अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत
अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत
49. (1) जहां पूंजी आस्ति निम्नलिखित रीति से निर्धारिती की सम्पत्ति हो गई है–
(i) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के पूर्ण या आंशिक विभाजन पर आस्तियों के किसी वितरण पर;
(ii) किसी दान या विल के अधीन;
(iii) (क) उत्तराधिकार, विरासत या न्यागमन द्वारा, या
(ख) किसी फर्म, व्यष्टि-निकाय या व्यक्ति-संगम के विघटन पर अन्य आस्तियों के किसी वितरण पर जहां ऐसा विघटन 1 अप्रैल, 1987 से पहले किसी समय हुआ है, या
(ग) किसी कंपनी के समापन पर आस्तियों के किसी वितरण पर, या
(घ) किसी प्रतिसंहरणीय या अप्रतिसंहरणीय न्यास को अन्तरण के अधीन, या
(ड़) किसी ऐसे अंतरण के अधीन जैसा धारा 47 के खण्ड (iv) या खण्ड (v) या खंड (vi) या खंड (viक) या खंड (viकक) या खंड (viकख) या (viख) 62[या खंड (viग)] या खंड (viगक) या खंड (viगख) 61क[या (viगग) या खंड (viiकग) या खंड (viiकघ) या खंड (viiकड़) या खंड (viiकच) या] खंड (xiii) या खंड (xiiiख) या खंड (xiv) में निर्दिष्ट है;
(iv) यदि ऐसा निर्धारिती हिंदू अविभक्त कुटुम्ब है, तो 31 दिसम्बर, 1969 के पश्चात् किसी भी समय धारा 64 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट ढंग से,
वहां उस आस्ति के अर्जन की लागत, जिस पर कि संपत्ति के पूर्वतन स्वामी ने उसे अर्जित किया, वह समझी जाएगी जो यथास्थिति पूर्वतन स्वामी या निर्धारिती द्वारा आस्तियों की बाबत उपगत या किए गए किसी सुधार की लागत को जोड़ कर आए।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा में निर्धारिती के स्वामित्वाधीन किसी पूंजी आस्ति के संबंध में ''संपत्ति के पूर्वतन स्वामी'' पद से पूंजी आस्ति का वह अंतिम पूर्वतन स्वामी अभिप्रेत है जिसने उसका अर्जन इस उपधारा के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) या खंड (iv) में निर्दिष्ट अर्जन के ढंग से भिन्न ढंग से किया हो।
(2) जहां पूंजी आस्ति जो किसी ऐसी समामेलित कंपनी का, जो कि भारतीय कंपनी है, शेयर है, या धारा 47 के खंड (vii) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गई हो, वहां उस आस्ति के अर्जन की लागत, समामेलन कंपनी में शेयर या शेयरों के अर्जन की उसकी लागत समझी जाएगी।
(2क) जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी का शेयर या डिबेंचर है, धारा 47 के खंड (x) या खंड (xक) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गई है, वहां निर्धारिती को आस्ति के अर्जन की लागत ऐसे डिबेंचर, डिबेंचर-स्टाक, बंधपत्र या निक्षेप प्रमाणपत्र की, जिसकी बाबत ऐसी आस्ति निर्धारिती द्वारा अर्जित की गई है, लागत का भाग समझी जाएगी।
(2कक) जहां पूंजी अभिलाभ धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (vi) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट प्रतिभूति या श्रमसाध्य साधारण शेयरों के अंतरण से उद्भूत होता है, वहां ऐसी प्रतिभूति या शेयरों के अर्जन की लागत वह उचित बाजार मूल्य होगी जिसे उक्त उपखंड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है।
(2ककक) जहां ऐसी पूंजी आस्ति जो सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) की धारा 42 में निर्दिष्ट संपरिवर्तन पर निर्धारिती की संपत्ति बन गई है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को उसके संपरिवर्तन से ठीक पूर्व कंपनी में शेयर या शेयरों के उसे अर्जित होने की लागत समझा जाएगा।
(2कख) जहां पूंजी अभिलाभ विनिर्दिष्ट प्रतिभूति या स्वेट साधारण शेयरों के अंतरण से उदभूत होता है वहां ऐसी प्रतिभूति या शेयरों के अर्जन की लागत वह उचित बाजार मूल्य होगी जिसको धारा 115बग की उपधारा (1) के खंड (खक) के अधीन अनुषंगी फायदों के मूल्य की संगणना करते समय ध्यान में रखा गया है।
(2कखख) जहां पूंजी आस्ति का, जो किसी कंपनी का शेयर है या के शेयर हैं, किसी अनिवासी निर्धारिती द्वारा धारित धारा 115कग की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट सार्वत्रिक निक्षेपागार रसीदों के मोचन पर, ऐसे निर्धारिती द्वारा अर्जन किया जाता है, वहां शेयर या शेयरों के अर्जन की लागत उस शेयर या उन शेयरों की वह कीमत होगी जो किसी मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में उस तारीख को, जिसको ऐसे मोचन का अनुरोध किया गया था, प्रचलित है।
