पूंजी आस्तियों के अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों का कुछ दशाओं में प्रभारित न किया जाना
46[पूंजी आस्तियों के अंतरण से होने वाले पूंजी अभिलाभों का कुछ दशाओं में प्रभारित न किया जाना
4754ड़. (1) जहां पूंजी अभिलाभ 48[1 अप्रैल, 1992 से पूर्व] किसी 49[दीर्घकालिक पूंजी आस्ति] के अंतरण से उत्पन्न होता है] (इस प्रकार अंतरित पूंजी आस्ति को इस धारा में आगे मूल आस्ति कहा गया है) और निर्धारिती ने ऐसे अंतरण की तारीख के पश्चात् छह मास की अवधि के भीतर किसी विनिर्दिष्ट आस्ति में (ऐसी विनिर्दिष्ट आस्ति को इस धारा में आगे नर्इ आस्ति कहा गया है) 50[सम्पूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग] का विनिधान या निक्षेप किया गया है, वहां पूंजी अभिलाभ के संबंध में कार्रवार्इ इस धारा के निम्नलिखित उपबंधों के अनुसार की जाएगी, अर्थात्–
(क) यदि नर्इ आस्ति की लागत मूल आस्ति की बाबत 51[शुद्ध प्रतिफल] से कम नहीं है तो ऐसा सम्पूर्ण पूंजी अभिलाभ धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा;
(ख) यदि नर्इ आस्ति की लागत मूल आस्ति की बाबत 51[शुद्ध प्रतिफल] से कम ह,ै तो पूंजी अभिलाभ का उतना भाग जो पूरे पूंजी अभिलाभ के उस अनुपात में है जो नर्इ आस्ति के अर्जन की लागत के 52[शुद्ध प्रतिफल] से है, धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं किया जाएगा :
53[परन्तु ऐसी दशा में जिसमें मूल आस्ति का 28 फरवरी, 1983 के पश्चात् अंतरण किया गया है, इस उपधारा के उपबंध तभी लागू होंगे जब निर्धारिती ने सम्पूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग का, जो भी हो, नर्इ आस्ति में विनिधान या निक्षेप उसमें (नर्इ आस्ति में) प्रारंभ से अभिदाय करके, कर दिया है:]
54[परन्तु यह और कि किसी ऐसी दशा में जिसमें मूल आस्ति का अंतरण किसी विधि के अधीन अनिवार्य अर्जन के रूप में है और ऐसे अर्जन के लिए दिलवाए गए प्रतिकर की पूरी रकम, निर्धारिती को ऐसे अंतरण की तारीख को प्राप्त नहीं होती है, वहां इस उपधारा में निर्दिष्ट छह मास की अवधि ऐसे प्रतिकर के उतने भाग के संबंध में जितना अंतरण की तारीख को प्राप्त होता है, ऐसी तारीख से जिसको ऐसा प्रतिकर निर्धारिती को प्राप्त होता है, ठीक बाद की तारीख से 55[या 31 मार्च, 1992 से, इनमें से जो भी पहले हो] गिनी जाएगी।]
स्पष्टीकरण 1.–56[इस धारा के प्रयोजनों के लिए ''विनिर्दिष्ट आस्ति'' से अभिप्रेत है,–
(क) ऐसे मामले में जहां मूल आस्ति का अंतरण 1 मार्च, 1979 के पूर्व किया जाता है, वहां निम्नलिखित आस्तियों में से कोर्इ आस्ति अर्थात्:–]
(i) केंद्रीय सरकार या किसी राज्य सरकार की प्रतिभूतियां;
(ii) सरकारी बचतपत्र अधिनियम, 1959 (1959 का 46) की धारा 2 के खंड (ग) में परिभाषित बचत पत्र57;
(iii) भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट की यूनिटें;
(iv) धारा 80ठ की उपधारा (1) के खंड (ii) के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट डिबेंचर;
(v) किसी भारतीय कंपनी के शेयर, जो जनता को जारी किए जाने हैं या जो प्रतिभूति संविदा (विनियमन) अधिनियम, 1956 (1956 का 42) या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं नियमों के अनुसार भारत में किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सूची में दर्ज किए जाते हैं 58[जहां ऐसे शेयरों में निवेश 1 मार्च, 1978 के पूर्व किया गया हो];
59[(vक) साधारण शेयर, जो उपर्युक्त पूंजी इश्यू के भागरूप हैं किन्तु ऐसे शेयरों में विनिधान 28 फरवरी, 1978 के पश्चात् किया गया हो;]
(vi) भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन स्थापित भारतीय स्टेट बैंक में या भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में परिभाषित किसी समनुषंगी बैंक में या बैंककारी कम्पनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन गठित किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में अर्थात् तत्स्थानी नए बैंक में या बैंककारी कारबार में लगी हुर्इ किसी सहकारी सोसाइटी में (जिसमें सहकारी भूमि बंधक बैंक या सहकारी भूमि विकास बैंक भी है) कम से कम तीन वर्ष के लिए जमा;
60[(ख) ऐसे मामले में, जिसमें मूल आस्ति का 28 फरवरी, 1979 के पश्चात् 61[किंतु 1 मार्च, 1983 के पहले] अंतरण किया जाता है ऐसे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बंधपत्र जिन्हें केन्द्रीय सरकार राजपत्र में इस निमित्त अधिसूचित62 करे;]
63[(ग) ऐसे मामलों में, जिनमें मूल आस्ति का 28 फरवरी, 1983 के पश्चात् 64[किन्तु 1 अप्रैल, 1986 से पूर्व] अंतरण किया जाता है निम्नलिखित आस्तियों में से कोर्इ आस्ति, अर्थात्:–
(i) केन्द्रीय सरकार को प्रतिभूतियों, जिन्हें वह सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
