जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां
जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां ।
439. (1) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकता है कि-
| (क) | किसी ऐसे व्यक्ति को, जिस पर किसी अपराध का अभियोग है और जो अभिरक्षा में है, जमानत पर छोड़ दिया जाए और यदि अपराध धारा 437 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रकार का है, तो वह ऐसी कोई शर्त जिसे वह उस उपधारा में वर्णित प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे, अधिरोपित कर सकता है ; | |
| (ख) | किसी व्यक्ति को जमानत पर छोड़ने के समय मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित कोई शर्त अपास्त या उपांतरित कर दी जाए : |
परन्तु उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति की, जो ऐसे अपराध का अभियुक्त है जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, या जो यद्यपि इस प्रकार विचारणीय नहीं हैं, आजीवन कारावास से दंडनीय है, जमानत लेने के पूर्व जमानत के लिए आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को उस दशा के सिवाय देगा जब उसकी, ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे यह राय है कि ऐसी सूचना देना साध्य नहीं है ।
90[परंतु यह और कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति की जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की उपधारा (3) या धारा 376कख या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन विचारणीय किसी अपराध का अभियुक्त है, जमानत लेने के पूर्व जमानत के लिए आवेदन की सूचना ऐसे आवेदन की सूचना की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर लोक अभियोजक को देगा ।
(1क) भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की उपधारा (3) या धारा 376कख या धारा 376घक या धारा 376घख के अधीन व्यक्ति को जमानत के लिए आवेदन की सुनवाई के समय इत्तिला देने वाले या उसकी ओर से प्राधिकृत किसी व्यक्ति की उपस्थिति बाध्यकर होगी ।]
(2) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे इस अध्याय के अधीन जमानत पर छोड़ा जा चुका गिरफ्तार करने का निदेश दे सकता है और उसे अभिरक्षा के लिए सुपुर्द कर सकता I