स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ''मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज'' का वही अर्थ होगा जो धारा 43 की उपधारा (5) के स्पष्टीकरण 1 के खंड (ii) में उसका है।
(2कग) जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कारबार न्यास की इकाई है, धारा 47 के खंड (xvii) में यथा निर्दिष्ट किसी अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गई है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत, उक्त खंड में निर्दिष्ट शेयर के अर्जन की उसकी लागत समझी जाएगी।
(2कघ) जहां पूंजी आस्ति, जो पारस्परिक निधि की समेकित स्कीम की यूनिट या यूनिटें हैं, धारा 47 के खंड (xviii) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गई है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को, पारस्परिक निधि की समेकित स्कीम की यूनिट या यूनिटों के उसे अर्जित होने की लागत समझा जाएगा।
63[(2कड़) जहां कोई पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी का साधारण शेयर है, धारा 47 के खंड (xख) में निर्दिष्ट किसी अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गई है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को ऐसे अधिमानी शेयर की लागत का ऐसा भाग समझा जाएगा, जिसके संबंध में निर्धारिती द्वारा ऐसी आस्ति अर्जित की गई है।]
64[(2कच) जहां कोई पूंजी आस्ति, किसी जो पारस्परिक निधि स्कीम की समेकित योजना में की कोई यूनिट या यूनिटें हैं, धारा 47 के खंड (xix) में निर्दिष्ट किसी अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गई है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को पारस्परिक निधि स्कीम की समेकित योजना में यूनिट या यूनिटों के उसे अर्जित होने की लागत समझा जाएगा;]
64क[(2कछ) किसी पृथककृत पोर्टफोलियो में किसी यूनिट या यूनिटों के अर्जन की लागत वह रकम होगी, जो निर्धारिती द्वारा उसके सकल पोर्टफोलियो में धारित किसी यूनिट या यूनिटों के अर्जन की लागत के समान अनुपात में है, जैसा कि पोर्टफोलियो के पृथककरण से ठीक पूर्व पृथककृत पोर्टफोलियो को अंतरित आस्ति के शुद्ध आस्ति मूल्य का वही अनुपात है जो सकल पोर्टफोलियो के शुद्ध आस्ति मूल्य का है।
(2कज) मुख्य पोर्टफोलियो में यूनिट धारक द्वारा धारित मूल यूनिटों के अर्जन की लागत के बारे में यह समझा जाएगा कि उसमें से उपधारा (2कछ) के अधीन इस प्रकार प्राप्त रकम को घटा दिया गया है।
स्पष्टीकरण- उपधारा (2कछ) और उपधारा (2कज) के प्रयोजनों के लिए "मुख्य पोर्टफोलियो", “पृथक्कृत पोर्टफोलिया“ और "सकल पोर्टफोलिया" पदों का क्रमश: वही अर्थ होगा, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड द्वारा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 की धारा 11 के अधीन जारी परिपत्र संख्या एसईबीआई/एचओ/आईमडी/डीएफ2/सीआईआर/पी/2018/160, तारीख 28 दिसंबर, 2018 में उनका हैं।]
64कक[(2कझ) जहां पूंजी आस्ति, जो धारा 47 के खंड (xx) में यथानिर्दिष्ट शेयर है, निर्धारिती की संपत्ति हो जाती है, ऐसी आस्ति के अर्जन की लागत उक्त खंड में निर्दिष्ट संयुक्त उपक्रम में हित के अर्जन की लागत समझी जाएगी ।]
(2ख) [* * *]
(2ग) पारिणामी कंपनी में शेयरों के अर्जन की लागत वह रकम होगी, जिसका अविलयित कंपनी में निर्धारिती द्वारा धारित शेयरों के अर्जन की लागत से उसी अनुपात में संबंध है, जो अविलयित कंपनी में अंतरित आस्तियों का शुद्ध बही मूल्य का ऐसे अविलयन से ठीक पहले शुद्ध मूल्य से होता।
(2घ) किसी अविलयित कंपनी में शेयरधारक द्वारा धारित मूल शेयरों के अर्जन की लागत, उपधारा (2ग) के अधीन इस प्रकार प्राप्त रकम में से घटाई गई समझी जाएगी।
(2ड़) उपधारा (2), उपधारा (2ग) और उपधारा (2घ) के उपबंध, यथासाध्य, धारा 44घख में यथानिर्दिष्ट सहकारी बैंक के कारबार के पुनर्गठन के संबंध में भी लागू होते हैं।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए 'शुद्ध मूल्य' से अविलयन से ठीक पूर्व अविलयित कंपनी की लेखा-बहियों में दी गई संदत्त साधारण शेयर पूंजी और साधारण आरक्षितियों का योग अभिप्रेत है।
