धारा 115खखघक का संशोधन।
धारा 115खखघक का संशोधन।
44. आय-कर अधिनियम की धारा 115खखघक [वित्त अधिनियम, 2016 (2016 का 28) की धारा 52 द्वारा यथा अंत:स्थापित] में, 1 अप्रैल, 2018 से,-
(i) उपधारा (1) में, "निर्धारिती, जो कोर्इ व्यष्टि, हिंदू अविभक्त कुटुंब या फर्म है," शब्दों के स्थान पर, "विनिर्दिष्ट निर्धारिती" शब्द रखे जाएंगे;
(ii) उपधारा (3) के स्थान पर, निम्नलिखित स्पष्टीकरण रखा जाएगा, अर्थात् :-
'स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए,-
(क) "लाभांश" का वही अर्थ होगा, जो धारा 2 के खंड (22) में उसका है, किन्तु इसमें उसका खंड (ड़) सम्मिलित नहीं होगा;
(ख) "विनिर्दिष्ट निर्धारिती" से निम्नलिखित से भिन्न व्यक्ति अभिप्रेत है,-
(i) देशी कंपनी; या
(ii) धारा 10 के खंड (23ग) के उपखंड (iv) या उपखंड (v) या उपखंड (vi) या उपखंड (viक) में निर्दिष्ट निधि या संस्था या न्यास या कोर्इ विश्वविद्यालय या अन्य शैक्षणिक संस्था या अन्य अस्पताल या अन्य आयुर्विज्ञान संस्था; या
(iii) धारा 12क या धारा 12कक के अधीन रजिस्ट्रीकृत कोर्इ न्यास या संस्था।'।

