आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

मुख्य सामग्री पर जाने के लिए यहां क्लिक करें
शब्द आकार
सैचुरेशन
मदद

धारा 40क

कुछ परिस्थितियों में व्यय या भुगतान का कटौती योग्य न होना

धारा

धारा संख्या

40क

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2023

कुछ परिस्थितियों में व्यय या भुगतान का कटौती योग्य न होना

कुछ परिस्थितियों में व्यय या भुगतान का कटौती योग्य न होना

कुछ परिस्थितियों में व्यय या भुगतान का कटौती योग्य न होना

40क. (1) "कारबार या वृति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन आय की संगणना करने से संबंधित इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध में इसके प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी इस धारा के उपबंध प्रभावी होंगे।

(2) () जहां निर्धारिती कोर्इ ऐसा व्यय उपगत करता है जिसकी बाबत इस उपधारा के खण्ड () में उल्लिखित किसी व्यक्ति को भुगतान दिया गया है या दिया जाना है और निर्धारण अधिकारी की राय है कि ऐसा व्यय उस माल, सेवा या सुविधा के, जिसके लिए उसे भुगतान किया गया है, उचित बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए निर्धारिती के कारबार या वृति की वैध जरूरतों या उसके द्वारा उससे प्राप्त या होने वाले फायदे से अधिक या अनुचित है, वहां इस प्रकार उसके द्वारा अधिक या अनुचित समझे गए व्यय की कटौती मान्य नहीं होगी :

परंतु 37[1 अप्रैल, 2016 को या उसके पूर्व प्रारंभ होने वाले किसी निर्धारण वर्ष के लिए] धारा 92खक में उल्लिखित किसी विनिर्दिष्ट देशी संव्यवहार की बाबत किसी ऐसे व्यय के मद्दे, जो उचित बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए अत्यधिक या अयुक्तियुक्त है, मोक को नामंजूर नहीं किया जाएगा, यदि ऐसा संव्यवहार धारा 92च के खंड (ii) में यथापरिभाषित असन्निकट कीमत पर है।

() खण्ड () में उल्लिखित व्यक्ति निम्नलिखित हैं, अर्थात् :—

(i) जहां निर्धारिती एक व्यष्टि है

निर्धारिती का कोर्इ नातेदार;

(ii) जहां निर्धारिती कम्पनी, फर्म, संगम या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है कम्पनी का कोर्इ निदेशक, फर्म का कोर्इ भागीदार, संगम या कुटुम्ब का कोर्इ सदस्य अथवा ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार;

(iii) कोर्इ व्यक्ति जो निर्धारिती के कारबार या वृति में पर्याप्त हित रखता है, या ऐसे व्यक्ति का कोर्इ नातेदार;

(iv) निर्धारिती के कारबार या वृति में पर्याप्त हित रखने वाली कम्पनी, फर्म, व्यक्ति संगम, या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब या ऐसी कम्पनी, फर्म, व्यक्ति संगम या कुटुम्ब का कोर्इ निदेशक, भागीदार या सदस्य अथवा ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार अथवा कारबार या वृति में लगी हुर्इ ऐसी कोर्इ अन्य कंपनी, जिसमें प्रथम वर्णित कंपनी का पर्याप्त हित है;

(v) ऐसी कम्पनी, फर्म, व्यक्तियों के संगम या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब, जिसके, यथास्थिति, निदेशक, भागीदार या सदस्य का निर्धारिती के कारबार या वृत्ति में पर्याप्त हित है अथवा ऐसी कम्पनी, फर्म, संगम या कुटुम्ब का कोर्इ निदेशक, भागीदार या सदस्य अथवा ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य का कोर्इ नातेदार;

(vi) कोर्इ ऐसा व्यक्ति जो कारबार या वृत्ति चलाता है,—

() जहां निर्धारिती का, जो व्यष्टि है या ऐसे निर्धारिती के किसी नातेदार का, उस व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में पर्याप्त हित है; या

