वास्तविक संदाय पर ही की जाने वाली कुछ कटौतियां
44[वास्तविक संदाय पर ही की जाने वाली कुछ कटौतियां
4543ख. 46इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी कटौती जो--
47[(क) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो निर्धारिती द्वारा, उस समय लागू किसी विधि के अधीन कर, शुल्क, उपकर या फीस के रूप में संदेय है, चाहे उसे कुछ भी कहें; या]
(ख) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो नियोजक के रूप में निर्धारिती द्वारा किसी भविष्य निधि या अधिवार्षिकी निधि या उपदान निधि या कर्मचारियों के कल्याण के लिए किसी अन्य निधि में अभिदाय के रूप में संदेय है; 48[या]
49[(ग) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ii) में उल्लिखित है; 50[या]
50[(घ) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो निर्धारिती द्वारा किसी लोक वित्तीय संस्था 51[या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम] से लिए गए किसी उधार या ऋण पर ऐसे उधार या ऋण को लागू करार के निबंधनों और शर्तों के अनुसार ब्याज के रूप में संदेय है; [या]52
52[(ड़) ऋण संबंधी करार को शासित करने वाले निबंधनों और शर्तों के अनुसार अनुसूचित बैंक से किसी आवधिक उधार पर ब्याज के रूप में निर्धारिती द्वारा संदेय कोर्इ राशि;] 52क[या]
वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से धारा 43ख के खंड (ड़) के पश्चात् निम्नलिखित खंड (च) अंत:स्थापित किया जाएगा :
(च) किसी ऐसी राशि की बाबत, जो नियोजक के रूप में निर्धारिती द्वारा अपने कर्मचारी के जमा खाते में की किसी छुट्टी के बदले में संदेय है,
इस अधिनियम के अधीन अन्यथा अनुज्ञेय है, उस पूर्ववर्ष की जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वस्तुत: अदा कर दी जाती है, धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना करने में (उस पूर्ववर्ष का विचार किए बिना जिसमें निर्धारिती ने राशि अदा करने का दायित्व, उसके द्वारा नियमित रूप से प्रयुक्त लेखा पद्धति के अनुसार उपगत किया गया था), अनुज्ञात की जाएगी :
53[परन्तु इस धारा की कोर्इ बात खंड (क), 54[या खंड (ग)], 55[या खंड (घ)], 56[या खंड (ड़)], 56क[या खंड (च)] में निर्दिष्ट किसी ऐसी राशि के संबंध में लागू नहीं होगी जो निर्धारिती द्वारा, उस पूर्ववर्ष की बाबत जिसमें राशि देने का दायित्व उक्त रूप में उपगत हुआ था, धारा 139 की उपधारा (1) के अधीन आय की विवरणी देने के लिए उसके मामले में लागू निश्चित तारीख को या उसके पूर्व वास्तव में दे दी गर्इ है और देने का साक्ष्य ऐसी विवरणी के साथ निर्धारिती द्वारा दिया जाता है :
57[परन्तु यह और कि खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक ऐसी राशि धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (vक) के नीचे दिए गए स्पष्टीकरण में परिभाषित निश्चित तारीख को या उसके पूर्व नकद रूप में या चैक या ड्राफ्ट देकर या किसी अन्य ढंग से वास्तव में अदा नहीं की है और जहां ऐसा संदाय नकद से भिन्न ढंग से किया जाता है वहां ऐसी राशि का भुगतान निश्चित तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर हो जाता है।]]
स्पष्टीकरण 58[1].— शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 1983 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्व निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है), जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि अदा करने का दायित्व उपगत किया गया था, धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती, ऐसी राशि की बाबत उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा राशि वास्तव में संदत्त की जाती है, आय की संगणना करने में इस धारा के अधीन कटौती के लिए हकदार नहीं होगा।
59[स्पष्टीकरण 2.—खंड (क) के, जो सब तात्विक समयों पर प्रभावी था, प्रयोजनों के लिए, "किसी संदेय राशि" से अभिप्रेत है वह राशि जिसके लिए निर्धारिती ने पूर्ववर्ष में दायित्व उपगत कर लिया था, चाहे ऐसी राशि सुसंगत विधि के अधीन उस वर्ष में देने योग्य न हो।]
60[61[स्पष्टीकरण 3].—शंकाओं के दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (ग) 62[या खंड (घ)] में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती, उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उससे पहले किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है), जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि अदा करने का दायित्व उपगत किया गया था, धारा 28 में उल्लिखित आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वास्तव में अदा की जाती है, आय की संगणना करने में ऐसी राशि की बाबत इस धारा के अधीन किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।]
63[स्पष्टीकरण 3क.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (ड़) में निर्दिष्ट आय की बाबत कटौती, उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 1996 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या इससे पूर्व के किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है) जिसमें ऐसी राशि अदा करने का दायित्व निर्धारिती द्वारा उपगत किया गया था, धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वास्तव में अदा की जाती है, आय की संगणना में ऐसी राशि की बाबत इस धारा के अधीन किसी कटौती के लिए हकदार नहीं होगा।]
वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से धारा 43ख के स्पष्टीकरण 3क के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण 3ख अन्त:स्थापित किया जाएगा :
स्पष्टीकरण 3ख.—शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस धारा के खंड (च) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत कटौती उस पूर्ववर्ष की (जो 1 अप्रैल, 2001 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या उससे पूर्व के किसी निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है), जिसमें निर्धारिती द्वारा ऐसी राशि अदा करने का दायित्व उपगत किया गया था, धारा 28 में उल्लिखित आय की संगणना करने में अनुज्ञात की जाती है वहां निर्धारिती उस पूर्ववर्ष की, जिसमें उसके द्वारा ऐसी राशि वास्तव में अदा की जाती है, आय की संगणना करने में ऐसी राशि की बाबत इस धारा के अधीन किसी कटौती का हकदार नहीं होगा।
64[स्पष्टीकरण 4.—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,–
(क) "लोक वित्तीय संस्था" का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क65 में उसका है;
66[(कक) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो धारा 11 की उपधारा (5) के खंड (iii) के स्पष्टीकरण में है;]
(ख) "राज्य वित्तीय निगम" से अभिप्रेत है राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम या धारा 46 के अधीन अधिसूचित कोर्इ संस्था;
(ग) "राज्य औद्योगिक विनिधान निगम" से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में कोर्इ 67सरकारी कंपनी, जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने में लगी है और केन्द्रीय सरकार द्वारा 68[धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viii) के अधीन कटौती के लिए पात्र है।]
44. वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।
45. परिपत्र सं. 496, तारीख 25.9.1987 और परिपत्र सं. 674, तारीख 29.12.1993 भी देखिए। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
46. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
47. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से निम्नलिखित खंड (क) के स्थान पर प्रतिस्थापित :
"(क) तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन कर या शुल्क के रूप में निर्धारिती द्वारा संदेय कोर्इ राशि, या"
48. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
49. यथोक्त द्वारा, अंत:स्थापित।
50. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
51. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से अंत:स्थापित।
52. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
52क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से इटैलिक शब्द अंत:स्थापित किए जाएंगे।
53. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा, 1.4.1988 से अंत:स्थापित।
54. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
55. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
56. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
56क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.2002 से इटैलिक शब्द और अक्षर अंत:स्थापित किए जाएंगे।
57. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से निम्नलिखित द्वितीय परंतुक के स्थान पर प्रतिस्थापित :
"परन्तु यह और की कोर्इ कटौती खण्ड (ख) में निर्दिष्ट किसी राशि की बाबत अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसी राशि देय तारीख को या उससे पूर्व, पूर्ववर्ष के दौरान वस्तुत: संदत्त न की गर्इ हो जैसा कि धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (vक) के नीचे स्पष्टीकरण में परिभाषित है।
58. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
59. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित।
60. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
61. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1984 से पुन:संख्यांकित।
62. वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।
63. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अंत:स्थापित।
64. वित्त अधिनियम, 1990 द्वारा 1.4.1991 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पहले वित्त अधिनियम, 1988 द्वारा 1.4.1989 से अन्त:स्थापित और वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1984 से संशोधित स्पष्टीकरण निम्न प्रकार था :
'स्पष्टीकरण 4.–इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "सार्वजनिक वित्तीय संस्था" पद का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 4क में है।'
65. कम्पनी अधिनियम, 1956 की धारा 4क के पाठ के लिए और उसके अधीन अधिसूचित संस्थाओं के लिए देखिए - परिशिष्ट एक।
66. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से प्रतिस्थापित। प्रस्थापन पूर्व वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से अन्त:स्थापित खण्ड (कक) निम्न प्रकार था :
'(कक) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ होगा जो धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) उसका में है।"
67. "सरकारी कंपनी" की परिभाषा के लिए देखिए पूर्व पृष्ठ 1.25 पर पाद टिप्पण 46.
68. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से, "धारा 36 की उपधारा (1) के खण्ड (viii) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित" के स्थान पर प्रतिस्थापित।
[वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा संशोधित रूप में]

