लोक वित्तीय संस्थाओं, पब्लिक कंपनियों आदि की आय की दशा में विशेष उपबंध
लोक वित्तीय संस्थाओं, पब्लिक कंपनियों आदि की आय की दशा में विशेष उपबंध
43घ. इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी–
(क) किसी लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या 51[किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या किसी प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक से भिन्न किसी सहकारी बैंक या] राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम की दशा में, डूबंत या शंकास्पद ऋणों के ऐसे प्रवर्गों के संबंध में, जो ऐसे ऋणों के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए विहित किए जाएं, ब्याज के रूप में आय;
(ख) किसी पब्लिक कंपनी की दशा में, डूबंत या शंकास्पद ऋणों के ऐसे प्रवर्गों के संबंध में जो ऐसे ऋणों के संबंध में राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए विहित किए जाएं, ब्याज के रूप में आय,
यथास्थिति, उस पूर्ववर्ष में, जिसमें वह लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या 51[किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या किसी प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक से भिन्न किसी सहकारी बैंक या] राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम या पब्लिक कंपनी द्वारा उस वर्ष के अपने लाभ और हानि लेखा में जमा की जाती है या जिसमें वह उस संस्था या बैंक या निगम या कंपनी द्वारा वास्तव में प्राप्त की जाती है, इनमें से जो भी पहले हो, कर से प्रभार्य होगी।
स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) ''राष्ट्रीय आवास बैंक'' से राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक अभिप्रेत है;
(ख) ''पब्लिक कंपनी'' से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है,–
(i) जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 के अर्थ के भीतर पब्लिक कंपनी है;
(ii) जिसका मुख्य उद्देश्य, भारत में आवासीय प्रयोजनों के लिए गृहों के सन्निर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने के कारबार को चलाना है; और
(iii) जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 30 और धारा 31 के अधीन दिए गए आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैं.) निदेश, 1989 के अनुसार रजिस्ट्रीकृत है;
(ग) ''लोक वित्तीय संस्था'' का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क में उसका है;
(घ) ''अनुसूचित बैंक'' का वही अर्थ है जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में उसका है;
(ड़) ''राज्य वित्तीय निगम'' से अभिप्रेत है राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम या धारा 46 के अधीन अधिसूचित कोर्इ संस्था;
(च) ''राज्य औद्योगिक विनिधान निगम'' से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में कोर्इ सरकारी कंपनी जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने के कारबार में लगी हुर्इ है;
52[(छ) "सहकारी बैंक", "प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी" और "प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक" के वही अर्थ होंगे, जो धारा 80त की उपधारा (4) के स्पष्टीकरण में क्रमश: उनके हैं।]
[वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा संशोधित रूप में]