(ii) भारतीय यूनिट ट्रस्ट अधिनियम, 1963 (1963 का 52) के अधीन स्थापित भारतीय यूनिट ट्रस्ट की यूनिटों की विशेष सिरीज जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना65 द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;
(iii) ऐसे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास बंधपत्र (बांड) जो स्पष्टीकरण 1 के खंड (ख) के अधीन अधिसूचित66 किए गए हैं या जो केन्द्रीय सरकार द्वारा इस खंड के अधीन इस निमित्त अधिसूचित किए जाएं;
(iv) हाउसिंग एण्ड अरबन डवलपमेन्ट कारपोरेशन लिमिटेड [जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में परिभाषित सरकारी कंपनी67 है] द्वारा निकाले गए ऐसे डिबेंचर जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे;]
68[(घ) उस मामले में जिसमें मूल आस्ति का अंतरण 31 मार्च, 1986 के बाद किया गया है खंड (ग) में विनिर्दिष्ट कोर्इ आस्ति और किसी पब्लिक सेक्टर कंपनी द्वारा निकाले गए ऐसे बंधपत्र जो केन्द्रीय सरकार राजपत्र में अधिसूचना69 द्वारा इस निमित्त अंकित करें; 70[* * *]]
71[(ड़) उस दशा में, जहां मूल आस्ति का अंतरण 31 मार्च, 1989 के बाद किया गया है, खंड (ग) और खंड (घ) में अंकित कोर्इ आस्ति और राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा निकाले गए ऐसे डिबेंचर या बंधपत्र, जो केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में अधिसूचना72 द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।]
73[स्पष्टीकरण 2.–''उपयुक्त पूंजी पुरोधरण'' का वही अर्थ होगा जो धारा 80गग की उपधारा (3) में है।]
74[स्पष्टीकरण 3.–जब तक निर्धारिती ने धारा 80गग की उपधारा (4) में विनिर्दिष्ट रीति से शेयरों का अभिदाय नहीं किया है या वे खरीदे नहीं हैं तब तक यह नहीं समझा जाएगा कि निर्धारिती ने 75[सम्पूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग का स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) के उपखंड (vक) में विनिर्दिष्ट साधारण शेयरों में] विनिधान (निवेश) किया है।]
स्पष्टीकरण 76[4].–किसी नर्इ आस्ति के संबंध में जो स्पष्टीकरण 1 के 77[खंड (क) के उपखंड (vi)] में उल्लिखित निक्षेप है, ''लागत'' से ऐसे निक्षेप की रकम अभिप्रेत है।
78[स्पष्टीकरण 5.–पूंजी आस्ति के अंतरण के संबंध में ''शुद्ध प्रतिफल'' से अभिप्रेत है पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या निकलने वाले प्रतिफल का पूरा मूल्य जो ऐसे अंतरण के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: किए गए किसी व्यय को घटाकर आए।]
79[(1क) जहां निर्धारिती ने 27 अप्रैल, 1978 के पश्चात् 80[मूल आस्ति की बाबत सम्पूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग] का किसी नर्इ आस्ति में निक्षेप किया है जो उपधारा (1) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण 1 के 81[खंड (क) के उपखंड (vi)] में उल्लिखित निक्षेप है, वहां ऐसी नर्इ आस्ति की लागत को इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा जब तक कि निम्नलिखित शर्तें पूरी न हों, अर्थात्–
(क) निर्धारिती उक्त 82[उपखंड (vi)] में उल्लिखित बैंक या सहकारी सोसाइटी को जिसमें ऐसा निक्षेप किया जाता है, निक्षेप के साथ इस आशय की लिखित घोषणा देता है कि निर्धारिती निक्षेप करने की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के दौरान ऐसे निक्षेप की प्रतिभूति पर कोर्इ उधार या अग्रिम नहीं लेगा;
(ख) निर्धारिती उस पूर्ववर्ष से जिसमें मूल आस्ति का अंतरण किया गया था, सुसंगत निर्धारण वर्ष के लिए आय की विवरणी के साथ या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर जो 83[निर्धारण] अधिकारी द्वारा अनुज्ञात किया जाए; ऐसे बैंक के कम से कम सब-एजेंट, एजेंट या प्रबंधक की पंक्ति के या ऐसी सहकारी सोसाइटी के तत्समान पंक्ति के अधिकारी द्वारा उचित ढंग से सत्यापित उस घोषणा की प्रति देता है जो खंड (क) में उल्लिखित है।]
84[(1ख) जहां उपधारा (1क) में बतार्इ गर्इ शर्तें पूरी हो जाने पर उस उपधारा में उल्लिखित नर्इ आस्ति की लागत उपधारा (1) के लिए हिसाब में ली जाती है, वहां निर्धारिती तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति से जिसकी गणना ऐसे निक्षेप की तारीख से की जाएगी, नब्बे दिन की अवधि के भीतर 85[निर्धारण] अधिकारी को उपधारा (1क) के खंड (ख) में निर्दिष्ट अधिकारी का ऐसा प्रमाणपत्र देगा कि निर्धारिती ने उक्त तीन वर्ष की अवधि के भीतर ऐसे निक्षेप की प्रतिभूति पर कोर्इ उधार या अग्रिम धन नहीं लिया है।]
