आवासिक संपत्ति के अंतरण पर पूंजी अभिलाभ का कतिपय दशाओं में प्रभारित न किया जाना
वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा 1.4.2013 से धारा 54छक के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 54छख अंत:स्थापित की जाएगी :
आवासिक संपत्ति के अंतरण पर पूंजी अभिलाभ का कतिपय दशाओं में प्रभारित न किया जाना
54छख. (1) जहां,–
(i) पूंजी अभिलाभ पात्र निर्धारिती के (जिसे इसमें निर्धारिती कहा गया है) स्वामित्वाधीन किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो आवासिक संपत्ति (कोर्इ गृह या भूखंड) है, अंतरण से उद्भूत होता है; और
(ii) निर्धारिती ने धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत किए जाने की नियत तारीख के पूर्व, शुद्ध प्रतिफल का किसी पात्र कंपनी के (जिसे इसमें कंपनी कहा गया है) साधारण शेयरों में अभिदाय के लिए उपयोग किया है; और
(iii) कंपनी ने निर्धारिती द्वारा साधारण शेयरों में अभिदाय की तारीख से एक वर्ष के भीतर इस रकम का उपयोग नर्इ आस्ति के क्रय के लिए किया है,
वहां पूंजी अभिलाभ को उस पूर्ववर्ष की, जिसमें अंतरण किया जाता है, आय के रूप में आय-कर से प्रभारित किए जाने के बजाय इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार बरता जाएगा, अर्थात्:–
(क) यदि शुद्ध प्रतिफल की रकम नर्इ आस्ति की लागत से अधिक है, तो पूंजी अभिलाभ का उतना भाग, जिसका संपूर्ण पूंजी अभिलाभ से वही अनुपात है जो नर्इ आस्ति की लागत का शुद्ध प्रतिफल से है, धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित नहीं किया जाएगा; या
(ख) यदि शुद्ध प्रतिफल की रकम नर्इ आस्ति की लागत के बराबर या उससे कम है, तो पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित नहीं किया जाएगा।
(2) शुद्ध प्रतिफल की रकम, जो कंपनी द्वारा निर्धारिती को शेयरों के पुरोधरण के लिए प्राप्त की गर्इ है, उस सीमा तक जिस तक उसका धारा 139 के अधीन निर्धारिती द्वारा आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख के पूर्व नर्इ आस्ति के क्रय के लिए कंपनी द्वारा उपयोग नहीं किया गया है, कंपनी द्वारा उक्त नियत तारीख के पूर्व ऐसे किसी बैंक या संस्था के, जो विनिर्दिष्ट की जाए, खाते में जमा की जाएगी और उसका उपयोग ऐसी किसी स्कीम के अनुसार किया जाएगा, जो केंद्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त बनाए और निर्धारिती द्वारा प्रस्तुत की गर्इ विवरणी के साथ ऐसे जमा किए जाने का सबूत संलग्न किया जाएगा।
(3) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कंपनी द्वारा नर्इ आस्ति के क्रय के लिए पहले से उपयोग की गर्इ रकम, यदि कोर्इ हो, और उपधारा (2) के अधीन जमा की गर्इ रकम को एक साथ नर्इ आस्ति की लागत समझा जाएगा;
परंतु यदि इस प्रकार जमा की गर्इ रकम का उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नर्इ आस्ति के क्रय के लिए पूर्णत: या भागत: उपयोग नहीं किया जाता है तो–
(i) वह रकम, जिससे–
(क) आवासिक संपत्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की वह रकम, जो उपधारा (1) में यथा उपबंधित नर्इ आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है,
उस रकम से अधिक है,
(ख) जो इस प्रकार प्रभारित नहीं की गर्इ होती, यदि उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर नर्इ आस्ति के क्रय के लिए वस्तुत: उपयोग की गर्इ रकम नर्इ आस्ति की लागत होती,
