लोक वित्तीय संस्थाओं, पब्लिक कंपनियों आदि की आय की दशा में विशेष उपबंध
92[लोक वित्तीय संस्थाओं, पब्लिक कंपनियों आदि की आय की दशा में विशेष उपबंध
43घ. इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी,–
(क) किसी लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम की दशा में, डूबंत या शंकास्पद ऋणों के ऐसे प्रवर्गों के संबंध में, जो ऐसे ऋणों के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए विहित93 किए जाएं, ब्याज के रूप में आय;
(ख) किसी पब्लिक कंपनी की दशा में, डूबंत या शंकास्पद ऋणों के ऐसे प्रवर्गों के संबंध में जो ऐसे ऋणों के संबंध में राष्ट्रीय आवास बैंक द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए विहित94 किए जाएं, ब्याज के रूप में आय,
यथास्थिति, उस पूर्ववर्ष में, जिसमें वह लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम या पब्लिक कंपनी द्वारा उस वर्ष के अपने लाभ और हानि लेखा में जमा की जाती है या जिसमें वह उस संस्था या बैंक या निगम या कंपनी द्वारा वास्तव में प्राप्त की जाती है, इनमें से जो भी पहले हो, कर से प्रभार्य होगी।
स्पष्टीकरण.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "राष्ट्रीय आवास बैंक" से राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 3 के अधीन स्थापित राष्ट्रीय आवास बैंक अभिप्रेत है;
(ख) "पब्लिक कंपनी" से ऐसी कंपनी अभिप्रेत है,–
(i) जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 395 के अर्थ के भीतर पब्लिक कंपनी है;
(ii) जिसका मुख्य उद्देश्य, भारत में आवासीय प्रयोजनों के लिए गृहों के सन्निर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने के कारबार को चलाना है; और
(iii) जो राष्ट्रीय आवास बैंक अधिनियम, 1987 (1987 का 53) की धारा 30 और धारा 31 के अधीन दिए गए आवास वित्त कंपनी (रा.आ.बैं.) निदेश, 1989 के अनुसार रजिस्ट्रीकृत है;
(ग) "लोक वित्तीय संस्था" का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क96 में उसका है;
(घ) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में उसका है;
(ड़) "राज्य वित्तीय निगम" से अभिप्रेत है राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम या धारा 46 के अधीन अधिसूचित कोर्इ संस्था;
(च) "राज्य औद्योगिक विनिधान निगम" से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में कोर्इ सरकारी कंपनी97 जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने के कारबार में लगी हुर्इ है।]
92. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1991 से यथा अंत:स्थापित धारा 43घ निम्न प्रकार थी :
'43घ. लोक वित्तीय संस्थाओं, आदि की आय की दशा में विशेष उपबंध–इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी, किसी लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम की दशा में डूबंत या शंकास्पद ऋणों के ऐसे प्रवर्गों के संबंध में जो ऐसे ऋणों के संबंध में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धान्तों को ध्यान में रखते हुए विहित किए जाएं, ब्याज के रूप में आय, उस पूर्ववर्ष में जिसमें वह यथास्थिति, लोक वित्तीय संस्था या अनुसूचित बैंक या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम द्वारा उस वर्ष के अपने लाभ और हानि लेखा में जमा की जाती है या जिसमें वह उस संस्था या बैंक या निगम द्वारा वास्तव में प्राप्त की जाती है, इनमें से जो भी पहले हो, कर से प्रभार्य होगी।
स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "लोक वित्तीय संस्था" का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1 ) की धारा 4क में उसका है;
(ख) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) में स्पष्टीकरण के खंड (ii) में उसका है;
(ग) "राज्य वित्तीय निगम" से अभिप्रेत है राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम या धारा 46 के अधीन अधिसूचित कोर्इ संस्था;
(घ) "राज्य औद्योगिक विनिधान निगम" से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में कोर्इ सरकारी कंपनी जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने के कारबार में लगी हुर्इ है और केंद्रीय सरकार द्वारा धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन अनुमोदित है।'
93. धारा 43घ के अधीन बनाया गया 1.4.2000 से पूर्व विद्यमान नियम 6ड़क देखिए।
94. नियम 6ड़ख देखिए।
95. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 3(1) के खंड (iv) में 'पब्लिक कंपनी' की परिभाषा दी गर्इ है। धारा 3 के पाठ के लिए देखिये परिशिष्ट।
96. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 4क के पाठ के लिए और उसके अधीन अधिसूचित संस्थाओं के लिए देखिए परिशिष्ट।
97. "सरकारी कंपनी" की परिभाषा के लिए देखिए पूर्व पृष्ठ 1.27 पर पाद-टिप्पण 64.
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

