आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 44कक

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा लेखा रखना

धारा

धारा संख्या

44कक

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2021

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा लेखा रखना

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा लेखा रखना

वृत्ति या कारबार चलाने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा लेखा रखना

44कक. (1) विधि, चिकित्सा, इंजीनियरी या वास्तुकला वृत्ति या लेखा कर्म या तकनीकी सलाह या भीतरी साज-सज्जा की वृत्ति या बोर्ड द्वारा राजपत्र में अधिसूचित कोर्इ अन्य वृत्ति चलाने वाला प्रत्येक व्यक्ति ऐसी लेखा पुस्तकें और दूसरे दस्तावेज रखेगा और उन्हें बनाए रखेगा जो निर्धारण अधिकारी को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उसकी कुल आय की संगणना करने में समर्थ बना सकें।

(2) कारबार या वृत्ति [जो उपधारा (1) में निर्दिष्ट वृत्ति नहीं है] चलाने वाला प्रत्येक व्यक्ति–

(i) यदि पूर्ववर्ष से ठीक पहले के तीन वर्षों में से किसी एक वर्ष में कारबार या वृत्ति से उसकी आय एक लाख बीस हजार रुपए से अधिक हो या कारबार या वृत्ति में यथास्थिति, उसकी कुल बिक्री, आवर्त या सकल प्राप्तियां, दस लाख रुपए से अधिक हों या होती हों; या

(ii) जहां कारबार या वृत्ति किसी पूर्ववर्ष में नये सिरे से स्थापित की गर्इ हो और यदि उस पूर्ववर्ष के दौरान उसकी कारबार या वृत्ति से आय एक लाख बीस हजार रुपये से अधिक होने की संभावना हो या कारबार या वृत्ति में उसकी यथास्थिति, कुल बिक्री, आवर्त या सकल प्राप्तियां दस लाख रुपए से अधिक होने की संभावना हो तो; या

(iii) जहां कारबार से लाभ और अभिलाभ यथास्थिति धारा 44कड़ या धारा 44खख या धारा 44खखख, के अधीन निर्धारिती के लाभ और अभिलाभ समझे जाते हैं और निर्धारिती ने ऐसे पूर्ववर्ष के दौरान अपनी आय को अपने कारबार के लाभ और अभिलाभ समझे जाने वाले लाभ और अभिलाभ से कम होने का दावा किया है, या

(iv) जहां धारा 44कघ की उपधारा (4) के उपबंध उसके मामले में लागू होते हैं और उसकी आय उस अधिकतम रकम से अधिक हो जाती है जो किसी पूर्ववर्ष में आय-कर से प्रभार्य नहीं है;

वहां ऐसी लेखा बहियां और अन्य दस्तावेज रखेगा और उन्हें बनाए रखेगा जो निर्धारण अधिकारी को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार उसकी कुल आय की संगणना करने में समर्थ बना सके:

53[परंतु किसी व्यक्ति, जो कोर्इ व्यष्टि या कोर्इ हिंदू अविभक्त कुटुंब है, की दशा में, खंड (i) और खंड (ii) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "एक लाख बीस हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर "दो लाख पचास हजार रुपए" शब्द रख दिए गए हों:

परंतु यह और कि किसी व्यक्ति, जो कोर्इ व्यष्टि या कोर्इ हिंदू अविभक्त कुटुंब है, की दशा में, खंड (i) और खंड (ii) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "दस लाख रुपए" शब्दों के स्थान पर "पच्चीस लाख रुपए" शब्द रख दिए गए हों।]

(3) बोर्ड किसी वर्ग के व्यक्तियों द्वारा चलाए जाने वाले कारबार या वृत्ति की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन रखी और बनार्इ रखी जाने वाली लेखा पुस्तकों और दूसरे दस्तावेजों को (जिनके अंतर्गत, जहां आवश्यक हो, तालिकाएं भी हैं) उनमें विनिर्दिष्ट किए जाने वाले विवरण और फार्म को जिसमें और उस रीति को, जिससे और उस स्थान को, जहां वे रखी जाएं या बनाए रखी जाएं, नियमों द्वारा विहित कर सकता है।

(4) उपधारा (3) के उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, बोर्ड, नियमों द्वारा, उस अवधि को विहित कर सकता है जिसके लिए उपधारा (1) या उपधारा (2) के अधीन रखी गर्इं या बनाए रखी गर्इं लेखा पुस्तकें और अन्य दस्तावेज रखे जाएंगे।

 

53. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2021 द्वारा संशोधित रूप में]

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