आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 54ड़ग

कतिपय बंधपत्रों में विनिधान पर पूंजी अभिलाभ प्रभारित न किया जाना

धारा

धारा संख्या

54ड़ग

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2006

कतिपय बंधपत्रों में विनिधान पर पूंजी अभिलाभ प्रभारित न किया जाना

कतिपय बंधपत्रों में विनिधान पर पूंजी अभिलाभ प्रभारित न किया जाना

10[कतिपय बंधपत्रों में विनिधान पर पूंजी अभिलाभ प्रभारित न किया जाना

54ड़ग. (1) जहां पूंजी अभिलाभ, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है (इस प्रकार अंतरित पूंजी आस्ति को इस धारा में इसके पश्चात् मूल आस्ति कहा गया है) और निर्धारिती ने ऐसे अंतरण की तारीख के पश्चात् छह मास की अवधि के भीतर किसी समय दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ या उसके किसी भाग का विनिधान किया है, वहां पूंजी अभिलाभ के संबंध में कार्रवार्इ इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार की जाएगी, अर्थात्:–

() यदि दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत मूल आस्ति के अंतरण से उत्पन्न पूंजी अभिलाभ से कम नहीं है, तो ऐसा संपूर्ण पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;

() दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत मूल आस्ति के अंतरण से उत्पन्न पूंजी अभिलाभ से कम है, तो पूंजी अभिलाभ का उतना भाग जिसका सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ से वही अनुपात है जो दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति के अर्जन की लागत का सम्पूर्ण अभिलाभ से है, धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा।

(2) जहां दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति, अर्जन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर किसी समय अंतरित की जाती है, या धन में (अंतरण से अन्यथा) बदली जाती है, वहां मूल आस्ति के अंतरण से उत्पन्न होने वाले पूंजी अभिलाभ की राशि, जो उपधारा (1) के खंड () या खंड (), जो भी हो, में उपबंधित ऐसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है, उस पूर्ववर्ष की, जिसमें दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति को अंतरित किया जाता है, या धन में (अंतरण से अन्यथा) बदल दिया जाता है, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति से संबंधित ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझी जाएगी।

स्पष्टीकरण.–ऐसे मामले में, जहां मूल आस्ति को अंतरित किया जाता है और निर्धारिती, मूल आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उत्पन्न होने वाले सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ का या उसके किसी भाग का किसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति में विनिधान करता है तथा ऐसा निर्धारिती, उस विनिर्दिष्ट आस्ति की प्रतिभूति पर कोर्इ उधार या अग्रिम धन लेता है, यह समझा जाएगा कि उसने उस तारीख को जिसको ऐसा उधार या अग्रिम धन लिया गया है, उस विनिर्दिष्ट आस्ति को धन में (अंतरण से भिन्न) संपरिवर्तित लिया है।

10क[(3) जहां दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए हिसाब में ली गर्इ है, वहां–

() ऐसी लागत के संबंध में आय-कर की राशि में से कोर्इ कटौती, 1 अपै्रल, 2006 से पूर्व समाप्त होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए धारा 88 के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी;

() ऐसी लागत के संबंध में आय से कोर्इ कटौती, 1 अपै्रल, 2006 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए, धारा 80ग के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–

() किसी दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति के संबंध में, ''लागत'' से मूल आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उत्पन्न पूंजी अभिलाभों में से ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति में लगार्इ गर्इ रकम अभिप्रेत है;

11[() "दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति" से ऐसा कोर्इ बंधपत्र अभिप्रेत है, जो तीन वर्ष के पश्चात् मोचनीय है और जो 1 अपै्रल, 2006 को या उसके पश्चात्,–

(i) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1988 (1988 का 68) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा जारी किया गया है और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया गया है; या

(ii) ग्राम विद्युतिकरण निगम लिमिटेड द्वारा, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनार्इ गर्इ और रजिस्ट्रीकृत कंपनी है, जारी किया गया है और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, केंद्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचित किया गया है।]

 

10. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित। परिपत्र सं. 791, तारीख 2.6.2000 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

10क. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व उपधारा (3) इस प्रकार थी :

"(3) जहां दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति की लागत, उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) के प्रयोजनों के लिए हिसाब में ली गर्इ है, वहां ऐसी लागत के संदर्भ में आयकर राशि में से कटौती धारा 88 के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।"

11. वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा 1.4.2006 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व स्पष्टीकरण का खंड (), जो वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से प्रतिस्थापित और वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से संशोघित किया गया था, इस प्रकार था :

"() ''दीर्घकालिक विनिर्दिष्ट आस्ति'' से अभिप्रेत है–

(i) राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक अधिनियम, 1981 (1981 का 61) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक द्वारा या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण अधिनियम, 1988 (1988 का 68) की धारा 3 के अधीन गठित भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा 1 अप्रैल, 2000 को या उसके पश्चात्;

(ii) रूरल इलैक्ट्रीफिकेशन कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा, जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) के अधीन बनार्इ गर्इ और रजिस्टर्ड कंपनी है, 1 अप्रैल, 2001 को या उसके पश्चात्;

(iii) राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा या भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक अधिनियम, 1989 (1989 का 39) की धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थापित भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक द्वारा 1 अप्रैल, 2002 को या उसके पश्चात्, जारी किया गया ऐसा कोर्इ बंधपत्र जो तीन वर्ष के पश्चात् मोचनीय हो।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट