आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 43क

करेंसी की विनिमय दर में परिवर्तनों के परिणामस्वरूप विशेष उपबंध

धारा

धारा संख्या

43क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2012

करेंसी की विनिमय दर में परिवर्तनों के परिणामस्वरूप विशेष उपबंध

करेंसी की विनिमय दर में परिवर्तनों के परिणामस्वरूप विशेष उपबंध

58[करेंसी की विनिमय दर में परिवर्तनों के परिणामस्वरूप विशेष उपबंध

43क. इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निर्धारिती ने अपने कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए भारत से बाहर के किसी देश से किसी पूर्ववर्ष में कोर्इ आस्ति अर्जित की है और ऐसी आस्ति के अर्जन के पश्चात् पूर्ववर्ष के दौरान विनिमय की दर में किसी परिवर्तन के परिणामस्वरूप–

() उस आस्ति की संपूर्ण लागत या उसके किसी भाग का; या

() ऐसी संपूर्ण धनराशियों या उनके किसी भाग का, ब्याज सहित, यदि कोर्इ हो, प्रतिसंदाय करने के लिए, जो विनिर्दिष्टतया उस आस्ति के अर्जन के प्रयोजन के लिए किसी विदेशी करेंसी में किसी व्यक्ति से उसके द्वारा प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: उधार ली गर्इ हैं,

संदाय करते समय भारतीय करेंसी में यथाअभिव्यक्त निर्धारिती का दायित्व (आस्ति के अर्जन के समय विद्यमान दायित्व की तुलना में) बढ़ जाता है या घट जाता है वहां वह रकम, जिससे पूर्वोक्त दायित्व ऐसे पूर्ववर्ष के दौरान इस प्रकार बढ़ा या घटा है और जो निर्धारिती द्वारा अपनार्इ गर्इ लेखा पद्धति को विचार में लिए बिना संदाय करते समय हिसाब में ली गर्इ है–

(i) धारा 43 के खंड (1) में यथापरिभाषित आस्ति की वास्तविक लागत; या

(ii) धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (iv) में निर्दिष्ट पूंजीगत व्यय के प्रकार की रकम; या

(iii) धारा 35क में निर्दिष्ट पूंजीगत व्यय के प्रकार की रकम; या

(iv) धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) में निर्दिष्ट पूंजीगत व्यय के प्रकार की रकम; या

(v) धारा 48 के प्रयोजनों के लिए पूंजी आस्ति के (जो धारा 50 में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति नहीं है) अर्जन की लागत;

में, यथास्थिति, जोड़ दी जाएगी या उसमें से काट ली जाएगी और ऐसे जोड़ने या काटने के पश्चात् परिकलित रकम के बारे में यह माना जाएगा कि वह उस आस्ति की वास्तविक लागत या, यथास्थिति, पूंजीगत व्यय के प्रकार की रकम या यथापूर्वोक्त पूंजी आस्ति के अर्जन की लागत है :

परन्तु यह कि जहां वास्तविक लागत या व्यय अथवा अर्जन की लागत में जोड़ या कटौती इस धारा के अधीन, जैसे कि वह वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा प्रतिस्थापित किए जाने के ठीक पूर्व विद्यमान थी, यथापूर्वोक्त दायित्व के बढ़ जाने या कम हो जाने के कारण की गर्इ है, वहां इस धारा के अधीन वास्तविक लागत या व्यय अथवा अर्जन की लागत में संदाय करते समय, यथास्थिति, जोड़ी जाने वाली रकम या उससे काटी जाने वाली रकम को इस प्रकार समायोजित किया जाएगा कि वास्तविक लागत या व्यय अथवा अर्जन की लागत में, यथास्थिति, जोड़ी जाने वाली या उसमें से काटी जाने वाली कुल रकम संदाय करते समय हिसाब में लिए गए पूर्वोक्त दायित्व के जोड़े जाने या काटे जाने वाली रकम के बराबर हो।

स्पष्टीकरण 1–इस धारा में जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,–