86[(1ग) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां पूंजी अभिलाभ ऐसी मूल आस्ति के जिसकी बाबत निर्धारिती ने 29 फरवरी, 1992 को या उसके पूर्व अग्रिम के रूप में कोर्इ रकम प्राप्त की थी और ऐसी सम्पूर्ण रकम या उसके किसी भाग का उस तारीख को या उसके पूर्व नर्इ आस्ति में विनिधान या निक्षेप किया था, 31 मार्च, 1992 के पश्चात् किए गए अंतरण से उत्पन्न होता है, वहां उपधारा (1) के खंड (क) और खंड (ख) के उपबंध ऐसे विनिधान या निक्षेप की दशा में इस प्रकार लागू होंगे जैसे वे उस उपधारा के अधीन विनिधान या निक्षेप की दशा में लागू होते हैं।]
(2) जहां नर्इ आस्ति अर्जन की तारीख से तीन वर्ष की अवधि के भीतर अंतरित की जाती है, या धन में बदली (अंतरण से भिन्न) जाती है, वहां मूल आस्ति के अंतरण से होने वाली पूंजी अभिलाभ की रकम जो उपधारा (1) के, यथास्थिति, खंड (क) या खंड (ख) में उपबंधित ऐसी नर्इ आस्ति की लागत के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है, उस पूर्ववर्ष के लिए जिसमें नर्इ आस्ति अंतरित की जाती है या धन में (अंतरण से भिन्न) बदली जाती है, वहां 87[दीर्घकालिक पूंजी आस्तियों] के संबंध में ''पूंजी लाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझी जाएगी।
88[89[स्पष्टीकरण 1].–जहां निर्धारिती 27 अप्रैल, 1978 के पश्चात् किसी 90[मूल आस्ति की बाबत सम्पूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग] का नर्इ आस्ति में निक्षेप करता है जो उपधारा (1) के नीचे स्पष्टीकरण 1 के नीचे के 91[खंड (क) के उपखंड (vi)] में उल्लिखित निक्षेप है और निर्धारिती ऐसे निक्षेप की प्रतिभूति पर कोर्इ उधार या अग्रिम लेता है, वहां यह समझा जाएगा कि उसने इस तारीख को जिसको ऐसी उधार या अग्रिम राशि ली गर्इ है, ऐसे निक्षेप को धन में (अंतरण से भिन्न) बदल लिया है।]
92[स्पष्टीकरण 2.–ऐसे मामले में जिसमें मूल आस्ति 28 फरवरी, 1983 के पश्चात् अंतरित की जाए और निर्धारिती मूल आस्ति की बाबत संपूर्ण शुद्ध प्रतिफल या उसके किसी भाग का किसी नर्इ आस्ति में निवेश (विनिधान) करे तथा ऐसा निर्धारिती ऐसी नर्इ आस्ति की प्रतिभूति पर कोर्इ उधार या अग्रिम ले, तो यह समझा जाएगा कि उसने उस तारीख को जिसको ऐसा उधार या अग्रिम लिया था, ऐसी नर्इ आस्ति को (अंतरण से भिन्न) धन में बदल लिया है।]
93[* * *]
94[* * *]
95[* * *]
96[(3)] जहां उपधारा (1) के नीचे के स्पष्टीकरण 1 के 97[खंड (क) के उपखंड (vक)] में उल्लिखित साधारण शेयरों की लागत उपधारा (1) के खंड (ख) 98[* * *] के प्रयोजनों के लिए हिसाब में ली जाती है, वहां ऐसी लागत के संदर्भ में कोर्इ कटौती धारा 80गग के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी।]
46. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1977 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
47. परिपत्र सं. 359, तारीख 10.5.1983 और परिपत्र सं. 560, तारीख 18.5.1990 भी देखिये। ब्यौरे के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
48. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।
49. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''पूंजी आस्ति, जो अल्पकालिक पूंजी आस्ति न हो'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
50. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से ''ऐसे अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत होने वाले प्रतिफल के पूर्ण मूल्य या उसके किसी भाग'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
51. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से ''प्राप्त या प्रोद्भूत होने वाले प्रतिफल के पूर्ण मूल्य'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
52. यथोक्त द्वारा ''ऐसे प्रतिफल के पूर्ण मूल्य'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
53. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित।
54. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।
55. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।
56. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से "इस उपधारा और उपधारा (3) के प्रयोजनों के लिए, ''विनिर्दिष्ट आस्ति'' से निम्नलिखित आस्तियों में से कोर्इ अभिप्रेत है, अर्थात् :–" इटैलिक शब्द वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित किए गए थे।
57. ''बचत पत्र'' की परिभाषा के लिए, देखिये पूर्व पृष्ठ 1.147 पर पाद टिप्पण 61.
58. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
59. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अन्त:स्थापित।
60. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से अंत:स्थापित।
61. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित।
62. अधिसूचना के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
63. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित।
64. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
65. अधिसूचना के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
