धारा 9 का संशोधन
धारा 9 का संशोधन।
5. आय-कर अधिनियम की धारा 9 की उपधारा (1) में,—
(क) खंड (i) में,—
(i) स्पष्टीकरण 1 के खंड (क) में, ''ऐसे कारबार की दशा में'' शब्दों के पूर्व, ''महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति के कारण भारत में कारबारी संपर्क रखने वाले कारबार से भिन्न'' शब्द 1 अप्रैल, 2022 से अंत:स्थापित किए जाएंगे;
(ii) स्पष्टीकरण 2क का 1 अप्रैल, 2021 से लोप किया जाएगा और निम्नलिखित स्पष्टीकरण 1 अप्रैल, 2022 से रखा जाएगा, अर्थात: —
'स्पष्टीकरण 2क—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि भारत में अनिवासी की महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति, भारत में ''कारबारी संपर्क'' गठित करेगी और इस प्रयोजन के लिए ''महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति'' से निम्नलिखित अभिप्रेत होगा—
(क) भारत में किसी अनिवासी द्वारा किसी माल, सेवाएं या संपत्ति के संबंध में किसी व्यक्ति के साथ किया गया कोई संव्यवहार जिसके अंतर्गत भारत में डाटा या साफ्टवेयर को डाउनलोड करने की व्यवस्था भी है, यदि, पूर्ववर्ष के दौरान ऐसे संव्यवहार या संव्यवहारों से उत्पन्न कुल संदाय ऐसी रकम से अधिक है, जो विहित की जाए; या
(ख) भारत में कारबार क्रियाकलापों का क्रमबद्ध और निरंतर निवेदन करना या उपभोक्ताओं की ऐसी संख्या के साथ इंटरएक्शन करवाना, जो विहित की जाए:
परंतु, संव्यवहार या क्रियाकलाप भारत में महत्वपूर्ण आर्थिक उपस्थिति गठित करेंगे, चाहे—
(i) ऐसे संव्यवहारों या क्रियाकलापों के लिए करार भारत में किया गया है, अथवा नहीं, या
(ii) अनिवासी के पास भारत में कोई निवास-स्थान या कारबार का स्थान है अथवा नहीं; या
(iii) अनिवासी भारत में सेवाएं प्रदान करता है अथवा नहीं:
परंतु यह और कि केवल ऐसी आय का उतना भाग जितना खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट संव्यवहारों या क्रियाकलापों से हुआ माना जा सकता है, भारत में प्रोदभूत या उदभूत हुआ समझा जाएगा।';
(iii) स्पष्टीकरण 3 के पश्चात्, निम्नलिखित स्पष्टीकरण 1 अप्रैल, 2021 से अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात: —
''स्पष्टीकरण 3क—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि, स्पष्टीकरण 1 में यथानिर्दिष्ट भारत में की गई संक्रियाओं से हुई मानी जा सकने वाली आय में, निम्नलिखित आय सम्मिलित होगी—
(i) ऐसे विज्ञापन से आय, जिसका लक्ष्य ऐसा ग्राहक है, जो भारत में निवास करता है या ऐसा ग्राहक है जिसकी भारत में अवस्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल पते के माध्यम से विज्ञापन तक पहुंच है;
(ii) ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में निवास करता है या ऐसे व्यक्ति से जो भारत में अवस्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल पते का उपयोग करता है, एकत्रित डाटा के विक्रय से आय; और
(iii) ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में निवास करता है या ऐसे व्यक्ति से, जो भारत में अवस्थित इंटरनेट प्रोटोकॉल पते का उपयोग करता है, एकत्रित डाटा का उपयोग करते हुए माल या सेवाओं के विक्रय से आय।'';
(iv) इस प्रकार अंत:स्थापित स्पष्टीकरण 3क के पश्चात्, निम्नलिखित परंतुक 1 अप्रैल, 2022 से अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात:—
''परंतु इस स्पष्टीकरण में अंतर्विष्ट उपबंध स्पष्टीकरण 2क में निर्दिष्ट संव्यवहारों या क्रियाकलापों से हुई मानी जा सकने वाली आय को भी लागू होंगे।'';
(v) स्पष्टीकरण 5 में,—
(I) दूसरे परंतुक में, ''विनियम, 2014 के'' शब्दों और अंकों के पश्चात् ''निरसन से पूर्व इसके'' शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे;
(II) दूसरे परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित परंतुक अंत:स्थापित किया जाएगा, अर्थात: —
''परंतु यह भी कि इस स्पष्टीकरण में अंतर्विष्ट कोई बात किसी ऐसी आस्ति या पूंजी आस्ति को लागू नहीं होगी जो किसी अनिवासी द्वारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 (1992 का 15) के अधीन बनाए गए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता) विनियम, 2019 के अधीन प्रवर्ग 1 के अधीन विदेशी पोर्टफोलियो विनिधानकर्ता में प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: विनिधान के रूप में धारित की गई है।'';
(ख) खंड (vi) के स्पष्टीकरण 2 के खंड (v) में ''किन्तु जिसके अंतर्गत सिनेमा फिल्मों के विक्रय, वितरण या प्रदर्शन के लिए प्रतिफल नहीं है'' शब्दों का 1 अप्रैल, 2021 से लोप किया जाएगा।

