आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 47क

कुछ दशाओं में छूट का वापिस लिया जाना

धारा

धारा संख्या

47क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2024 (सं.1)

कुछ दशाओं में छूट का वापिस लिया जाना

कुछ दशाओं में छूट का वापिस लिया जाना

कुछ दशाओं में छूट का वापिस लिया जाना

47क. (1) जहां धारा 47 के, यथास्थिति, खंड (iv) या खंड (v) निर्दिष्ट किसी पूंजी आस्ति के अंतरण की तारीख से आठ वर्ष की अवधि की समाप्ति से पहले किसी भी समय–

(i) ऐसी पूंजी आस्ति अंतरित कंपनी द्वारा उसके कारबार के व्यापार स्टाक में संपरिवर्तित की जाती है या उसके द्वारा उस रूप में मानी जाती है; या

(ii) यथास्थिति मूल कंपनी या उसके नामनिर्देशिती अथवा नियंत्री कंपनी, समुनषंगी कंपनी की संपूर्ण शेयर पूंजी धारण करना छोड़ देती है,

वहां ऐसी पूंजी आस्ति के अंतरण से उद्भूत ऐसे लाभ या अभिलाभ की रकम जो धारा 47 के, यथास्थिति, खंड (iv) या खंड (v) के उपबंधों के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है, उक्त खंडों में किसी बात के होते हुए भी, ऐसे पूर्ववर्ष के जिसमें ऐसा अंतरण किया गया था ''पूंजी अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन प्रभार्य समझी जाएगी।

(2) जहां धारा 47 के खंड (xi) में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति के अंतरण की तारीख से तीन वर्ष की अवधि बीतने से पूर्व किसी समय मान्यताप्राप्त स्टाक एक्सचेंज में सदस्यता के बदले अंतरक को आबंटित कोर्इ शेयर अंतरित किए जाते हैं, वहां लाभ और अभिलाभों की राशि जो, धारा 47 के खंड (xi) में दिए गए उपबंधों के कारण धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं हैं, उक्त खंड में किसी बात के होते हुए भी, उस पूर्ववर्ष में जिसमें ऐसे शेयर अंतरित किए जाएं, पूंजी अभिलाभ शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय हैं।

(3) जहां धारा 47 के खंड (xiii) के परन्तुक या खंड (iv) के परन्तुक में अधिकथित किन्हीं शर्तों का पालन नहीं होता है वहां धारा 47 के खंड (xiii) के परन्तुक या खंड (xiv) के परन्तुक में दी गर्इ शर्तों के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित न की गर्इ ऐसी पूंजी आस्ति या अमूर्त आस्ति के अंतरण से उद्भूत लाभ और अभिलाभ की राशि उस पूर्ववर्ष में जिसमें, यथास्थिति, खंड (xiii) के परन्तुक खंड (xiv) या परन्तुक की अपेक्षाओं का पालन नहीं होता है, उत्तरवर्ती कंपनी द्वारा कराधेय लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे।

(4) जहां धारा 47 के खंड (xiiiख) के परंतुक में अधिकथित किन्हीं शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, वहां ऐसी पूंजी आस्ति या अमूर्त आस्ति शेयर या शेयरों के अंतरण से उद्भूत लाभ या अभिलाभ की रकम को, जो उक्त परंतुक में अधिकथित शर्तों के आधार पर धारा 45 के अधीन प्रभारित नहीं की गर्इ है, उस पूर्ववर्ष के संबंध में, जिसमें उक्त परंतुक की अपेक्षाओं का पालन नहीं किया गया है, उत्तरवर्ती सीमित दायित्व वाली भागीदारी या पूर्ववर्ती कंपनी के शेयरधारक के कर से प्रभार्य लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2024 द्वारा संशोधित रूप में]

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