आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44कघ

उपधारणात्मक आधार पर कारबार के लाभों और अभिलाभों की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

44कघ

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2019 (सं.2)

उपधारणात्मक आधार पर कारबार के लाभों और अभिलाभों की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

उपधारणात्मक आधार पर कारबार के लाभों और अभिलाभों की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

उपधारणात्मक आधार पर कारबार के लाभों और अभिलाभों की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

44कघ. (1) धारा 28 से धारा 43ग में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, ऐसे किसी पात्र निर्धारिती की दशा में जो किसी कारबार में लगा हुआ है, निर्धारिती के, यथास्थिति, ऐसे कारबार मद्दे पूर्ववर्ष में कुल आवर्त या सकल प्राप्तियों के आठ प्रतिशत के बराबर राशि को अथवा पूर्वोक्त राशि से उच्चतर राशि को, जिसका पात्र निर्धारिती द्वारा अर्जित किए जाने का दावा किया गया है, "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन कर से प्रभार्य ऐसे कारबार के लाभ और अभिलाभ समझा जाएगा।

56[परंतु यह उपधारा इस प्रकार प्रभावी होगी मानो कुल आवर्त या सकल प्राप्तियों की उस रकम की बाबत जिसे किसी पूर्ववर्ष के दौरान या धारा 139 की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट नियत तारीख से पूर्व उस पूर्ववर्ष के संबंध में पाने वाले के खाते में देय किसी चेक या खाते में देय बैंक ड्राफ्ट या किसी बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक प्रणाली का उपयोग करके 56क[या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक पद्धति के माध्यम से, जो विहित की जाए] प्राप्त किया गया है वहां "आठ प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर, "छह प्रतिशत" शब्द रखे गए हों।]

(2) धारा 30 से धारा 38 के उपबंधों के अधीन अनुज्ञेय किसी कटौती के बारे में, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि उसे पहले ही पूर्ण प्रभाव दे दिया गया है और उन धाराओं के अधीन कोर्इ और कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी:

(3) किसी पात्र कारबार की किसी आस्ति का अवलिखित मूल्य ऐसे संगणित किया गया समझा जाएगा मानो पात्र निर्धारिती ने सुसंगत निर्धारण वर्षों में से प्रत्येक वर्ष के लिए अवक्षयण की बाबत कटौती का दावा किया हो और उसे यह वास्तव में अनुज्ञात की गर्इ हो।

(4) जहां कोर्इ पात्र निर्धारिती, इस धारा के उपबंधों के अनुसरण में किसी पूर्ववर्ष के लिए लाभ की घोषणा करता है और वह ऐसे पूर्ववर्ष के उत्तरवर्ती पूर्ववर्ष के सुसंगत पांच निर्धारण वर्षों में से किसी के लिए लाभ की घोषणा करता है, जो उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार नहीं है वह ऐसे पूर्ववर्ष के सुसंगत निर्धारण वर्ष के पश्चात्वर्ती पांच निर्धारण वर्षों के लिए इस धारा के उपबंधों के फायदों का दावा करने का पात्र नहीं होगा जिसमें लाभ की घोषणा उपधारा (1) के उपबंधों के अनुसार नहीं की गर्इ थी ।

(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी ऐसा कोर्इ पात्र निर्धारिती से, जिसे उपधारा (4) के उपबंध लागू होते हैं और जिसकी कुल आय ऐसी अधिकतम रकम से अधिक है जो आय-कर से प्रभार्य नहीं है, धारा 44कक की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार लेखा पुस्तकें और अन्य दस्तावेज का रखा जाना और बनाए रखना अपेक्षित होगा और वह उनकी लेखा परीक्षा कराएगा तथा धारा 44कख की अपेक्षानुसार ऐसी लेखा परीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

(6) इस धारा के उपबंध, पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी,—

(i) धारा 44कक की उपधारा (1) में यथानिर्दिष्ट वृत्ति करने वाले किसी व्यक्ति;

(ii) कमीशन या दलाली की प्रकृति की आय अर्जित करने वाले किसी व्यक्ति; या

(iii) किसी अभिकरण कारबार को करने वाले किसी व्यक्ति,

को लागू नहीं होंगे।

स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—

(क) "पात्र निर्धारिती" से,—

(i) कोर्इ व्यष्टि, हिन्दू अविभक्त कुटुंब या भागीदारी फर्म अभिप्रेत है जो निवासी है किंतु सीमित दायित्व भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड () के अधीन यथा परिभाषित सीमित दायित्व वाली भागीदारी फर्म नहीं है; और

(ii) जिसने सुसंगत निर्धारण वर्ष में धारा 10क, धारा 10कक, धारा 10ख, धारा 10खक में से किसी के अधीन कटौती का या अध्याय 6क के किन्हीं उपबंधों के अधीन "ग-कतिपय आयों के संबंध में कटौतियां" शीर्ष के अधीन कटौती का दावा नहीं किया है;

() "पात्र कारबार" से,—

(i) धारा 44कड़ में निर्दिष्ट माल वाहनों को चलाने, भाड़े पर या पट्टे पर देने के कारबार के सिवाय कोर्इ कारबार अभिप्रेत है; और

(ii) ऐसा कारबार अभिप्रेत है जिसका पूर्ववर्ष में कुल आवर्त या सकल प्राप्तियां दो करोड़ रुपए की रकम से अधिक नहीं है।

 

56. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

56क. इटैलिक में दिए गए शब्द वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित किए जाएंगे।

 

 

 

[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

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