66. अधिसूचना के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
67. ''सरकारी कंपनी'' की परिभाषा के लिए, देखिये पूर्व पृष्ठ 1.25 पर पाद-टिप्पण 57.
68. वित्त अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।
69. अधिसूचना के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
70. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1987 से लोप किया गया।
71. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1990 से अन्त:स्थापित।
72. अधिसूचना के लिए, देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
73. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
74. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
75. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से, ''प्रतिफल का पूरा मूल्य या उसका कोर्इ भाग खंड (vक) में निर्दिष्ट किन्हीं साधारण शेयरों में'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
76. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से ''2'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
77. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से, ''खंड (vi)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
78. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।
79. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
80. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से, ''ऐसे अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत होने वाले प्रतिफल का पूर्ण मूल्य या उसके किसी भाग'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
81. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से ''खंड (vi)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
82. यथोक्त द्वारा ''खंड (vi)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
83. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आय-कर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
84. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
85. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''आय-कर'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
86. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1992 द्वारा अंत:स्थापित।
87. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''अल्पकालिक पूंजी आस्तियों से भिन्न पूंजी आस्तियों" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
88. वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित।
89. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से स्पष्टीकरण 1 के रूप में संख्यांकित।
90. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से, ''ऐसे अंतरण के फलस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत होने वाले प्रतिफल का पूर्ण मूल्य या उसके किसी भाग'' शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।
91. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से ''खंड (vi)'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
92. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित।
93. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। मूल उपधारा (3) वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। लोप से पहले उपधारा (3) वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1983 से और वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से यथासंशोधित की गयी थी।
94. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। मूल उपधारा (4) वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। लोप से पहले उपधारा (4) वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से यथासंशोधित की गयी थी।
95. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से लोप किया गया। मूल उपधारा (5) वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित की गर्इ थी। लोप से पहले उपधारा (5) वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से यथासंशोधित की गयी थी।
96. उपधारा (6) जो मूलत: वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1978 से अंत:स्थापित की गर्इ थी, वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से उपधारा (3) के रूप में पुन: संख्यांकित की गर्इ।
97. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1979 से "खंड (vक)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
98. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से ''या उपधारा (3) के खंड (क) या खंड (ख)'' का लोप किया गया।
[वित्त अधिनियम, 2005 तथा विशेष आर्थिक जोन अधिनियम, 2005 द्वारा संशोधित रूप में]