() जहां निर्धारिती का, जो कम्पनी, फर्म, व्यक्तियों का संगम, या हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब है अथवा ऐसी कम्पनी के किसी निदेशक, ऐसी फर्म के किसी भागीदार, या ऐसे संगम या कुटुम्ब के किसी सदस्य का, अथवा, ऐसे निदेशक, भागीदार या सदस्य के किसी नातेदार का, उस व्यक्ति के कारबार या वृत्ति में पर्याप्त हित है।

स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए किसी व्यक्ति के बारे में यह समझा जाएगा कि उसका किसी कारबार या वृत्ति में पर्याप्त हित है, यदि,—

() ऐसी दशा में, जहां वह कारबार या वृत्ति किसी कम्पनी द्वारा चलार्इ जाती है, ऐसा व्यक्ति पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय, ऐसे शेयरों का जो (लाभांश की नियत दर के हकदार शेयर न होते हुए चाहे वे लाभों में भाग लेने के अधिकार के सहित या उससे रहित हों) कम से कम बीस प्रतिशत मतदान शक्ति रखने वाले हैं, हिताधिकारी स्वामी है; और

() किसी अन्य दशा में, ऐसा व्यक्ति पूर्ववर्ष के दौरान किसी भी समय, ऐसे कारबार या वृत्ति के लाभों के कम से कम बीस प्रतिशत के हिताधिकारी रूप में हकदार है।

(3) जहां निर्धारिती कोर्इ ऐसा व्यय उपगत करता है जिसकी बाबत किसी व्यक्ति को एक दिन में किया गया संदाय या कुल संदाय जो 38[दस हजार रुपये से अधिक राशि के बैंक पर लिखे पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट या किसी बैंक खाते के माध्यम से 38क[या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक पद्धति के माध्यम से, जो विहित की जाए] भिन्न] रूप में किया जाता है, वहां ऐसे व्यय की बाबत कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(3क) जहां निर्धारिती द्वारा किसी व्यय के लिए उपगत किसी दायित्व की बाबत किसी वर्ष के निर्धारण में मोक अनुज्ञात किया गया है और बाद में किसी पूर्ववर्ष के दौरान (जिसे इसमें इसके पश्चात् पश्चात्वर्ती वर्ष कहा गया है) निर्धारिती उसकी बाबत संदाय, जो बैंक पर लिखे पाने वाले के खाते में देय चैक से या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट 39[या किसी बैंक खाते के माध्यम से 38क[या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक पद्धति के माध्यम से, जो विहित की जाए] भिन्न] रूप में किया जाता है, करता है, वहां इस प्रकार किया गया संदाय कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ समझे जाएंगे और यदि किसी दिन व्यक्ति को किया गया संदाय या कुल संदाय 40[दस] हजार रुपये से अधिक हो जाता है तो वह तद्नुसार पश्चात्वर्ती वर्ष की आय के रूप में आय&कर से प्रभार्य होगा :

परंतु जहां किसी दिन किसी व्यक्ति को 40क[दस हजार रुपए से अधिक राशि के बैंक पर लिखे पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट या किसी बैंक खाते के माध्यम से 40ख[या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक पद्धति के माध्यम से, जो विहित की जाए] भिन्न] वहां ऐसे मामलों में और ऐसी परिस्थितियों के अधीन, जो विहित की जाएं, उपलब्ध बैंककारी सेवाओं की प्रकृति और सीमा, कारबार की समीचीनता के परिणामों तथा अन्य सुसंगत कारकों को ध्यान में रखते हुए कोर्इ अन्य अमोक नहीं दिया जाएगा और किसी भी संदाय को उपधारा (3) तथा इस उपधारा के अधीन कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ नहीं समझा जाएगा :

परंतु यह और कि माल वाहनों को चलाने, भाड़े पर देने या पट्टे पर देने के लिए किए गए संदाय की दशा में उपधारा (3) और उपधारा (3क) के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "40[दस] हजार रुपए" शब्दों के स्थान पर "पैंतीस हजार रुपए" शब्द रखे गए हों।