(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां धारा 47 के, यथास्थिति, खंड (iv) या खंड (v) में निर्दिष्ट किसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ को धारा 47क के उपबंधों के आधार पर ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझा जाता है, वहां ऐसी आस्ति के अर्जन की अंतरिती कंपनी की लागत ऐसी लागत होगी जिसके लिए ऐसी आस्ति उसके द्वारा अर्जित की गई थी।
(4) जहां पूंजी अभिलाभ किसी संपत्ति के अंतरण से उद्भूत होता है, जिसका मूल्य धारा 56 की उपधारा (2) के खंड (vii) या खंड (viiक) 65[या खंड (x)] के अधीन आय-कर के अध्यधीन रहा है, वहां ऐसी संपत्ति के अर्जन की लागत वह मूल्य समझी जाएगी जो उक्त खंड (vii) या खंड (viiक) 65[या खंड (x)] के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है।
(5) जहां पूंजी अभिलाभ आय, घोषणा स्कीम, 2016 के अधीन घोषित किसी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है और स्कीम के उपबंधों के अनुसार स्कीम के आरंभ होने की तारीख पर आस्ति के उचित बाजार मूल्य पर कर, अधिभार और शास्ति का संदाय कर दिया गया है, वहां आस्ति के अर्जन की लागत को आस्ति का उचित बाजार मूल्य समझा जाएगा, जो उक्त स्कीम के प्रयोजन के लिए हिसाब में लिया गया है।
66[(6) जहां पूंजी अभिलाभ किसी ऐसी आस्ति के, जो धारा 10 के खंड (37क) के स्पष्टीकरण के उपखंड (ग) में निर्दिष्ट है, जिसका उस वित्तीय वर्ष की समाप्ति से दो वर्ष की समाप्ति के पश्चात् अंतरण किया गया है, जिसमें ऐसी आस्ति का कब्जा निर्धारिती को सौंपा गया था, अंतरण से उद्भूत होता है, वहां ऐसी विनिर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अर्जन की लागत को उस वित्तीय वर्ष, जिसमें उक्त विनिर्दिष्ट पूंजी आस्ति का कब्जा निर्धारिती को सौंपा गया था, की समाप्ति के पश्चात् दूसरे वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन को उसका स्टांप शुल्क मूल्य समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण–इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, "स्टांप शुल्क मूल्य" से किसी स्थावर संपत्ति की बाबत स्टांप शुल्क के संदाय के प्रयोजन के लिए सरकार के किसी प्राधिकारी द्वारा अंगीकृत या निर्धारित या निर्धारणीय मूल्य अभिप्रेत है।
(7) जहां पूंजी अभिलाभ, ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है, जो धारा 45 की उपधारा (5क) में यथा निर्दिष्ट भूमि या भवन या दोनों के रूप में ऐसी परियोजना में के शेयर हैं, जो उक्त उपधारा के परंतुक में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति नहीं है, वहां ऐसी आस्ति के अर्जन की लागत वह रकम होगी, जिसे उस उपधारा में प्रतिफल का पूरा मूल्य समझा गया है।]
67[(8) जहां पूंजी अभिलाभ किसी ऐसी आस्ति के, जो किसी न्यास या किसी संस्था, जिसके संबंध में अनुवर्धित आय संगणित की गई हो और उस पर अध्याय 12ड़ख के उपबंधों के अनुसार कर का संदाय कर दिया गया हो, द्वारा धारित आस्ति हो, वहां ऐसी आस्ति के अर्जन की लागत उस आस्ति का उचित बाजार मूल्य समझा जाएगा, जिसे धारा 115नघ की उपधारा (2) के प्रतिनिर्देश से विनिर्दिष्ट तारीख को अनुवर्धित आय की संगणना के लिए हिसाब में लिया गया है।]
67क[(9) जहां धारा 28 के खंड (viक) में निर्दिष्ट पूंजी अभिलाभ, किसी ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत होता है, वहां ऐसी आस्ति के अर्जन की लागत को ऐसा उचित बाजार मूल्य समझा जाएगा, जिसे उक्त खंड के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है।]
वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा 1.4.2024 से धारा 49 की उपधारा (9) के पश्चात् उपधारा (10) अंत:स्थापित कि जाएगी।
(10) जहां पूंजी आस्ति, जो,—
(i) धारा 47 के खंड (viiघ) में निर्दिष्ट किसी वाल्ट प्रबंधक द्वारा जारी कोई इलैक्ट्रानिक स्वर्ण प्राप्ति है, वहां उक्त अंतरण के प्रयोजन के लिए आस्ति के अर्जन की लागत को, उस व्यक्ति के पास, जिसके नाम पर इलैक्ट्रानिक स्वर्ण प्राप्ति जारी की गई है, ऐसे स्वर्ण की लागत के रूप में माना जाएगा ;
(ii) इलैक्ट्रानिक स्वर्ण प्राप्ति के लिए जारी स्वर्ण है और धारा 47 के खंड (viiघ) में निर्दिष्ट अंतरण के लिए प्रतिफल के रूप में उस व्यक्ति की संपत्ति हो जाती है, वहां उक्त अंतरण के प्रयोजन के लिए आस्ति के अर्जन की लागत को, उस व्यक्ति के पास, जिसके नाम पर इलैक्ट्रानिक स्वर्ण प्राप्ति जारी की गई है, ऐसे स्वर्ण की लागत के रूप में माना जाएगा ।
[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप मेंें]

