आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 48

संगणना करने का ढंग

धारा

धारा संख्या

48

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

संगणना करने का ढंग

संगणना करने का ढंग

संगणना करने का ढंग

48. ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना, पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत प्रतिफल के पूरे मूल्य में से निम्नलिखित रकमों की कटौती करके की जाएगी, अर्थात् :–

(i) ऐसे अंतरण के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: उपगत व्यय;

(ii) आस्ति के अर्जन की लागत और उसमें किसी सुधार की लागत :

58कक[(iii) धारा 45 की उपधारा (4) में निर्दिष्ट विनिर्दिष्ट अस्तित्व से, विनिर्दिष्ट व्यक्ति द्वारा प्राप्त किसी धन या पूंजी आस्ति के मूल्य की दशा में, उस उपधारा के अधीन ऐसे विनिर्दिष्ट अस्तित्व की आय के रूप में आय-कर से प्रभार्य आय, जिसकी संगणना विनिर्दिष्ट अस्तित्व द्वारा पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणमस्वरूप की गई मानी जा सकती है:]

परन्तु ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो अनिवासी भारतीय है, किसी भारतीय कंपनी में शेयरों या उसके डिबेंचरों के रूप में किसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत पूंजी अभिलाभ की संगणना, अर्जन की लागत, ऐसे अंतरण के संबंध में पूर्णत: और अनन्यत: उपगत व्यय और शेयरों या डिबेंचरों के क्रय में आरंभिक रूप से उपयोग की गई उसी विदेशी करेंसी में पूंजी आस्ति के अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या उद्भूत प्रतिफल के पूरे मूल्य को संपरिवर्तित करके की जाएगी और ऐसी विदेशी करेंसी में इस प्रकार संगणित पूंजी अभिलाभ को भारतीय करेंसी में पुन: संपरिवर्तित किया जाएगा, तथापि इस प्रकार की पूंजी अभिलाभ की संगणना की पूर्वोक्त रीति तत्पश्चात् किसी भारतीय कंपनी में शेयरों में प्रत्येक पुन: विनिधान या डिबेंचरों के विक्रय से प्रोद्भूत या उद्भूत पूंजी अभिलाभ की बाबत लागू होगी :

परन्तु यह और कि जहां दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ किसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति के, जो किसी अनिवासी को पहले परंतुक में निर्दिष्ट किसी भारतीय कंपनी में शेयरों या उसके डिबेंचरों के अंतरण में उद्भूत पूंजी अभिलाभ से भिन्न है, अंतरण से उद्भूत होता है, वहां खंड (ii) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो ''अर्जन की लागत'' और ''किसी सुधार की लागत'' शब्दों के स्थान पर क्रमश: ''अर्जन की सूचकांकित लागत'' और ''किसी सुधार की सूचकांकित लागत'' शब्द रखे गए हों :

59क[परंतु यह भी कि पहले और दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट कोई बात, किसी ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति, जो किसी कंपनी का साधारण शेयर है या किसी साधारण शेयरोन्मुखी निधि की कोई यूनिट है या धारा 112क में निर्दिष्ट किसी कारबार न्यास की कोई यूनिट है, के अंतरण से उद्भूत होने वाले पूंजी अभिलाभों को लागू नहीं होगी:]

परंतु यह भी कि दूसरे परंतुक में अंतर्विष्ट कोई बात ऐसी दीर्घकालिक पूंजी आस्ति, जो–

() सरकार द्वारा जारी किए गए पूंजी सूचांकित बंधपत्रों से भिन्न कोई बंधपत्र या डिबेंचर है; या

() प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र स्कीम, 2015 के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी प्रभुत्वसंपन्न स्वर्ण बंधपत्र से भिन्न कोई बंधपत्र या डिबेंचर है,

के अंतरण से उद्भूत दीर्घकालिक पूंजी अभिलाभ को लागू नहीं होगी :

परंतु यह भी कि किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जो अनिवासी है, उसके द्वारा 60[धारित] किसी भारतीय कंपनी के रुपए के अंकित बंधपत्र के मोचन के समय किसी विदेशी करेंसी के विरुद्ध रुपए के अधिमूल्यन के परिणामस्वरूप उद्भूत किसी अभिलाभ को इस धारा के अधीन प्रतिपल के पूर्ण मूल्य की संगणना के प्रयोजनों के लिए छोड़ दिया जाएगा :

परन्तुयह भी कि जहां धारा 47 के खंड (iii) के परन्तुक में निर्दिष्ट शेयर, डिबेंचर या वारन्ट दान या अप्रतिसंहरणीय न्यास के अधीन अंतरित किए जाते हैं, वहां ऐसे अंतरण की तारीख को बाजार मूल्य इस धारा के प्रयोजनों के लिए अंतरण के परिणामस्वरूप प्राप्त या प्रोद्भूत होने वाले प्रतिफल का पूरा मूल्य समझा जाएगा :

परन्तु यह भी कि वित्त (संख्यांक 2) अधिनियम, 2004 के अध्याय 7 के अधीन "पूंजी अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में प्रतिभूति संव्यवहार कर के मद्दे संदत्त किसी राशि की बाबत कोई कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) ''विदेशी करेंसी'' और ''भारतीय करेंसी'' के वही अर्थ हैं जो क्रमश: विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2 में उनका है;

(ii) भारतीय करेंसी का विदेशी करेंसी में संपरिवर्तन और विदेशी करेंसी का भारतीय करेंसी में संपरिवर्तन इस निमित्त विहित विनिमय की दर पर किया जाएगा;

(iii) ''अर्जन की सूचकांकित लागत'' से अभिप्रेत है वह रकम जिसका उसी अनुपात में अर्जन की लागत से संबंध है जिस प्रकार के उस वर्ष का मुद्रास्फीति सूचकांक जिसमें अंतरित की गई आस्ति का संबंध उस प्रथम वर्ष के जिसमें निर्धारिती ने आस्ति धारित की थी या 1 अप्रैल, 61[2001] को प्रारंभ होने वाले वर्ष के लिए, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, लागत मुद्रास्फीति सूचकांक से है;

(iv) ''किसी सुधार की सूचकांकित लागत'' से ऐसी रकम अभिप्रेत है जिसका उसी अनुपात में जो उस वर्ष के लिए, जिसमें आस्ति का अंतरण किया जाता है का उस वर्ष के लागत मुद्रास्फीति सूचकांक से संबंधित जिसमें आस्ति में सुधार हुआ है;

(v) किसी वर्ष के लिए ''लागत मुद्रास्फीति सूचकांक'' से ऐसा सूचकांक अभिप्रेत है जो केंद्रीय सरकार, ऐसे पूर्ववर्ष से ठीक पूर्वगामी वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (नगरीय) में पचहत्तर प्रतिशत की औसत वृद्धि को ध्यान में रखते हुए राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करे।

 

58कक. वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा 1.4.2021 से अतंस्थापित।

59क. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2018* से अतंस्थापित।

* 1-4-2019 होना चाहिए।

60. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से ''अभिदत्त'' के स्थान पर प्रतिस्थापित।

61. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से ''1981'' अंकों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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