आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 54ड़ड़

पूंजी अभिलाभ, किसी विनिर्दिष्ट निधि की यूनिटों में विनिधान पर प्रभारित नहीं किया जाएगा

धारा

धारा संख्या

54ड़ड़

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2016

पूंजी अभिलाभ, किसी विनिर्दिष्ट निधि की यूनिटों में विनिधान पर प्रभारित नहीं किया जाएगा

पूंजी अभिलाभ, किसी विनिर्दिष्ट निधि की यूनिटों में विनिधान पर प्रभारित नहीं किया जाएगा

वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा 1.4.2017 से धारा 54ड़घ के पश्चात्, निम्नलिखित धारा 54ड़ड़ अंत:स्थापित की जाएगी:

पूंजी अभिलाभ, किसी विनिर्दिष्ट निधि की यूनिटों में विनिधान पर प्रभारित नहीं किया जाएगा

54ड़ड़. (1) जहां दीर्घकालिक पूंजी आस्ति (जिसे इस धारा में मूल आस्ति कहा गया है) के अंतरण से पूंजी अभिलाभ उद्भूत होते हैं और निर्धारिती ने ऐसे अंतरण के पश्चात् छह मास की अवधि के भीतर किसी भी समय संपूर्ण पूंजी अभिलाभ या उसके किसी अंग का दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान किया है, वहां पूंजी अभिलाभ पर इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार विचार किया जाएगा, अर्थात् :–

() यदि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ से कम नहीं है तो ऐसा संपूर्ण पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;

() यदि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ से कम है, तो उसी अनुपात में उतना पूंजी अभिलाभ जैसा कि वह संपूर्ण पूंजी अभिलाभ के प्रति वहन करे जितना कि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की अर्जन लागत संपूर्ण पूंजी अभिलाभ के प्रति वहन करे, धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं होगा :

परंतु किसी निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 2016 को या उसके पश्चात् किसी वित्तीय वर्ष के दौरान दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में किया गया विनिधान पचास लाख रुपए से अधिक नहीं होगा :

परंतु यह और कि किसी निर्धारिती द्वारा ऐसे वित्तीय वर्ष के दौरान जिसमें मूल आस्ति या आस्तियां अंतरित की गर्इ थी और पश्चात्वर्ती वर्षों में एक या अधिक मूल आस्तियों के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभों से दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में किया गया विनिधान पचास लाख रुपए से अधिक नहीं होगा।

(2) जहां दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति, इसके अंतरण की तारीख से तीन वर्षों की अवधि के भीतर किसी भी समय निर्धारिती द्वारा अंतरित की जाती है, वहां, यथास्थिति, उपधारा (1) के खंड () या खंड () के उपबंधों के अनुसार ऐसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित न की गर्इ मूल आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की रकम, पूर्ववर्ष की, जिसमें दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति अंतरित की जाती है, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति से संबंधित "पूंजी आस्ति" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझी जाएगी ।

स्पष्टीकरण 1–ऐसे मामले में जहां मूल आस्ति अंतरित होती है और निर्धारिती मूल आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत संपूर्ण पूंजी अभिलाभ या उसके किसी अंश का किसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान करता है और ऐसा निर्धारिती ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति की प्रतिभूति पर कोर्इ उधार या अग्रिम लेता है तो यह समझा जाएगा कि उसने ऐसी तारीख को जब ऐसा उधार या अग्रिम लिया गया है, ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति अंतरित कर दी है।

स्पष्टीकरण 2–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

() किसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति के संबंध में, "लागत" से मूल आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत पूंजी अभिलाभों में से ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान की गर्इ रकम अभिप्रेत है;

() "दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति" से ऐसी निधि की, जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस निमित्त अधिसूचित की जाए 1 अप्रैल, 2019 के पूर्व जारी की गर्इ यूनिट या यूनिटें अभिप्रेत हैं।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट