खंड 115द का संशोधन
धारा 115ञक का संशोधन
51. आय-कर अधिनियम की धारा 115ञक की उपधारा (2) के स्पष्टीकरण में, खंड (iii) और उसके स्पष्टीकरण के स्थान पर, निम्न प्रतिस्थापित किया जाएगा और 1 अप्रैल, 1997 से प्रतिस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् :–
"(iii) अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की राशि, लेखा बहियों के अनुसार इनमें से जो भी कम हो।
स्पष्टीकरण–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,–
(क) हानि के अंतर्गत अवक्षयण नहीं आएगा;
(ख) इस खंड के उपबंध तब लागू नहीं होंगे यदि अग्रनीत की गर्इ हानि या शेष अवक्षयण की रकम शून्य है; या"।
[वित्त अधिनियम, 2002]

