आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44खख

खनिज तेल के आदि अन्वेषण, के व्यापार के सिलसिले में लाभ और लाभ की गणना के लिए विशेष प्रावधान

धारा

धारा संख्या

44खख

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2004

खनिज तेल के आदि अन्वेषण, के व्यापार के सिलसिले में लाभ और लाभ की गणना के लिए विशेष प्रावधान

खनिज तेल के आदि अन्वेषण, के व्यापार के सिलसिले में लाभ और लाभ की गणना के लिए विशेष प्रावधान

95[खनिज तेलों की खोज, आदि के कारबार के संबंध में लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

44खख. (1) धारा 28 से धारा 41 तथा धारा 43 और धारा 43क में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी ऐसे निर्धारिती की दशा में 96[जो अनिवासी है] और जो खनिज तेलों के पूर्वेक्षण या निष्कर्षण या उत्पादन के संबंध में सेवाएं या सुविधाएं प्रदान करने के या उक्त कार्य के लिए उपयोग किए गए या उपयोग किए जाने वाले संयंत्र और मशीनरी भाड़े पर देने के कारबार में लगा हुआ है, उपधारा (2) में विनिर्दिष्ट रकमों के योग के दस प्रतिशत के बराबर राशि ऐसे कारबार के "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्षक के अधीन कर से प्रभार्य लाभ और अभिलाभ समझी जाएगी :

परन्तु यह धारा वहां लागू नहीं होगी जहां धारा 42 या धारा 44घ या धारा 115क या धारा 293क के उपबंध, उन धाराओं में विनिर्दिष्ट लाभ या अभिलाभ या किसी अन्य आय की संगणना करने के प्रयोजन के लिए लागू होते हैं।

(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट रकमें निम्न प्रकार होंगी, अर्थात् :–

() निर्धारिती को या उसकी ओर से किसी व्यक्ति को भारत में खनिज तेलों के पूर्वेक्षण या निष्कर्षण या उत्पादन के संबंध में सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने के लिए या उक्त कार्य के लिए उपयोग किए गए या उपयोग किए जाने वाले संयंत्र और मशीनरी भाड़े पर देने की बाबत (भारत में या भारत के बाहर) संदत्त या संदेय रकम; और

() निर्धारिती द्वारा या उसकी ओर से किसी व्यक्ति द्वारा भारत के बाहर खनिज तेलों के पूर्वेक्षण या निष्कर्षण या उत्पादन के संबंध में सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने के लिए या उक्त कार्य करने के लिए उपयोग में किए गए या किए जाने वाले संयंत्र और मशीनरी भाड़े पर देने की बाबत भारत में प्राप्त या प्राप्त समझी गर्इ रकम।

96क[(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, कोर्इ निर्धारिती, उस उपधारा में विनिर्दिष्ट लाभों और अभिलाभों से कम लाभों और अभिलाभों का दावा कर सकेगा, यदि वह धारा 44कक की उपधारा (2) के अधीन यथाअपेक्षित लेखा बहियां और अन्य दस्तावेज रखता है और उन्हें बनाए रखता है, और धारा 44कख के अधीन यथाअपेक्षित अपने लेखाओं की संपरीक्षा कराता है तथा ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट देता है और तदुपरि निर्धारण अधिकारी, धारा 143 की उपधारा (3) के अधीन निर्धारिती की कुल आय या हानि का निर्धारण करने की कार्यवाही करेगा और निर्धारिती द्वारा संदेय या उसको प्रतिदेय राशि का अवधारण करेगा।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–

(i) "संयंत्र" के अन्तर्गत उक्त कारबार के प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाए गए पोत, वायुयान, यान, ड्रिल यूनिट, वैज्ञानिक साधित्र और उपस्कर भी हैं;

(ii) "खनिज तेल" के अंतर्गत पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस भी है।]

 

95. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1983 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

96. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1983 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

96क. वित्त अधिनियम, 2003 द्वारा 1.4.2004 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2004 द्वारा संशोधित रूप में]

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