आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 5

धारा 10 के संशोधन

धारा

धारा संख्या

5

अध्याय शीर्षक

अध्याय III - प्रत्यक्ष कर

अधिनियम

वित्त अधिनियम

वर्ष

2004

धारा 10 के संशोधन

धारा 10 के संशोधन

धारा 10 का संशोधन

5. आय-कर अधिनियम की धारा 10 में,-

() खंड (4) के उपखंड (ii) में, परंतुक के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल, 2006 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-

"परंतु यह और कि इस उपखंड की कोई बात 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् ऐसे व्यष्टि को ब्याज के रूप में संदत्त या उसके अनिवासी (विदेशी) खाते में जमा की गई किसी आय को लागू नहीं होगी ;";

() खंड (6खख) में, "31 मार्च, 1997 के बाद किंतु 1 अप्रैल, 1999 से पूर्व किए गए और इस संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार" अंकों और शब्दों के स्थान पर, "31 मार्च, 1997 के बाद किंतु 1 अप्रैल, 1999 से पूर्व किए गए या 31 मार्च, 2005 के बाद किए गए और इस संबंध में केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित करार" अंक और शब्द 1 अप्रैल, 2006 से रखे जाएंगे;

() खंड (15) में, -

() उपखंड (iiiख) के पश्चात्, निम्नलिखित उपखंड 1 अप्रैल, 2005 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-

"(iiiग) यूरोपीयन इन्वेस्टमेंट बैंक को, 25 नवंबर, 1993 को केंद्रीय सरकार द्वारा उस बैंक के साथ किए गए वित्तीय सहयोग संबंधी आधारभूत करार के अनुसरण में उसके द्वारा दिए गए उधार पर संदेय ब्याज ;";

() उपखंड (iv) में, मद (चक) में, "किसी अनुसूचित बैंक द्वारा," शब्दों के पश्चात्, "1 अप्रैल, 2005 के पूर्व" अंक और शब्द 1 अप्रैल, 2006 से अंतःस्थापित किए जाएंगे ;

() खंड (15क) में, स्पष्टीकरण से पूर्व, निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल, 2006 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-

"परंतु इस खंड की कोई बात 1 अप्रैल, 2005 को या उसके पश्चात् किए गए ऐसे किसी करार को लागू नहीं होगी।";

( ) खंड (18) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड, 1 अप्रैल, 2005 से अंतःस्थापित

किया जाएगा, अर्थात् :-

"(19) संघ के सशस्त्र बलों के (जिसके अंतर्गत अर्द्ध सैनिक बल भी हैं), किसी सदस्य की यथास्थिति विधवा या उसके बच्चों या नामनिर्दिष्ट वारिसों द्वारा प्राप्त कुटुंब पेंशन, जहां ऐसे सदस्य की मृत्यु युद्ध संबंधी कर्तव्यों के दौरान ऐसी परिस्थितियों में और ऐसी दशाओं के अधीन रहते हुए हुई हो, जो विहित की जाएं ;";

() खंड (23चख) में, 1 अक्तूबर, 2004 से,-

(i) स्पष्टीकरण 1 में, खंड (ग) के स्थान पर, निम्नलिखित खंड रखा जाएगा, अर्थात् :-

'() "जोखिम पूंजी उपक्रम" से ऐसा कोई जोखिम पूंजी उपक्रम अभिप्रेत है जिसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (जोखिम पूंजी निधि) विनियम, 1996 में निर्दिष्ट किया गया है और जिसे इस खंड के प्रयोजनों के लिए बोर्ड द्वारा राजपत्र में उस रूप में अधिसूचित किया गया है ;';

(ii) स्पष्टीकरण 2 का लोप किया जाएगा ;

() खंड (23छ) में, स्पष्टीकरण 1 से पूर्व, निम्नलिखित परंतुक, 1 अप्रैल, 2005 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात्ः-

"परंतु किसी अवसंरचना पूंजी कंपनी की धारा 115ण में निर्दिष्ट लाभांशों से भिन्न लाभांशों, ब्याज या दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभों के रूप में किसी आय को, धारा 115ञख के अधीन बही लाभ और संदेय आय-कर की संगणना करने में हिसाब में लिया जाएगा।";

() खंड (36) के पश्चात्, निम्नलिखित 1 अप्रैल, 2005 से अंतःस्थापित किया जाएगा, अर्थात् :-

'(37) किसी निर्धारिती की दशा में, जो कोई व्यष्टि या कोई हिन्दू अविभक्त कुटुंब है, कृषि भूमि के अंतरण से उद्भूत "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य कोई आय, जहां-

(i) ऐसी भूमि धारा 2 के खंड (14) के उपखंड (iii) की मद (क) या मद (ख) में निर्दिष्ट किसी क्षेत्र में स्थित है ;

(ii) ऐसी भूमि, अंतरण की तारीख के ठीक पहले के दो वर्ष की अवधि के दौरान ऐसे हिन्दू अविभक्त कुटुंब या व्यष्टि या उसके माता-पिता में से किसी के द्वारा कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की जा रही थी ;

(iii) ऐसा अंतरण किसी विधि के अधीन अनिवार्य अर्जन के रूप में है या ऐसा कोई अंतरण है जिसके लिए प्रतिफल का अवधारण या अनुमोदन केन्द्रीय सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किया गया है ;

(iv) ऐसी आय ऐसे अंतरण के लिए प्रतिकर या प्रतिफल से उद्भूत हुई है, जो ऐसे निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 2004 को या उसके पश्चात् प्राप्त किया गया है ।

स्पष्टीकरण-इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "प्रतिकर या प्रतिफल" पद के अंतर्गत किसी न्यायालय, अधिकरण या अन्य प्राधिकरण द्वारा बढ़ाया गया या और बढ़ाया गया प्रतिकर या प्रतिफल भी आता है ।

(38) किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो किसी कंपनी में कोई साधारण शेयर या किसी साधारण शेयरोन्मुख निधि की कोई यूनिट है, अंतरण से उद्भूत आय, जहां -

() किसी साधारण शेयर या यूनिट के विक्रय का संव्यवहार उस तारीख को या उसके पश्चात् होता है, जिसको वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 का अध्याय 7 प्रवृत्त होता ; और

() ऐसा संव्यवहार उस अध्याय के अधीन प्रतिभूति संव्यवहार कर से प्रभार्य है ।

स्पष्टीकरण - इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "साधारण शेयरोन्मुख निधि" से ऐसी कोई निधि अभिप्रेत है -

(i) जहां विनिधान (निवेश) योग्य निधियां देशी कंपनियों में साधारण शेयरों के रूप में, ऐसी निधि के कुल आगमों के पचास प्रतिशत से अधिक सीमा तक विनिहित की जाती हैं ; और

(ii) जो खंड (23घ) के अधीन उल्लिखित किसी पारस्परिक निधि की किसी स्कीम के अधीन स्थापित की गई है :

परन्तु निधि की साधारण शेयरधारिता की प्रतिशतता की संगणना आरंभिक और अंतिम अंकों के मासिक औसतों के वार्षिक औसत के प्रति निर्देश करके की जाएगी ;' ;

 

 

[वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004]

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