आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 44कघ

सिविल सन्निर्माण आदि के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

44कघ

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2001

सिविल सन्निर्माण आदि के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

सिविल सन्निर्माण आदि के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

9[10सिविल सन्निर्माण आदि के कारबार के लाभ और अभिलाभ की संगणना करने के लिए विशेष उपबंध

44कघ. (1) धारा 28 से धारा 43ग में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारिती की दशा में, जो सिविल सन्निर्माण या सिविल सन्निर्माण के लिए श्रम का प्रदाय करने के कारबार मंध लगा हुआ है, यथास्थिति, निर्धारिती को ऐसे कारबार मद्दे पूर्ववर्ष में संदत्त या संदेय सकल प्राप्तियों के आठ प्रतिशत के बराबर राशि या निर्धारिती द्वारा अपनी आय की विवरणी में घोषित पूर्वोक्त राशि से उच्चतर राशि ऐसे कारबार के "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन कर से प्रभार्य लाभ और अभिलाभ समझी जाएगी :

परन्तु इस उपधारा की कोर्इ बात चालीस लाख की रकम से अधिक संदत्त या संदेय पूर्वोक्त सकल प्राप्तियों की दशा में लागू नहीं होगी।

(2) धारा 30 से धारा 38 के उपबंधों के अधीन अनुज्ञेय किसी कटौती के बारे में, उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, यह समझा जाएगा कि उसे पहले ही पूर्ण प्रभाव दे दिया गया है और उन धाराओं के अधीन कोर्इ और कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी :

11[परन्तु जहां निर्धारिती फर्म है वहां उसके भागीदारों को संदत्त वेतन और ब्याज की धारा 40 के खंड () में विनिर्दिष्ट शर्तों और सीमाओं के अधीन रहते हुए उपधारा (1) के अधीन संगणित आय में से कटौती की जाएगी।]

(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार के प्रयोजन के लिए उपयोग में लार्इ गर्इ किसी आस्ति का अवलिखित मूल्य, ऐसे परिकलित किया गया समझा जाएगा मानो सुसंगत निर्धारण वर्षों में से प्रत्येक के लिए अवक्षयण की बाबत निर्धारिती ने कटौती के लिए दावा किया हो और उसे यह वास्तव में अनुज्ञात की गर्इ हो।

(4) धारा 44कक और धारा 44कख के उपबंध वहां तक लागू नहीं होंगे जहां तक कि वे उपधारा (1) में निर्दिष्ट कारबार से संबंधित हैं, और उन धाराओं के अधीन धनीय सीमाओं की संगणना करने में, उक्त कारबार से, यथास्थिति, सकल प्राप्तियों या आय को अपवर्जित कर दिया जाएगा।

12[(5) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों की कोर्इ बात, वहां लागू नहीं होगी जहां निर्धारिती दावा करता है और यह साबित करने के लिए साक्ष्य पेश करता है कि 1 अप्रैल, 1997 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्ववर्ती निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष के दौरान पूर्वोक्त कारबार के लाभ और अभिलाभ, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट लाभ और अभिलाभ से कम हैं और निर्धारण अधिकारी निर्धारिती की कुल आय या हानि का निर्धारण करने के लिए अग्रसर होगा और धारा 143 की उपधारा (3) के अधीन किए गए निर्धारण के आधार पर निर्धारिती द्वारा संदेय राशि का अवधारण करेगा।]

13[(6) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी, निर्धारिती उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट लाभ और अभिलाभ से कम लाभ और अभिलाभ का दावा कर सकता है यदि वह धारा 44कक की उपधारा (2) के अधीन अपेक्षित लेखा पुस्तकें और अन्य दस्तावेज रखता है और धारा 44कख की अपेक्षानुसार अपने लेखाओं की संपरीक्षा करवाता है और ऐसी संपरीक्षा की रिपोर्ट प्रस्तुत करता है।]

स्पष्टीकरण.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए "सिविल सन्निर्माण के अंतर्गत–

() किसी भवन, बांध या अन्य संरचना अथवा किसी नहर या सड़क का सन्निर्माण या मरम्मत,

() किसी संकर्म संविदा का निष्पादन,]

भी है।]

 

9. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित।

10. परिपत्र सं. 737, तारीख 23.2.1996 और परिपत्र सं. 3/2001, तारीख 9.2.2001 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

11. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1994 से अन्त:स्थापित।

12. आय-कर (दूसरा संशोधन) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित। इससे पहले उपधारा (5) वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1994 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1997 द्वारा उसका लोप किया गया था।

13. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।

 

 

[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट