आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 54छ

नगरीय क्षेत्र से औद्योगिक उपक्रम के स्थानांतरण की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों को छूट

धारा

धारा संख्या

54छ

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2022

नगरीय क्षेत्र से औद्योगिक उपक्रम के स्थानांतरण की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों को छूट

नगरीय क्षेत्र से औद्योगिक उपक्रम के स्थानांतरण की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों को छूट

नगरीय क्षेत्र से औद्योगिक उपक्रम के स्थानांतरण की दशा में आस्तियों के अंतरण पर पूंजी अभिलाभों को छूट

54छ. (1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां किसी नगरीय क्षेत्र में स्थित औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त पूंजी आस्ति के, जो मशीनरी या संयंत्र या भवन या भूमि या ऐसे भवनों या भूमियों में कोर्इ अधिकार है, (जिसे इस धारा में इसके पश्चात् मूल आस्ति कहा गया है) अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभ पर ऐसे औद्योगिक उपक्रम के किसी ऐसे क्षेत्र को (जो नगरीय क्षेत्र नहीं है) स्थानांतरित किए जाने के अनुक्रम में या उसके परिणामस्वरूप प्रभाव पड़ा है और निर्धारिती ने उस तारीख के, जिसको अंतरण किया गया है, पूर्व एक वर्ष या उसके पश्चात् तीन वर्ष की अवधि के भीतर,–

() उस क्षेत्र में, जहां उक्त उपक्रम स्थानांतरित किया जाता है, औद्योगिक उपक्रम के कारबार के प्रयोजनों के लिए नर्इ मशीनरी या संयंत्र का क्रय किया गया है;

() उक्त क्षेत्र में अपने कारबार के प्रयोजनों के लिए भवन या भूमि अर्जित की है या भवन बनाया है;

() मूल आस्ति का स्थानांतरण किया है और ऐसे उपक्रम के स्थापन को ऐसे क्षेत्र को अंतरित किया है; और

() ऐसे अन्य प्रयोजन पर, जो इस धारा के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा बनार्इ गर्इ स्कीम में विनिर्दिष्ट किए जाएं, व्यय उपगत किए हैं,

वहां पूंजी अभिलाभ पर उस पूर्ववर्ष की, जिसमें अंतरण किया जाता है, आय के रूप में आय-कर प्रभारित करने के बजाए इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार कार्रवार्इ की जाएगी, अर्थात् :–

(i) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम खंड ()से खंड()में उल्लिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के संबंध में उपगत लागत और व्यय से (ऐसी लागत और व्यय को इस धारा में इसके पश्चात् नर्इ आस्ति कहा गया है) अधिक है, तो पूंजी अभिलाभ की रकम और नर्इ आस्ति की लागत के बीच के अंतर को धारा 45 के अधीन पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित किया जाएगा; और नर्इ आस्ति की बाबत, यथास्थिति, उसके क्रय, अर्जन, निर्माण या अंतरण किए जाने के तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले किसी पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजनों के लिए लागत शून्य नहीं होगी; या

(ii) यदि पूंजी अभिलाभ की रकम नर्इ आस्ति की लागत के बराबर है या उससे कम है, तो पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा; और नर्इ आस्ति की बाबत, उसके क्रय, अर्जन, निर्माण या अंतरित किए जाने के तीन वर्ष की अवधि के भीतर उसके अंतरण से होने वाले किसी पूंजी अभिलाभ की संगणना के प्रयोजनों के लिए, लागत में से पूंजी अभिलाभ राशि घटा दी जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में, ''नगरीय क्षेत्र'' से किसी नगर निगम या नगर पालिका की सीमाओं के भीतर कोर्इ ऐसा क्षेत्र अभिप्रेत है जिसे केंद्रीय सरकार, जनसंख्या, उद्योगों के संकेन्द्रण, क्षेत्र की उचित योजना बनाने और अन्य सुसंगत बातों की आवश्यकता को ध्यान रखते हुए साधारण या विशेष आदेश द्वारा, इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए नगरीय क्षेत्र घोषित करे।

(2) पूंजी अभिलाभ की रकम, जो निर्धारिती द्वारा उस तारीख के जिसको मूल आस्ति का अंतरण किया गया है पूर्व एक वर्ष के भीतर उपधारा (1) के खंड (क) से खंड () में उल्लिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के संबंध में उपगत लागत और व्यय के लिए विनियोजित नहीं की जाती है या जिसका उसके द्वारा उपयोग धारा 139 के अधीन आय की विवरणी देने की तारीख से पूर्व पूर्वोक्त सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए नहीं किया जाता है, विवरणी देने के पूर्व उसके द्वारा किसी ऐसे बैंक या संस्था में किसी खाते में निक्षेप किया जाएगा [ऐसा निक्षेप किसी भी दशा में, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन उस निर्धारिती की दशा में आय की विवरणी देने के लिए लागू निश्चित तारीख तक किया जाएगा] जो ऐसी स्कीम में विनिर्दिष्ट हो और ऐसी स्कीम के अनुसार उसका उपयोग किया जाएगा, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस निमित्त बनाए तथा ऐसी विवरणी के साथ ऐसे निक्षेप का सबूत होगा; और उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए वह रकम, यदि कोर्इ हो, जिसका पूर्वोक्त सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए निर्धारिती द्वारा पहले ही उपयोग किया गया है, इस प्रकार निक्षेप की गर्इ रकम सहित नर्इ आस्ति की लागत समझी जाएगी:

परन्तु यदि इस उपधारा के अधीन जमा रकम का उपयोग उपधारा (1) के खंड() से खंड ()में उल्लिखित सभी या किन्हीं प्रयोजनों के लिए उस उपधारा में विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर पूर्णत: या भागत: नहीं किया जाता है, तो–

(i) इस प्रकार उपयोग न की गर्इ रकम धारा 45 के अधीन उस पूर्ववर्ष की आय के रूप में प्रभारित की जाएगी जिसमें मूल आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि समाप्त होती है; और

(ii) निर्धारिती पूर्वोक्त स्कीम के अनुसार ऐसी रकम वापस लेने का हकदार होगा।

स्पष्टीकरण.–[वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2022 द्वारा संशोधित रूप में]

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