() "विनिमय दर" से भारतीय करेंसी के विदेशी करेंसी में या विदेशी करेंसी के भारतीय करेंसी में संपरिवर्तन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित या मान्य विनिमय की दर अभिप्रेत है;

() "विदेशी करेंसी"59 और "भारतीय करेंसी"59 के वे ही अर्थ हैं जो विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2 में उनके हैं।

स्पष्टीकरण 2–जहां पूर्वोक्त संपूर्ण दायित्व या उसके किसी भाग की पूर्ति निर्धारिती द्वारा नहीं बल्कि प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा की जाती है, वहां इस प्रकार पूरे किए गए दायित्व को इस धारा के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा।

स्पष्टीकरण 3–जहां निर्धारिती ने विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 2 में यथापरिभाषित किसी प्राधिकृत व्यौहारी60 के साथ कोर्इ संविदा, उसे विदेशी करेंसी में एक विनिर्दिष्ट राशि का प्रदाय अनुबद्ध किसी भावी तारीख को या उसके पश्चात् ऐसी विनिमय दर पर करने के लिए की है, जो संविदा में विनिर्दिष्ट हो, जिससे कि वह पूर्वोक्त संपूर्ण दायित्व या उसके किसी भाग की पूर्ति करने में समर्थ हो सके वहां इस धारा के अधीन, यथास्थिति, आस्ति की वास्तविक लागत या पूंजीगत व्यय के प्रकार की रकम या पूंजी आस्ति के अर्जन की लागत में जोड़ी जाने वाली या उसमें से काटी जाने वाली रकम, यदि कोर्इ हो, संविदा में विनिर्दिष्ट राशि के उतने भाग की बाबत जितना पूर्वोक्त दायित्व के निर्वहन के लिए उपलब्ध हो, उसमें विनिर्दिष्ट विनिमय की दर के प्रति निर्देश से संगणित की जाएगी।]

 

58 वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित तथा प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से संशोधित धारा 43क इस प्रकार थी :

'43क. करेंसी की विनिमय दर में परिवर्तनों के परिणामस्वरूप विशेष उपबंध–(1) इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी निर्धारिती ने अपने कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए भारत से बाहर के किसी देश से कोर्इ आस्ति अर्जित की है और ऐसी आस्ति अर्जन के पश्चात् किसी भी समय विनिमय की दर में परिवर्तन के परिणामस्वरूप, उस आस्ति की संपूर्ण लागत या उसके किसी भाग का संदाय करने के लिए, या ऐसे सम्पूर्ण धनों या उनके किसी भाग का प्रतिसंदाय करने के लिए जो विनिर्दिष्टतया उस आस्ति के अर्जन के प्रयोजन के लिए किसी विदेशी करेंसी में किसी व्यक्ति से निर्धारिती द्वारा प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: उधार ली गर्इ है, निर्धारिती का भारतीय करेंसी में यथा अभिव्यक्त दायित्व बढ़ जाता है या घट जाता है (जो दोनों दशाओं में ऐसा दायित्व है जो कि उस तारीख से ठीक पहले विद्यमान हो जिसको विनिमय की दर में परिवर्तन प्रभावी होता है) वहां वह रकम जिससे पूर्वोक्त दायित्व पूर्ववर्ष में इस प्रकार घटा या बढ़ा है, आस्ति की लागत जैसी कि धारा 43 के खंड (1) में यथापरिभाषित है वास्तविक लागत में, या धारा 35 की उपधारा (1) के खंड (iv) में या धारा 35क या धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (ix) में निर्दिष्ट पूंजीगत व्यय के प्रकार के व्यय की रकम में पूंजी की आस्ति की दशा में (जो धारा 50 में निर्दिष्ट पूंजी आस्ति नहीं है), धारा 48 के प्रयोजनों के लिए उसके अर्जन की लागत में, यथास्थिति जोड़ दी जाएगी या उसमें से काट ली जाएगी, और ऐसे जोड़ने या काटने के पश्चात् परिकलित रकम के बारे में यह माना जाएगा कि वह उस आस्ति की वास्तविक लागत या यथास्थिति पूंजीगत व्यय के प्रकार के व्यय की रकम या यथा पूर्वोक्त पूंजी आस्ति के अर्जन की लागत है।

