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धारा 454

दंड के अधिनिर्णय

धारा

धारा संख्या

454

अध्याय शीर्षक

अध्याय XXIX - विविध

अधिनियम

कंपनी अधिनियम, 2013

वर्ष

दंड के अधिनिर्णय

दंडों का निर्णय

दंडों का निर्णय।

454.(1) केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा, केन्द्रीय सरकार के उतने अधिकारियों को, जो पंजीयक की पंक्ति से नीचे के न हों , इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन शास्ति न्यायनिर्णयन के लिए, विहित रीति से न्यायनिर्णयन अधिकारी नियुक्त कर सकती है।

(2) केन्द्रीय सरकार न्यायनिर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति करते समय उपधारा (1) के अधीन आदेश में उनके अधिकार क्षेत्र को विनिर्दिष्ट करेगी।

[ (3) न्यायनिर्णायक अधिकारी आदेश द्वारा-

()   कंपनी, चूककर्ता अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति पर, जैसा भी मामला हो, इस अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत किसी गैर-अनुपालन या चूक का उल्लेख करते हुए जुर्माना लगा सकते हैं; और
()   ऐसी कंपनी या अधिकारी को, जो चूककर्ता है, या किसी अन्य व्यक्ति को, जैसा भी मामला हो, चूक को सुधारने के लिए निर्देश दे सकेगा, जहां भी वह ठीक समझे: ]

[बशर्ते कि यदि चूक धारा 92 की उप-धारा (4) या धारा 137 की उप-धारा (1) या उपधारा (2) के अननुपालन से संबंधित है और ऐसी चूक को न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा नोटिस जारी करने के तीस दिन के भीतर या उससे पूर्व सुधार दिया गया है, तो इस संबंध में कोई शास्ति नहीं लगाई जाएगी और ऐसी चूक के संबंध में इस धारा के अधीन सभी कार्यवाहियां समाप्त समझी जाएंगी। ]

(4) न्यायनिर्णायक अधिकारी कोई भी जुर्माना लगाने से पहले [ ऐसी कंपनी, चूककर्ता अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति ] को सुनवाई का उचित अवसर देगा।

(5) उप-धारा (3) के अधीन न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश से व्यथित कोई भी व्यक्ति उस मामले में क्षेत्राधिकार रखने वाले क्षेत्रीय निदेशक के समक्ष अपील कर सकता है।

(6) उप-धारा (5) के अधीन प्रत्येक अपील उस तारीख से साठ दिन के भीतर दायर की जाएगी, जिसको न्यायनिर्णायक अधिकारी द्वारा किए गए आदेश की प्रति व्यथित व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जाती है और वह ऐसे प्ररूप, तरीके में होगी तथा उसके साथ ऐसी फीस संलग्न होगी, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।

(7) क्षेत्रीय निदेशक अपील के पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात ऐसा आदेश पारित कर सकता है, जिसे वह उचित समझे, जिसमें अपील किए गए आदेश की पुष्टि, संशोधन या उसे निरस्त किया जा सकता है।

(8) ( i ) जहां कंपनी [ उप-धारा (3) या उप-धारा (7) के तहत किए गए आदेश का अनुपालन करने में विफल रहती है, जैसा भी मामला हो, ] आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से नब्बे दिनों की अवधि के भीतर, कंपनी को जुर्माना के साथ दंडित किया जाएगा जो पच्चीस हजार रुपये से कम नहीं होगा, लेकिन जो पांच लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।

( ii ) [ जहां किसी कंपनी का कोई अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति ] जो आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से नब्बे दिन की अवधि के भीतर [ उप-धारा (3) या उप-धारा (7) के अधीन किए गए आदेश का पालन करने में चूक करता है, ] तो ऐसा अधिकारी कारावास से, जो छह महीने तक का हो सकता है या जुर्माने से, जो पच्चीस हजार रुपए से कम नहीं होगा किंतु एक लाख रुपए तक का हो सकता है, या दोनों से, दंडनीय होगा।


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