उस पूर्ववर्ष की, जिसमें निर्धारिती द्वारा साधारण शेयरों में अभिदाय की तारीख से एक वर्ष की अवधि समाप्त हो जाती है, निर्धारिती की आय के रूप में धारा 45 के अधीन प्रभारित की जाएगी; और
(ii) कंपनी उस रकम को स्कीम के अनुसार वापस लेने की हकदार होगी।
(4) यदि कंपनी के साधारण शेयरों या कंपनी द्वारा अर्जित की गर्इ नर्इ आस्ति को उनके अर्जन की तारीख से पांच वर्ष की अवधि के भीतर विक्रीत या अन्यथा अंतरित किया जाता है, तो आवासिक संपत्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की रकम को, जो उपधारा (1) में उपबंधित रूप में धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है, यथास्थिति, निर्धारिती या कंपनी के पास शेयरों या नर्इ आस्ति के अंतरण मद्दे उद्भूत होने वाले अभिलाभों की कराधेयता के अतिरिक्त, निर्धारिती की उस पूर्ववर्ष के, जिसमें ऐसे साधारण शेयरों या ऐसी नर्इ आस्ति को विक्रीत या अन्यथा अंतरित किया जाता है, "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझा जाएगा।
(5) इस धारा के उपबंध आवासिक संपत्ति के 31 मार्च, 2017 के पश्चात् हुए किसी अंतरण को लागू नहीं होंगे।
(6) इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "पात्र निर्धारिती" से कोर्इ व्यष्टि या हिन्दू अविभक्त कुटुंब अभिप्रेत है;
(ख) "पात्र कंपनी" से ऐसी कोर्इ कंपनी अभिप्रेत है, जो निम्नलिखित शर्तों को पूरा करती है, अर्थात्:–
(i) यह उस निर्धारण वर्ष से, जिसमें पूंजी अभिलाभ उद्भूत होता है, सुसंगत पूर्ववर्ष की 1 अप्रैल से निर्धारिती द्वारा धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी प्रस्तुत करने की नियत तारीख तक की अवधि के दौरान भारत में निगमित कंपनी है;
(ii) यह किसी वस्तु या चीज के विनिर्माण के कारबार में लगी हुर्इ है;
(iii) यह ऐसी कंपनी है, जिसमें निर्धारिती की पचास प्रतिशत से अधिक शेयर पूंजी या निर्धारिती द्वारा शेयरों में अभिदाय के पश्चात् पचास प्रतिशत से अधिक मतदान अधिकार है; और
(iv) यह ऐसी कोर्इ कंपनी है जो सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम अधिनियम, 2006 (2006 का 27) के अधीन लघु या मध्यम उद्यम होने के लिए अर्हित है;
(ग) "शुद्ध प्रतिफल" का वही अर्थ है, जो धारा 54च के स्पष्टीकरण में उसका है;
(घ) "नर्इ आस्ति" से नया संयंत्र और मशीनरी अभिप्रेत है, किंतु इसके अंतर्गत निम्नलिखित नहीं हैं,–
(i) ऐसी कोर्इ मशीनरी या संयंत्र, जिसका निर्धारिती द्वारा उसके संस्थापन से पूर्व, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा या तो भारत के भीतर या बाहर उपयोग किया गया था;
(ii) किसी कार्यालय परिसर या किसी आवासिक वास सुविधा में, जिसके अंतर्गत अतिथि गृह की प्रकृति की वास-सुविधा भी है, संस्थापित कोर्इ मशीनरी या संयंत्र;
(iii) कोर्इ कार्यालय साधित्र, जिनके अंतर्गत कंप्यूटर या कंप्यूटर साफ्टवेयर भी है;
(iv) कोर्इ यान; या
(v) ऐसी कोर्इ मशीनरी या संयंत्र, जिसकी संपूर्ण वास्तविक लागत को किसी पूर्ववर्ष की "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में कटौती के रूप में (चाहे अवक्षयण के रूप में या अन्यथा) अनुज्ञात किया जाता है।
[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

