संबंध में, जो किसी कंपनी का साधारण शेयर है या किसी साधारण शेयरोन्मुखी निधि की कोई यूनिट है या धारा 112क में निर्दिष्ट किसी कारबार न्यास की कोई यूनिट है और जिसे 1 फरवरी, 2018 से पूर्व अर्जित किया गया है—

(i) ऐसी आस्ति के अर्जन की लागत का उच्चतर मूल्य होगी; और

(ii) (अ) ऐसी आस्ति के उचित बाजार मूल्य का निम्नतर मूल्य; और

() पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल के पूर्ण मूल्य का निम्नतर मूल्य होगी।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() ''उचित बाजार मूल्य'' से,—

(i) उस दशा में, जहां पूंजी आस्ति 31 जनवरी, 2018 को किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है, वहां उक्त तारीख को ऐसे एक्सचेंज में उस पूंजी आस्ति की कोट की गई उच्चतम कीमत अभिप्रेत है:

परंतु जहां 31 जनवरी, 2018 को ऐसे एक्सचेंज में उस आस्ति में कोई व्यापार नहीं होता है, वहां 31 जनवरी, 2018 से तुरंत पूर्व ऐसी तारीख को, जब ऐसे एक्सचेंज में ऐसी आस्ति का व्यापार किया गया था, ऐसे एक्सचेंज में ऐसी आस्ति की अधिकतम कीमत उसका उचित बाजार मूल्य होगी;

(ii) उस दशा में, जहां पूंजी आस्ति ऐसी यूनिट है, जो 31 जनवरी, 2018 को किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है, वहां उक्त तारीख को ऐसी यूनिट का शुद्ध आस्ति मूल्य अभिप्रेत है;

(iii) उस दशा में, जहां पूंजी आस्ति किसी ऐसी कंपनी का साधारण शेयर है, जो—

() 31 जनवरी, 2018 को किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है, किंतु अंतरण की तारीख को उस एक्सचेंज में सूचीबद्ध है;

() अंतरण की तारीख को, किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है और जो किसी ऐसे शेयर के प्रतिफल के रूप में, ऐसे संव्यवहार के माध्यम से, जिसे धारा 47 के अधीन अंतरण के रूप में नहीं समझा जाता है, किसी निर्धारिती की संपत्ति बन गई थी, जो 31 जनवरी, 2018 को किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं है,

वहां ऐसी रकम अभिप्रेत है, जो अर्जन की लागत से उस अनुपात में है, जो अनुपात वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक का उस पहले वर्ष, जिसमें आस्ति निर्धारिती द्वारा धारित की गई थी या 1 अप्रैल, 2001 से प्रारंभ होने वाले वर्ष, इनमें से जो भी पश्चातवर्ती हो, के लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के साथ है;

() ''लागत मुद्रास्फीति सूचकांक'' का वही अर्थ होगा, जो धारा 48 के स्पष्टीकरण के खंड (v) में उसका है;

() ''मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज'' का वही अर्थ होगा, जो धारा 43 के खंड (5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) में उसका है।]

() किसी अन्य पूंजी आस्ति के संबंध में–

(i) जहां ''पूंजी आस्ति'' 1 अप्रैल, 73[2001] के पहले निर्धारिती की संपत्ति हो गई हो, वहां निर्धारिती के विकल्प पर निर्धारिती को आस्ति प्राप्त करने की लागत या 74[2001] को आस्ति का उचित बाजार मूल्य अभिप्रेत है;

(ii) जहां पूंजी आस्ति धारा 49 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट रीतियों में से किसी रीति से निर्धारिती की संपत्ति हो गई हो और पूंजी आस्ति 1 अप्रैल, 74[2001] के पहले पूर्व स्वामी की संपत्ति हो गई हो, वहीं निर्धारिती के विकल्प पर पूर्व स्वामी की पूंजी आस्ति की लागत या 1 अप्रैल, 74[2001] को आस्ति का उचित बाजार मूल्य अभिप्रेत है;