(4) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या किसी संविदा में किसी बात के होते हुए भी, जहां किसी व्यय की बाबत कोर्इ संदाय किसी बैंक पर लिखे गए अकाउन्ट पेयी चैक द्वारा या अकाउन्ट पेयी बैंक ड्राफ्ट 41[या किसी बैंक खाते के माध्यम से 41क[इलैक्ट्रानिक निकासी पद्धति के उपयोग]] द्वारा इसलिए किया जाना हो कि वह उपधारा (3) के अधीन कटौती के रूप में अननुज्ञात किया जा सके, वहां वह संदाय ऐसे चैक या ड्राफ्ट 41[या बैंक ड्राफ्ट या किसी बैंक खाते के माध्यम से इलैक्ट्रानिक निकासी पद्धति] 41क[या ऐसी इलैक्ट्रानिक पद्धति, जो विहित की जाए] द्वारा किया जा सकेगा; और जहां भुगतान ऐसे किया जाता है या प्रस्तुत किया जाता है वहां किसी व्यक्ति को किसी वाद या अन्य कार्यवाही में इस आधार पर अभिवचन न करने दिया जाएगा कि संदाय नकद रूप में या किसी अन्य रीति से नहीं किया गया था या प्रस्तुत नहीं किया गया था।

(5) [प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। मूल उपधारा (5), वित्त (सं. 2) अधिनियम,1971 द्वारा 1.4.1972 से अन्त:स्थापित की गर्इ थी।]

(6) [प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से लोप किया गया। मूल उपधारा (6), वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।]

(7) () खंड () के उपबंधों के अधीन रहते हुए, निर्धारिती द्वारा अपने कर्मचारियों को उनकी सेवानिवृत्ति पर या किसी कारणवश उनके नियोजन की समाप्ति पर उपदान के संदाय के लिए किए गए किसी उपबन्ध की बाबत (चाहे इस नाम से या किसी और नाम से ज्ञात हो) कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

() खंड () की कोर्इ बात निर्धारिती द्वारा अनुमोदित उपदान निधि के मद्दे किसी अंशदान के रूप में किसी राशि के संदाय के प्रयोजनार्थ या किसी उपदान के संदाय के प्रयोजनार्थ, जो पूर्ववर्ष के दौरान संदेय हो गर्इ है, की गर्इ किसी व्यवस्था के संबंध में लागू नहीं होगी।

स्पष्टीकरण.—शंकाओं को दूर करने के लिए, यह घोषित किया जाता है कि जहां निर्धारिती द्वारा अपने कर्मचारियों को उनके सेवानिवृत्ति होने पर या किसी कारणवश उनके नियोजन के पर्यवसान पर उपदान के संदाय के लिए की गर्इ किसी व्यवस्था को किसी निर्धारण वर्ष के लिए निर्धारिती की आय की संगणना करने में कटौती के रूप में अनुज्ञात किया गया है वहां ऐसी व्यवस्था में से अनुमोदित उपदान निधि के संबंध में उपदान के रूप में संदत्त कोर्इ राशि, उस पूर्ववर्ष के, जिसमें ऐसी राशि इस प्रकार संदत्त की जाती है, निर्धारिती की आय की संगणना करने में कटौती के रूप में अनुज्ञात नहीं की जाएगी।

(8) [***]

(9) निर्धारिती द्वारा नियोजक के रूप में किसी प्रयोजन के लिए किसी निधि, न्यास, कंपनी, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1860 (1860 का 21) के अधीन रजिस्ट्रीकृत सोसाइटी या अन्य संस्था की स्थापना के लिए या उसके बनाने के लिए या उसमें अभिदाय के रूप में संदत्त किसी राशि की बाबत कोर्इ कटौती तभी अनुज्ञात की जाएगी जब ऐसी राशि धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (iv) या खंड (ivक) या खंड (v) द्वारा या उसके अधीन उपबंधित अथवा उस समय लागू किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन अपेक्षित प्रयोजनों के लिए और उस तक इस प्रकार अदा की जाती है।

