कंपनी द्वारा अपने स्वयं के शेयरों या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के क्रय पर पूंजी अभिलाभ
67[कंपनी द्वारा अपने स्वयं के शेयरों या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के क्रय पर पूंजी अभिलाभ
46क. जहां कोर्इ शेयरधारक या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों का कोर्इ धारक ऐसे शेयरधारक या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के धारक द्वारा धारित अपने शेयरों या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के क्रय के लिए किसी कंपनी से कोर्इ प्रतिफल प्राप्त करता है वहां धारा 48 के उपबंधों के अधीन रहते हुए अर्जन की लागत और यथास्थिति, शेयरधारक या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के धारक द्वारा प्राप्त किए गए प्रतिफल के मूल्य के अंतर को उस वर्ष में, जिसमें ऐसे शेयर या अन्य विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियां कंपनी द्वारा क्रय की गर्इ थीं, यथास्थिति, ऐसे शेयरधारक या विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों के धारक को हुआ पूंजी अभिलाभ समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "विनिर्दिष्ट प्रतिभूतियों" का वही अर्थ होगा जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 77क68 के स्पष्टीकरण में उसका है।]
67. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।
68. कम्पनी अधिनियम की धारा 77क के लिए देखिए परिशिष्ट एक।
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

