अनिवासियों की दशा में मुख्यालय व्यय की कटौती
62[अनिवासियों की दशा में मुख्यालय व्यय की कटौती63
6444ग. धारा 28 से धारा 43क तक में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में जो अनिवासी है "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में, मुख्यालय व्यय की प्रकृति के इतने व्यय की बाबत कोर्इ मोक नहीं दिया जाएगा जो इसके अधीन यथा संगणित रकम से अधिक है, अर्थात् :–
(क) समायोजित कुल आय के पांच प्रतिशत के बराबर रकम; या
(ख) 65[* * *]
(ग) निर्धारिती द्वारा उपगत मुख्यालय व्यय की प्रकृति के व्यय की इतनी रकम जो भारत में निर्धारिती के कारबार या वृत्ति से हुर्इ मानी जा सकती है66,
इनमें से जो सबसे कम हो :
परन्तु उस दशा में जहां निर्धारिती की समायोजित कुल आय हानि है, वहां खंड (क) के अधीन रकम की संगणना निर्धारिती की औसत समायोजित कुल आय के पांच प्रतिशत की दर से की जाएगी।
स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए–
(i) "समायोजित कुल आय" से अभिप्रेत है इस धारा या धारा 32 की उपधारा (2) में निर्दिष्ट मोक या धारा 32क या धारा 33 या धारा 33क या धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) के प्रथम परन्तुक में निर्दिष्ट कटौती या धारा 72 की उपधारा (1) या धारा 73 की उपधारा (2) या धारा 74 की उपधारा (1) 67[या उपधारा (3)] या धारा 74क की उपधारा (3) के अधीन अग्रनीत हानि या अध्याय 6क के अधीन कटौतियों को प्रभाव दिये बिना इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार संगणित कुल आय;
(ii) "औसत समायोजित कुल आय" से अभिप्रेत है–
(क) उस दशा में जहां निर्धारिती की कुल आय सुसंगत निर्धारण वर्ष के ठीक पूर्ववर्ती तीन निर्धारण वर्षों में से प्रत्येक के लिए निर्धार्य है वहां पूर्वोक्त तीन निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्ष की बाबत समायोजित कुल आय की सकल रकम का एक-तिहार्इ भाग;
(ख) उस दशा में जहां निर्धारिती की कुल आय पूर्वोक्त तीन निर्धारण वर्षों में से केवल दो के लिए निर्धार्य है वहां पूर्वोक्त दो निर्धारण वर्षों से सुसंगत पूर्ववर्षों की बाबत समायोजित कुल आय की सकल रकम का आधा भाग;
(ग) उस दशा में जहां निर्धारिती की कुल आय पूर्वोक्त तीन निर्धारण वर्षों में से केवल एक के लिए निर्धार्य है वहां उस निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष की बाबत समायोजित कुल आय की रकम;
(iii) 68[* * *]
(iv) "मुख्यालय व्यय" से निर्धारिती द्वारा भारत के बाहर उपगत कार्यपालक और सामान्य प्रशासन व्यय अभिप्रेत है, इसके अंतर्गत निम्नलिखित की बाबत उपगत व्यय भी है, अर्थात् :–
(क) कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त भारत के बाहर किसी परिसर का किराया, रेट, कर, मरम्मत या बीमा;
(ख) भारत के बाहर किसी कार्यालय में नियोजित या उसके कार्यकलापों का प्रबंध करने वाले किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को संदत्त या अनुज्ञात वेतन, मजदूरी, वार्षिकी, पेंशन, फीस, बोनस, कमीशन, उपदान, परिलब्धि या वेतन के बदले में या वेतन के अतिरिक्त लाभ;
(ग) भारत के बाहर किसी कार्यालय में नियोजित या उसके कार्यकलापों का प्रबंध करने वाले, किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा यात्रा; और
(घ) कार्यपालक और सामान्य प्रशासन से संबंधित ऐसे अन्य विषय, जो विहित किए जाएं।]
62. वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.6.1976 से अंत:स्थापित।
63. परिपत्र सं. 649, तारीख 31.3.1993 भी देखिये। ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
64. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
65. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।
66. "व्यय की इतनी रकम ........... व्यय की मानी जा सकती है" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
67. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
68. वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।
[वित्त अधिनियम, 2010 द्वारा संशोधित रूप में]