(10) उपधारा (9) में किसी बात के होते हुए भी, जहां निर्धारण अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि उस उपधारा में निर्दिष्ट निधि, न्यास, कम्पनी, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, सोसाइटी या अन्य संस्था ने 1 मार्च, 1984 के पूर्व उस उपधारा में निर्दिष्ट राशि में से कोर्इ व्यय पूर्णत: और भागत: उस उपधारा (9) में निर्दिष्ट निर्धारिती के कर्मचारियों के कल्याण के लिए सद्भावपूर्वक किया है या किया गया है (जो पूंजीगत व्यय के प्रकार का व्यय नहीं है) वहां ऐसे व्यय की रकम को, उस दशा में जिसमें निर्धारिती को ऐसी राशि के बारे में कोर्इ कटौती अनुज्ञात नहीं की गर्इ है तथा इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस पूर्ववर्ष से जिसमें ऐसा व्यय इस प्रकार उपगत किया गया है, निर्धारिती की धारा 28 में निर्दिष्ट आय की संगणना करने में कटौती की जाएगी मानो व्यय निर्धारिती द्वारा उपगत, या किया गया व्यय हो।

(11) जहां निर्धारिती ने 1 मार्च, 1984 के पूर्व उपधारा (9) में निर्दिष्ट किसी निधि, न्यास, कंपनी, व्यक्ति, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, सोसाइटी या अन्य संस्था को कोर्इ राशि संदत्त की है, वहां किसी अन्य विधि या किसी लिखत में किसी बात के होते हुए भी, वह—

(i) यह दावा करने का हकदार होगा कि उसे उतनी रकम का, जो ऐसी निधि, न्यास, कंपनी, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, सोसाइटी या अन्य संस्था द्वारा उपगत या व्यय नहीं की गर्इ है (ऐसी रकम को इसमें इसके पश्चात् अप्रयुक्त रकम कहा गया है), लौटार्इ जाये और जहां इस प्रकार दावा किया जाता है वहां अप्रयुक्त रकम यथाशीघ्र उसे लौटार्इ जाएगी;

(ii) यह दावा करने का हकदार होगा कि ऐसी आस्ति, जो भूमि, भवन, मशीनरी, संयंत्र, या फर्नीचर है, और जो निर्धारिती द्वारा संदत्त राशि से निधि, न्यास, कंपनी, व्यक्ति-संगम, व्यष्टि-निकाय, सोसाइटी या अन्य संस्था द्वारा अर्जित या सन्निर्मित है, उसे अन्तरित कर दी जाए, और जहां इस प्रकार दावा किया जाता है वहां ऐसी आस्ति यथाशीघ्र उसे अन्तरित कर दी जाएगी।

(12) [वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से लोप किया गया।]

42[(13) किसी चिन्हित बाजार हानि या अन्य संभावित हानि के संबंध में, धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (xviii) के अधीन अनुज्ञेय के सिवाय कोर्इ कटौती या मोक अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।]

 

37. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

38. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से "बीस हजार रुपए से अधिक राशि के बैंक पर लिखे पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट से भिन्न" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

38क. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "इलैक्ट्रानिक निकासी पद्धति के उपयोग से" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

39. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

40. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से "बीस" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

40क. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से "बीस हजार रुपए से अधिक राशि के बैंक पर लिखे पाने वाले के खाते में देय चेक या पाने वाले के खाते में देय बैंक ड्राफ्ट से भिन्न" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

40ख. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से "इलैक्ट्रानिक निकासी पद्धति के उपयोग से" शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

41. वित्त अधिनियम, 2017 द्वारा 1.4.2018 से अंत:स्थापित।

41क. वित्त (सं.2) अधिनियम, 2019 द्वारा 1.4.2020 से अंत:स्थापित।

42. वित्त अधिनियम, 2018 द्वारा भूतलक्षी प्रभाव से 1.4.2017 से अंत:स्थापित।

 

 

 

[वित्त अधिनियम, 2023 द्वारा संशोधित रूप में]

फ़ुटनोट