स्पष्टीकरण 1.—इस उपधारा में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,–

() ''विनिमय की दर'' से भारतीय करेंसी के विदेशी करेंसी में या विदेशी करेंसी के भारतीय करेंसी में परिवर्तन के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अवधारित या मान्य विनिमय की दर अभिप्रेत है;

() ''विदेशी करेंसी'' और ''भारतीय करेंसी'' के वे ही अर्थ हैं जो विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (1947 का 7) की धारा 2 में उन्हें क्रमश: दिए गए हैं।

स्पष्टीकरण 2.—जहां संपूर्ण पूर्वोक्त दायित्व या उसके किसी भाग की पूर्ति निर्धारिती द्वारा नहीं बल्कि प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: किसी अन्य व्यक्ति या प्राधिकारी द्वारा की जाती है वहां इस प्रकार पूरे किए गए दायित्व को इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए हिसाब में नहीं लिया जाएगा।

स्पष्टीकरण 3.—जहां निर्धारिती ने विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम, 1947 (1947 का 7) की धारा 2 में यथापरिभाषित किसी प्राधिकृत व्यवहारी के साथ कोर्इ संविदा उसे विदेशी करेंसी में एक विनिर्दिष्ट राशि का प्रदाय, अनुबद्ध भावी तारीख को या उसके पश्चात् ऐसी विनिमय की दर पर करने के लिए है जो संविदा में विनिर्दिष्ट हो जिससे कि वह संपूर्ण पूर्वोक्त दायित्व या उसके किसी भाग की पूर्ति करने में समर्थ हो सके वहां इस उपधारा के अधीन आस्ति की वास्तविक लागत या पूंजीगत व्यय के प्रकार के व्यय की रकम या यथास्थिति पूंजी आस्ति के अर्जन की लागत में जोड़ी जाने वाली या उसमें से काटी जाने वाली रकम, यदि कोर्इ हो, संविदा में विनिर्दिष्ट राशि के इतने भाग की बाबत जितना पूर्वोक्त दायित्व निर्वहन के लिए उपलब्ध हो, उससे विनिर्दिष्ट विनिमय की दर के प्रति निर्देश से संगणित की जाएगी।

(2) धारा 33 के अधीन विकास रिबेट लेखे कटौती के प्रयोजन के लिए किसी आस्ति की वास्तविक लागत की संगणना करने में उपधारा (1) के उपबंधों पर विचार नहीं किया जाएगा।'

59 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 2 के खंड () में "विदेशी करेंसी" की तथा खंड () में "भारतीय करेंसी" की परिभाषा इस प्रकार दी गर्इ है :

'() "विदेशी करेंसी" से भारतीय करेंसी से भिन्न कोर्इ करेंसी अभिप्रेत है;

** ** **

() "भारतीय करेंसी" से ऐसी करेंसी अभिप्रेत है जो भारतीय रुपयों में अभिव्यक्त की गर्इ या लिखी गर्इ है किन्तु इसके अंतर्गत भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की धारा 28क के अधीन जारी किए गए विशेष बैंक नोट और एक रुपए वाले विशेष नोट नहीं हैं;'

60 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम की धारा 2 के खंड () में "प्राधिकृत व्यौहारी" की परिभाषा इस प्रकार दी गर्इ है :

'() "प्राधिकृत व्यौहारी" से ऐसा प्राधिकृत व्यवहारी, मुद्रा प्रवर्तक, अपष्ट बैंककारी इकार्इ या कोर्इ ऐसा अन्य व्यक्ति अभिप्रेत है जो तत्समय विदेशी मुद्रा या विदेशी प्रतिभूतियों का कारबार करने के लिए धारा 10 की उपधारा (1) के अधीन प्राधिकृत है;'

 

 

[वित्त अधिनियम, 2012 द्वारा संशोधित रूप में]

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