74क[परंतु उपखंड (i) और उपखंड (ii) में निर्दिष्ट ऐसी पूंजी आस्ति की दशा में, जो भूमि या भवन या दोनों हैं, उक्त उपखंडों के प्रयोजनों के लिए, 1 अप्रैल, 2001 को ऐसी आस्ति का उचित बाजार मूल्य 1 अप्रैल, 2001 को स्टांप शुल्क मूल्य से वहां अधिक नहीं होगा, जहां कहीं ऐसा स्टांप शुल्क मूल्य उपलब्ध है।]

स्पष्टीकरण—इस परंतुक के प्रयोजनों के लिए ''स्टांप शुल्क मूल्य'' से किसी स्थावर संपत्ति के संबंध में स्टांप शुल्क के संदाय के प्रयोजन के लिए केन्द्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा अंगीकृत या निर्धारित या निर्धारणीय मूल्य अभिप्रेत है।

(iii) जहां पूंजी आस्ति किसी कंपनी के समापन पर उसकी पूंजी आस्तियों के वितरण पर निर्धारिती की सम्पत्ति हो गई हो और निर्धारिती पर धारा 46 के अधीन उस आस्ति की बाबत ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन आयकर निर्धारित किया गया हो, वहां वितरण की तारीख को आस्ति का उचित बाजार मूल्य अभिप्रेत है;

(iv) [* * *]

(v) जहां पूंजी आस्ति, जो कंपनी के शेयर या स्टाक के रूप में है–

() कंपनी की समस्त या किसी शेयर पूंजी के उसके विद्यमान शेयरों से बड़ी रकम के शेयरों में समेकन और विभाजन पर,

() कंपनी के किन्हीं शेयरों के स्टाक में बदलने पर,

() कंपनी के किसी स्टाक के पुन: शेयरों में बदलने पर,

() कंपनी के किन्हीं शेयरों के कम रकम के शेयरों में पुन: विभाजन पर, या

() कंपनी के एक प्रकार के शेयरों के दूसरे प्रकार में बदलने पर,

निर्धारिती की संपत्ति हो गई हो, वहां आस्ति के अर्जन की ऐसी लागत अभिप्रेत है जो शेयर या स्टाक के जिससे ऐसी आस्ति आई है, अर्जन की लागत के प्रति निर्देश में परिकलित की गई हो।

(3) जहां ऐसी लागत जिस पर पूर्व स्वामी ने संपत्ति अर्जित की है ज्ञात नहीं की जा सकती, वहां पूर्व स्वामी को अर्जन की लागत से उस तारीख का उचित बाजार मूल्य अभिप्रेत है जब ऐसी पूंजी आस्ति पूर्व स्वामी की संपत्ति हो गई हो।

 

 

71क. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से प्रतिस्थापित । प्रतिस्थापन से पूर्व खंड (क) निम्न प्रकार था

"() किसी पूंजी आस्ति के संबंध में जो किसी कारबार की गुडविल या किसी कारबार से सम्बद्ध कोई व्यापार चिन्ह या ब्रांड नाम या किसी चीज़ या वस्तु के विनिर्माण, उत्पादन या प्रसंस्करण का अधिकार या किसी कारबार या वृत्ति को करने का अधिकार, अभिधृति अधिकार, मंजिली गाड़ी परमिट या लूम काल है,–

(i) निर्धारिती द्वारा किसी पूर्व स्वामी से खरीदकर ऐसी आस्ति के अर्जन की दशा में क्रय कीमत की रकम अभिप्रेत है; और

(ii) किसी अन्य दशा में, जो धारा 49 की उपधारा (1) के खंड (i) से खंड (iv) में न हो लागत शून्य समझी जाएगी;"

74क. वित्त अधिनियम, 2020 द्वारा 1.4.2021 से अंत:स्थापित।

71. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से "1981" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

72. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018* से अंतस्थापित।

* तारीख 1.4.2019 होनी चाहिये।

73. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से ''1981'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

74. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से ''1981'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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