आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 50ख

मंदी विक्रय की दशा में पूंजी अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

50ख

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2004

मंदी विक्रय की दशा में पूंजी अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

मंदी विक्रय की दशा में पूंजी अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

8[मंदी विक्रय की दशा में पूंजी अभिलाभ की संगणना के लिए विशेष उपबंध

50ख. (1) किसी पूर्ववर्ष में किए गए मंदी विक्रय से उद्भूत कोर्इ लाभ या अभिलाभ, दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ के रूप में आय-कर से प्रभार्य होगा और उस पूर्ववर्ष की, जिसमें अंतरण होता है, आय समझा जाएगा :

परन्तु मंदी विक्रय के अधीन किसी ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से, जो निर्धारिती के उसके अंतरण की ठीक पूर्ववर्ती तारीख से छत्तीस मास में अनधिक तक स्वामित्व वाला और उसके द्वारा धारित एक या अधिक उपक्रम हैं, उद्भूत कोर्इ लाभ या अभिलाभ अल्पकालिक पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा।

(2) किसी पूंजी आस्ति के संबंध में, जो ऐसे विक्रय के रूप में अंतरित कोर्इ उपक्रम या प्रभाग है धारा 48 और धारा 49 के प्रयोजनों के लिए अर्जन की लागत और सुधार की लागत, यथास्थिति, उपक्रम या प्रभाग का "शुद्ध लाभ" मानी जाएगी और धारा 48 के दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट उपबंधों पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।

(3) प्रत्येक निर्धारिती, मंदी विक्रय की दशा में, आय की विवरणी के साथ विहित फार्म9 में धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे दिए स्पष्टीकरण में परिभाषित किसी लेखाकार की, यथास्थिति, कंपनी, उपक्रम या प्रभाग के शुद्ध मूल्य की संगणना उपदर्शित करते हुए और यह प्रमाणित करते हुए कि यथास्थिति, कंपनी, उपक्रम या प्रभाग का शुद्ध मूल्य इस धारा के उपबंधों के अनुसार सही रूप से प्राप्त किया गया है, रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

10[स्पष्टीकरण 1.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "शुद्ध मूल्य" उपक्रम या प्रभाग की कुल आस्तियों का सकल मूल्य होगा जो लेखाबहियों में अंकित ऐसे उपक्रम या प्रभाग के दायित्वों के मूल्य को कम कर के आए :

परन्तु आस्तियों के पुनर्मूल्यांकन के कारण आस्तियों के मूल्य में किसी प्रकार के परिवर्तन की शुद्ध मूल्य निकालने के प्रयोजनों के लिए उपेक्षा की जाएगी।

स्पष्टीकरण 2.–शुद्ध मूल्य की संगणना करने के लिए कुल आस्तियों का सकल मूल्य,–

() अवक्षयणीय आस्तियों की दशा में, धारा 43 के खंड (6) के उपखंड () की मद (i) की उपमद () में के उपबंधों के अनुसार अवधारित आस्ति-समूह का अवलिखित मूल्य; और

() अन्य आस्तियों की दशा में, ऐसी आस्तियों का बही मूल्य।]]

 

8. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

9. नियम 6ज और फार्म सं. 3गड़क देखिए।

10. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से स्पष्टीकरण के स्थान पर स्पष्टीकरण 1 और स्पष्टीकरण 2 प्रतिस्थापित किए गए। इससे पूर्व स्पष्टीकरण जो कि वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित किया गया था, इस प्रकार था :

'स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "शुद्ध मूल्य" से ऐसा शुद्ध मूल्य अभिप्रेत है जो रुग्ण औद्योगिक कंपनी (विशेष उपबंध) अधिनियम, 1985 (1986 का 1) की धारा 3 की उपधारा (1) के खंड (छक) में परिभाषित है।'

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

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