वास्तविक संदाय पर ही की जाने वाली कुछ कटौतियां
वास्तविक संदाय पर ही की जाने वाली कुछ कटौतियां
43ख. इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी कटौती जो—
(क) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो निर्धारिती द्वारा, उस समय लागू किसी विधि के अधीन कर, शुल्क, उपकर या फीस के रूप में संदेय है, चाहे वह किसी भी नाम से जानी जाए; या
(ख) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो नियोजक के रूप में निर्धारिती द्वारा किसी भविष्य निधि या अधिवार्षिकी निधि या उपदान निधि या कर्मचारियों के कल्याण के लिए किसी अन्य निधि में अभिदाय के रूप में संदेय है; या
(ग) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ii) में उल्लिखित है; या
(घ) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो निर्धारिती द्वारा किसी लोक वित्तीय संस्था या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम से लिए गए किसी उधार या ऋण पर ऐसे उधार या ऋण को लागू करार के निबंधनों और शर्तों के अनुसार ब्याज के रूप में संदेय है; या
वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से धारा 43ख के खंड (घ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड (घक) अंत:स्थापित किया जाएगा:
(घक) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो निर्धारिती द्वारा ऐसे ऋण या उधार को शासित करने वाले करार के निबंधनों और शर्तों के अनुसार किसी निक्षेप लेने वाली गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी या किसी सुव्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण निक्षेप न लेने वाली गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी से किसी ऋण या उधार पर ब्याज के रूप में संदेय है, या
(ड़) ऐसे ऋण या अग्रिम को शासित करने वाले करार के निबंधनों और शर्तों के अनुसार अनुसूचित बैंक 47[या किसी प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी या किसी प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक से भिन्न किसी सहकारी बैंक] से किसी ऋण या अग्रिम पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा संदेय कोर्इ राशि या
(च) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो नियोजक के रूप में निर्धारिती द्वारा अपने कर्मचारी के जमा खाते में की किसी छुट्टी के बदले में संदेय है, या
(छ) निर्धारिती द्वारा भारतीय रेल को रेल आस्तियों के उपयोग के लिए संदेय कोर्इ राशि।
इस अधिनियम के अधीन अन्यथा अनुज्ञेय है, उस पूर्ववर्ष की जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वस्तुत: अदा कर दी जाती है, धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना करने में (उस पूर्ववर्ष का विचार किए बिना जिसमें निर्धारिती ने राशि अदा करने का दायित्व, उसके द्वारा नियमित रूप से प्रयुक्त लेखा पद्धति के अनुसार उपगत किया गया था), अनुज्ञात की जाएगी :
परन्तु इस धारा की कोर्इ बात किसी ऐसी राशि के संबंध में लागू नहीं होगी जो निर्धारिती द्वारा, उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें राशि देने का दायित्व उक्त रूप में उपगत हुआ था, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी देने के लिए उसके मामले में लागू निश्चित तारीख को या उसके पूर्व वास्तव में दे दी गर्इ है और देने का साक्ष्य ऐसी विवरणी के साथ निर्धारिती द्वारा दिया जाता है।
स्पष्टीकरण 1.–शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 1983 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्व निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है), जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि अदा करने का दायित्व उपगत किया गया था, धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती, ऐसी राशि की बाबत उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा राशि वास्तव में संदत्त की जाती है, आय की संगणना करने में इस धारा के अधीन कटौती के लिए हकदार नहीं होगा।
स्पष्टीकरण 2.—खंड (क) के, जो सब तात्विक समयों पर प्रभावी था, प्रयोजनों के लिए, "किसी संदेय राशि" से अभिप्रेत है वह राशि जिसके लिए निर्धारिती ने पूर्ववर्ष में दायित्व उपगत कर लिया था, चाहे ऐसी राशि सुसंगत विधि के अधीन उस वर्ष में देने योग्य न हो।
स्पष्टीकरण 3.—शंकाओं के दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (ग) या खंड (घ) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती, उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उससे पूर्व के किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है), जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि अदा करने का दायित्व उपगत किया गया था, धारा 28 में उल्लिखित आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वास्तव में अदा की जाती है, आय की संगणना करने में ऐसी राशि की बाबत इस धारा के अधीन किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।
स्पष्टीकरण 3क.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (ड़) में निर्दिष्ट आय की बाबत कटौती, उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 1996 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उससे पूर्व के किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है) जिसमें ऐसी राशि अदा करने का दायित्व निर्धारिती द्वारा उपगत किया गया था, धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वास्तव में अदा की जाती है, आय की संगणना में ऐसी राशि की बाबत इस धारा के अधीन किसी कटौती के लिए हकदार नहीं होगा।
वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से धारा 43ख के स्पष्टीकरण 3क के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण 3कक अंत:स्थापित किया जाएगा:
स्पष्टीकरण 3कक—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जहां खंड (घक) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती, उस पूर्ववर्ती वर्ष की (जो 1 अप्रैल, 2019 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वत्तर निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ती वर्ष है) धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना में अनुज्ञात की जाती है, जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि का संदाय करने का दायित्व उपगत किया गया था, वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ती वर्ष की, जिसमें राशि का उसके द्वारा वस्तुत: संदाय किया गया है, आय की संगणना करने में इस धारा के अधीन ऐसी राशि की बाबत किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।
स्पष्टीकरण 3ख.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (च) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कटौती उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 2001 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उससे पूर्व के किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है), जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि अदा करने का दायित्व उपगत किया गया था, धारा 28 में उल्लिखित आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वास्तव में अदा की जाती है, आय की संगणना करने में ऐसी राशि की बाबत इस धारा के अधीन किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।
स्पष्टीकरण 3ग.— शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि किसी ऐसी राशि की, जो इस धारा के खंड (घ) के अधीन संदेय ब्याज है, कटौती उस दशा में अनुज्ञात की जाएगी यदि ऐसे ब्याज का वास्तविक रूप में संदाय कर दिया गया है और उस खंड में निर्दिष्ट किसी ब्याज के बारे में, जिसे किसी उधार या ऋण में संपरिवर्तित कर दिया गया है, यह नहीं समझा जाएगा कि उसका वास्तविक रूप में संदाय कर दिया गया है।
वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से धारा 43ख के स्पष्टीकरण 3ग के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण 3गक अंत:स्थापित किया जाएगा।
स्पष्टीकरण 3गक—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि किसी ऐसी राशि की कटौती, जो खंड (घक) के अधीन संदेय ब्याज है, तभी अनुज्ञात होगी यदि ऐसे ब्याज का वस्तुत: संदाय किया गया है और उक्त उपखंड में निर्दिष्ट ऐसा ब्याज, जिसे ऋण या उधार मे संपरिवर्तित कर दिया गया है, वस्तुत: संदाय किया हुआ नहीं समझा जाएगा।
स्पष्टीकरण 3घ.— शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि किसी ऐसी राशि की, जो इस धारा के खंड (ड़) के अधीन संदेय ब्याज है, कटौती उस दशा में अनुज्ञात की जाएगी, यदि ऐसे ब्याज का वास्तविक रूप में संदाय कर दिया गया है और उस खंड में निर्दिष्ट किसी ब्याज के बारे में, जिसे किसी उधार या अग्रिम में संपरिवर्तित कर दिया गया है, यह नहीं समझा जाएगा कि उसका वास्तविक रूप में संदाय कर दिया गया है।
स्पष्टीकरण 4.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
(क) "लोक वित्तीय संस्था" का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क में उसका है;
(कक) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो धारा 11 की उपधारा (5) के खंड (iii) के स्पष्टीकरण में है;
(ख) "राज्य वित्तीय निगम" से अभिप्रेत है राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम या धारा 46 के अधीन अधिसूचित कोर्इ संस्था;
(ग) "राज्य औद्योगिक विनिधान निगम" से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में कोर्इ सरकारी कंपनी, जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने में लगी है और केन्द्रीय सरकार द्वारा धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन कटौती के लिए पात्र है;
48[(घ) "सहकारी बैंक", "प्राथमिक कृषि प्रत्यय सोसाइटी" और "प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक" के वही अर्थ होंगे, जो धारा 80त की उपधारा (4) के स्पष्टीकरण में क्रमश: उनके हैं।]
वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से धारा 43ख के स्पष्टीकरण 4 के खंड (घ) के पश्चात् निम्नलिखित खंड अंत:स्थापित किए जाएंगे :
(ड़) "निक्षेप लेने वाली गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी" से कोर्इ गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी अभिप्रेत है, जो लोक निक्षेप ग्रहण या धारित करती है और भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के उपबंधों के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक में रजिस्ट्रीकृत है;
(च) "गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी" का वही अर्थ होगा, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 45झ के खंड (च) में उसका है;
(छ) "सुव्यवस्थित रूप से महत्वपूर्ण निक्षेप न लेने वाली गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी" से ऐसी गैर-बैंककारी वित्तीय कंपनी अभिप्रेत है जो लोक निक्षेप ग्रहण या धारित नहीं करती है और जिसकी कुल आस्तियां अंतिम संपरीक्षित तुलनपत्र के अनुसार पांच अरब रुपए से कम नहीं है तथा जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) के उपबंधों के अधीन भारतीय रिजर्व बैंक में रजिस्ट्रीकृत है।
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा संशोधित रूप में]

