अधिग्रहण के कुछ मोड के संदर्भ के साथ लागत
अर्जन के कुछ ढंगों के संबंध में लागत
8649. 87[(1)] जहां पूंजी आस्ति निम्नलिखित रीति से निर्धारिती की सम्पत्ति हो गर्इ है–
(i) हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब के पूर्ण या आंशिक विभाजन पर आस्तियों के किसी वितरण पर;
(ii) किसी दान या विल के अधीन;
(iii) (क) उत्तराधिकार, विरासत या न्यागमन88 द्वारा, या
89[(ख) किसी फर्म, व्यष्टि-निकाय या व्यक्ति-संगम के विघटन पर अन्य आस्तियों के किसी वितरण पर जहां ऐसा विघटन 1 अप्रैल, 1987 से पहले किसी समय हुआ है, या]
(ग) किसी कंपनी के समापन पर आस्तियों के किसी वितरण पर, या
(घ) किसी प्रतिसंहरणीय या अप्रतिसंहरणीय न्यास को अन्तरण के अधीन, या
(ड़) किसी ऐसे अंतरण के अधीन जैसा धारा 47 के खण्ड (iv) 90[या खण्ड (v)] 91[या खंड (vi)] 92[या खंड (viक)] 92क[या खंड (viकक)] में निर्दिष्ट है;
93[(iv) यदि ऐसा निर्धारिती हिंदू अविभक्त कुटुम्ब है, तो 31 दिसम्बर, 1969 के पश्चात् किसी भी समय धारा 64 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट ढंग से,]
वहां उस आस्ति के अर्जन की लागत, जिस पर कि संपत्ति के पूर्वतन स्वामी ने उसे अर्जित किया, वह समझी जाएगी जो यथास्थिति पूर्वतन स्वामी या निर्धारिती द्वारा आस्तियों की बाबत उपगत या किए गए किसी सुधार की लागत को जोड़ कर आए।
94[स्पष्टीकरण.–इस 95[उपधारा] में निर्धारिती के स्वामित्वाधीन किसी पूंजी आस्ति के संबंध में ''संपत्ति के पूर्वतन स्वामी'' पद से पूंजी आस्ति का वह अंतिम पूर्वतन स्वामी अभिप्रेत है जिसने उसका अर्जन इस 96[उपधारा] के खंड (i) या खंड (ii) या खंड (iii) 97[या खंड (iv)] में निर्दिष्ट अर्जन के ढंग से भिन्न ढंग से किया हो।]
98[(2) जहां पूंजी आस्ति जो किसी ऐसी समामेलित कंपनी का, जो कि भारतीय कंपनी है, शेयर है, या धारा 47 के खंड (vii) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ हो, वहां उस आस्ति के अर्जन की लागत, समामेलन कंपनी में शेयर या शेयरों के अर्जन की उसकी लागत समझी जाएगी।]
99[(2क) जहां पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी का शेयर या डिबेंचर है, धारा 47 के खंड (x) में निर्दिष्ट अंतरण के प्रतिफलस्वरूप निर्धारिती की संपत्ति हो गर्इ है, वहां निर्धारिती को आस्ति के अर्जन की लागत ऐसे डिबेंचर, डिबेंचर स्टाक या निक्षेप प्रमाणपत्र की, जिसकी बाबत ऐसी आस्ति निर्धारिती द्वारा अर्जित की गर्इ है, लागत का भाग समझी जाएगी।]
1[(2कक) जहां पूंजी अभिलाभ शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के अंतरण से उद्भूत होता है जिसका मूल्य धारा 17 के खंड (2) के अधीन परिलब्धि के मूल्य की संगणना करते समय हिसाब में लिया गया है वहां ऐसे शेयरों, डिबेंचरों या वारन्टों के अर्जन की लागत उस खंड के अधीन मूल्य होगी।]
(2ग) पारिणामी कंपनी में शेयरों के अर्जन की लागत वह रकम होगी, जिसका अविलयित कंपनी में निर्धारिती द्वारा धारित शेयरों के अर्जन की लागत से उसी अनुपात में संबंध है, जो अविलयित कंपनी में अंतरित आस्तियों का शुद्ध बही मूल्य का ऐसे अविलयन से ठीक पहले शुद्ध मूल्य से होता।
(2घ) किसी अविलयित कंपनी में शेयरधारक द्वारा धारित मूल शेयरों के अर्जन की लागत, उपधारा (2ग) के अधीन इस प्रकार प्राप्त रकम में से घटार्इ गर्इ समझी जाएगी।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए 'शुद्ध मूल्य' से अविलयन से ठीक पूर्व अविलयित कंपनी की लेखा-बहियों में दी गर्इ संदत्त साधारण शेयर पूंजी और साधारण आरक्षितियों का योग अभिप्रेत है।]
4[(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी जहां धारा 47 के, यथास्थिति, खंड (iv) या खंड (v) में निर्दिष्ट किसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ को धारा 47क के उपबंधों के आधार पर ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय समझा जाता है, वहां ऐसी आस्ति के अर्जन की अंतरिती कंपनी की लागत ऐसी लागत होगी जिसके लिए ऐसी आस्ति उसके द्वारा अर्जित की गर्इ थी।]
86. सुसंगत केस लॉज़ के लिए, देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
87. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।
88. ''न्यागमन'' पद के अर्थ के लिए, देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
89. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से प्रतिस्थापित।
90. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।
91. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।
92. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से अंत:स्थापित।
92क. वित्त अधिनियम, 2005 द्वारा 1.4.2005 से अंत:स्थापित।
93. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।
94. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।
95. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से ''धारा'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
96. यथोक्त द्वारा ''धारा'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।
97. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अंत:स्थापित।
98. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।
99. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
1. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2001 से अंत:स्थापित।
2. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से उपधारा (2ख), (2ग) और (2घ) अंत:स्थापित।
3. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2001 से लोप किया गया। लोप से पूर्व, उपधारा (2ख) जो कि वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित की गर्इ थी, इस प्रकार से थी :
''(2ख) जहां पूंजी अभिलाभ धारा 17 के खंड (2) के उपखंड (iiiक) में निर्दिष्ट खास प्रतिभूति के अंतरण से होता है, वहां ऐसी विनिर्दिष्ट प्रतिभूति के अर्जन की लागत विकल्प के प्रयोग की तारीख को उचित बाजार मूल्य होगी।''
4. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2006 द्वारा संशोधित रूप में]

