आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44च

लाभांश सहित विक्रय के माध्यम से कर का परिहार

धारा

धारा संख्या

44च

अध्याय शीर्षक

V-ख - आयकर और सुपर-टैक्स के दायित्व से बचने से संबंधित विशेष प्रावधान

अधिनियम

भारतीय आयकर अधिनियम, 1922 (निरस्त)

वर्ष

लाभांश सहित विक्रय के माध्यम से कर का परिहार

लाभांश सहित विक्रय के माध्यम से कर का परिहार 

44च  लाभांश सहित विक्रय के माध्यम से कर का परिहार । —(1)कोई व्यक्ति, जिस पर आयकर अधिकारी द्वारा यह अपेक्षा करते हुए नोटिस सेवित किया जाता है कि वह किन्हीं प्रतिभूतियों से संबंधित विशिष्टियों का विवरण प्रस्तुत करे, जिनमें नोटिस में विनिर्दिष्ट अवधि के दौरान किसी भी समय उसका कोई फायदाप्रद हित रहा हो और जिनके संबंध में ऐसी अवधि के भीतर या तो उसे कोई आय प्राप्त नहीं हुई हो या उसे प्राप्त आय उस राशि से कम हो जो आय होती यदि ऐसी प्रतिभूतियों से आय दिन-प्रतिदिन प्रोद्भूत होती और तदनुसार प्रभाजित होती, वह, चाहे उसकी कुल आय के संबंध में आयकर या अधिकर का निर्धारण सुसंगत वर्ष या वर्षों के लिए किया गया हो या नहीं किया गया हो, ऐसा विवरण और विशिष्टियां नोटिस द्वारा अपेक्षित प्ररूप में और समय के भीतर (अट्ठाईस दिन से कम नहीं) प्रस्तुत करेगा।

(2) यदि आयकर अधिकारी को किसी ऐसे व्यक्ति की प्रतिभूतियों के संबंध में सभी परिस्थितियों के संदर्भ में (जिनमें ऐसी प्रतिभूतियों से संबंधित बिक्री, खरीद, लेन-देन, संविदा, व्यवस्था, अंतरण या किसी अन्य लेनदेन के संबंध में परिस्थितियां शामिल हैं) यह प्रतीत होता है कि ऐसे व्यक्ति ने किसी वर्ष के लिए आयकर या अधिकर की रकम के दस प्रतिशत से अधिक की बचत की है या बचता, जो उन प्रतिभूतियों से आय के संबंध में उसके मामले में देय होती यदि आय को दिन-प्रतिदिन प्रोद्भूत माना जाता और तदनुसार प्रभाजित किया जाता और इस प्रकार प्रभाजित समझी गई आय को आयकर या अधिकर के प्रयोजनों के लिए सभी स्रोतों से उसकी कुल आय का भाग माना जाता, तो वे प्रतिभूतियां ऐसी प्रतिभूतियां समझी जाएंगी जिन पर उपधारा (3) लागू होती है।

(3) किसी ऐसे व्यक्ति के मामले में आयकर या अधिकर के निर्धारण के प्रयोजनों के लिए, किसी प्रतिभूति से, जिस पर यह उपधारा लागू होती है, आय दिन-प्रतिदिन प्रोद्भूत मानी जाएगी और उसके द्वारा या उसे ऐसी किसी प्रतिभूति की बिक्री या अंतरण की स्थिति में वह उसी समय प्राप्त मानी जाएगी जब वह उपार्जित मानी जाएगी:

बशर्ते कि यह धारा उस स्थिति में लागू नहीं होगी, जब ऐसा व्यक्ति आयकर अधिकारी के समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दे कि आयकर या अधिकर का परिहार अपवादस्वरूप था तथा व्यवस्थित नहीं था और उसके मामले में पिछले तीन वर्षों में से किसी भी वर्ष में आयकर या अधिकर का ऐसा कोई परिहार नहीं हुआ था, या ऐसी आय के संबंध में उसके मामले में धारा 44ड़  के उपबंध लागू किए गए हैं।

(4) यदि कोई व्यक्ति इस धारा के अधीन अपेक्षित कोई कथन या विशिष्टियां देने में असफल रहता है, या यदि आयकर अधिकारी इस धारा के अधीन दिए गए किसी कथन या विशिष्टियों से संतुष्ट नहीं है, तो आयकर अधिकारी आय की उस रकम का अनुमान लगा सकेगा, जो इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अधीन आयकर या अधिकर के प्रयोजनों के लिए उस व्यक्ति की कुल आय का भाग समझी जाएगी।

(5) यदि कोई व्यक्ति बिना किसी उचित कारण के इस धारा के अधीन अपेक्षित कोई कथन या विशिष्टियां देने में असफल रहेगा तो वह पांच सौ रुपए से अधिक के जुर्माने से दण्डनीय होगा तथा ऐसे जुर्माने के पश्चात् प्रत्येक दिन के लिए उतनी ही राशि के अतिरिक्त जुर्माने से दण्डनीय होगा, जिसके दौरान असफलता जारी रहती है।

(6) इस धारा के उद्देश्य के लिए अभिव्यक्ति "प्रतिभूतियां" में स्टॉक और शेयर शामिल हैं।

 

 

[जैसा कि संशोधित किया गया है]

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