आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44कड़

माल वाहन चलाने, किराए या पट्टे पर देने के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

44कड़

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.1)

माल वाहन चलाने, किराए या पट्टे पर देने के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

माल वाहन चलाने, किराए या पट्टे पर देने के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

माल वाहन चलाने, किराए या पट्टे पर देने के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

44कड़. (1) धारा 28 से धारा 43ग में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी ऐसे निर्धारिती की दशा में, जिसके स्वामित्व में पूर्ववर्ष के दौरान किसी समय दस से अधिक माल वाहन नहीं हैं और जो ऐसे माल वाहनों को चलाने, किराए या पट्टे पर देने के कारबार में लगा हुआ है, ''कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ'' शीर्ष के अधीन कर से प्रभार्य ऐसे कारबार की आय, पूर्ववर्ष में उसके स्वामित्व में के सभी माल वाहनों से, उपधारा (2) के उपबंधों के अनुसार संगणित, लाभों और अभिलाभों का योग समझी जाएगी।

48क[(2) उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए ऐसे प्रत्येक माल वाहन से लाभ और अभिलाभ,

(i) जो भारी माल यान है, वह रकम होगी, जो ऐसे प्रत्येक मास या मास के भाग के लिए, जिसके दौरान भारी माल यान पूर्ववर्ष में निर्धारिती के स्वामित्व में रहता है, यथास्थिति, सकल यान भार या लदान रहित भार के प्रति टन के एक हजार रुपए के बराबर है या वह रकम होगी, जिसके लिए यह दावा किया गया है कि वह ऐसे यान से वस्तुत: अर्जित की गर्इ है, इनमें से जो भी अधिक हो;

(ii) जो भारी माल यान से भिन्न है, वह रकम होगी, जो ऐसे प्रत्येक मास या किसी मास के भाग के लिए, जिसके दौरान माल वाहन पूर्ववर्ष में निर्धारिती के स्वामित्व में रहता है, जो सात हजार पांच सौ रुपए के बराबर है या वह रकम होगी, जिसके लिए यह दावा किया गया है कि वह ऐसे माल वाहन से वस्तुत: अर्जित की गर्इ है, इनमें से जो भी अधिक हो।]

(3) धारा 30 से धारा 38 के उपबंधों के अधीन अनुज्ञेय किसी कटौती के बारे में, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि उसे पहले ही पूर्ण प्रभाव दे दिया गया है और उन धाराओं के अधीन और कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी :

परन्तु जहां निर्धारिती फर्म है वहां उसके भागीदारों को संदत्त वेतन और ब्याज की, धारा 40 के खंड () में विनिर्दिष्ट शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए, उपधारा (1) के अधीन संगणित आय में से कटौती की जाएगी।

(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार के प्रयोजन के लिए उपयोग में लार्इ गर्इ किसी आस्ति का अवलिखित मूल्य ऐसे परिकलित किया गया समझा जाएगा मानो सुसंगत निर्धारण वर्षों में से प्रत्येक के लिए अवक्षयण की बाबत निर्धारिती ने कटौती का दावा किया हो और उसे वह वास्तव में अनुज्ञात की गर्इ हो।

(5) धारा 44कक और धारा 44कख के उपबंध वहां तक लागू नहीं होंगे जहां तक वे उपधारा (1) में उल्लिखित कारबार से संबंधित हैं और उन धाराओं के अधीन धनीय सीमाओं की संगणना करने में उक्त कारबार से यथास्थिति सकल प्राप्तियों या आय को अपवर्जित कर दिया जाएगा।

(6) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों की कोर्इ बात वहां लागू नहीं होगी जहां निर्धारिती दावा करता है और यह साबित करने के लिए साक्ष्य पेश करता है कि 1 अप्रैल, 1997 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान उक्त कारबार के लाभ और अभिलाभ उपधारा (1) और (2) में विनिर्दिष्ट लाभों और अभिलाभों से कम हैं और निर्धारण अधिकारी, निर्धारिती की कुल आय या हानि का निर्धारण करने के लिए अग्रसर होगा और धारा 143 की उपधारा (3) के अधीन किए गए निर्धारण के आधार पर निर्धारिती द्वारा संदेय राशि का अवधारण करेगा।

(7) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी निर्धारिती उपधारा (1) और (2) में विनिर्दिष्ट लाभ और अभिलाभ से कम लाभों और अभिलाभों का दावा कर सकेगा यदि वह धारा 44कक की उपधारा (2) द्वारा अपेक्षित लेखा पुस्तकें और दस्तावेजें रखता है और धारा 44कख की अपेक्षानुसार अपने लेखाओं की संपरीक्षा करवाता है और संपरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।

स्पष्टीकरण.-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, -

1ख[() ''माल वाहन'', ''सकल यान भार'' और ''लदान रहित भार'' पदों का वही अर्थ होगा, जो मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 2 में क्रमश: उनका है;

(कक) ''भारी माल यान'' पद से कोर्इ ऐसा माल वाहन अभिप्रेत है जिसका सकल यान भार 12000 किलोग्राम से अधिक है;]

() किसी ऐसे निर्धारिती के बारे में जिसके कब्जे में कोर्इ माल यान है चाहे वह अवक्रय पर लिया गया हो या किस्तों पर जिसकी सम्पूर्ण रकम या उसका भाग अभी देय है, यह समझा जाएगा कि वह ऐसे माल व यान का स्वामी है।]

 

48क. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से प्रतिस्थपित । प्रतिस्थापन में पूर्व उपधारा (2) निम्न प्रकार थी।

"(2) उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए, प्रत्येक माल वाहन से लाभ और अभिलाभ, ऐसे प्रत्येक मास या मास के ऐसे भाग के लिए, जिसके दौरान माल वाहन पूर्ववर्ष में निर्धारिती के स्वामित्व में रहता है, सात हजार पांच सौ रुपए के बराबर रकम या वह रकम होगी, जिसके लिए यह दावा किया गया है कि वह ऐसे यान से वस्तुत: अर्जित की गर्इ है, इनमें से जो भी अधिक हो।"

1ख. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा 1.4.2019 से प्रतिस्थपित । प्रतिस्थापन में पूर्व खंड (क) निम्न प्रकार थे।

"(क) "माल वाहन" पद का वही अर्थ होगा, जो मोटर यान अधिनियम, 1988 (1988 का 59) की धारा 2 में उसका है;"

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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