साधारण
साधारण
1337.14(1) 15कोर्इ ऐसा व्यय16 (जो धारा 30 से धारा 36 तक 17[* * *] में वर्णित प्रकार का व्यय नहीं है और जो पूंजीगत व्यय18 के प्रकार का या निर्धारिती का वैयक्तिक व्यय नहीं है) जो कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए 18पूर्णत: और अनन्यत: 18उपगत या किया गया है "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय की संगणना करने में अनुज्ञात किया जाएगा।
19[स्पष्टीकरण.—शंकाओं को दूर करने के लिए घोषित किया जाता है कि निर्धारिती द्वारा किसी प्रयोजन के लिए किया गया व्यय जो अपराध है या विधि द्वारा निषिद्ध है, कारबार या वृत्ति के लिए किया गया नहीं समझा जाएगा और ऐसे व्यय की बाबत कोर्इ कटौती या मोक अनुज्ञात नहीं किया जाएगा।]
(2) 20[* * *]
21[22(2ख) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी किसी राजनैतिक दल द्वारा प्रकाशित स्मारिका, विवरणिका, ट्रैस्ट, पुस्तिका या इसी प्रकार के अन्य प्रकाशनों में विज्ञापन पर किसी निर्धारिती द्वारा उपगत व्यय की बाबत कोर्इ मोक नहीं दिया जाएगा।]
(3) 23[* * *]
(3क) 24[* * *]
(3ख) 25[* * *]
(3ग) 26[* * *]
(3घ) 27[* * *]
(4) 28[* * *]
(5) 29[* * *]
13. फीचर फिल्मों के निर्माण पर व्यय/फिल्म के वितरण अधिकार प्राप्त करने पर व्यय की बाबत कटौती की संगणना करने के लिए देखिये नियम 9क और 9ख.
14. ये भी देखिये - पत्र [फा.सं. 27(30)-आर्इ.टी./59], तारीख 6.7.1959, पत्र [फा.सं. 9/54/64-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 2.9.1964, पत्र [फा. सं. 9/56/66-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 17.1.1967, पत्र [फा.सं. 9/23/67- आर्इ.टी.(ए-1)], तारीख 6.7.1967, परिपत्र सं. 5-पी (XIV-I), तारीख 28.9.1963, पत्र [फा.सं. 10/67/65- आर्इ.टी.(ए-1)], तारीख 26.8.1965, परिपत्र सं. 16, तारीख 18.9.1969, परिपत्र सं. 64 (XI-2), तारीख 27.1.1951, परिपत्र सं. 117, तारीख 22.8.1973, पत्र [फा. सं. 10/25/63-आर्इ.टी.(ए-1)], तारीख 18.6.1964, पत्र [फा. सं. 204/42/77-आर्इ.टी.(ए-II)], तारीख 28.9.1977, परिपत्र सं. 1-डी (IV-53), तारीख 20.1.1966, परिपत्र सं. 2, तारीख 8.3.1946, पत्र [फा.सं. 35/5/65-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 1.7.1965, परिपत्र सं. 69 (XIX-3), तारीख 27.11.1951, परिपत्र सं. 4, तारीख 19.6.1950, पत्र [फा. सं. 10/80/64-आर्इ.टी.(ए-1)], तारीख 26.2.1965, पत्र [फा.सं. 10/92/64-आर्इ.टी.(ए-1)], तारीख 13.9.1965, परिपत्र सं. 3, तारीख 26.3.1946, परिपत्र सं. 22, तारीख 23.6.1943, पत्र [फा.सं. 10/16/63-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 14.5.1963, पत्र [फा. सं. 10/8/63-आर्इ.टी.(ए-1)], तारीख 14.10.1963, पत्र [फा.सं. 27(24), आर्इ.टी./59], तारीख 19.5.1959, पत्र [फा.सं. 7/33/62-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 28.8.1963, परिपत्र सं. 2-पी. (XI-6), तारीख 23.8.1965, पत्र [फा.सं. 13क/20/68-आर्इ.टी.(ए-II)], तारीख 3.10.1968, पत्र [फा.सं. 32/6/62-आर्इ.टी. (ए-1)], तारीख 16.1.1963, सी.डी.टी.ए.सी. की 2.2.1972 को हुर्इ 16वीं बैठक के कार्यवृत्त का अंश, अनुदेश सं. 943 [फा.सं. 204/15/76-आर्इ.टी. (ए-II)], तारीख 2.4.1976, परिपत्र सं. 420, तारीख 4.6.1985, परिपत्र सं. 2(40)/66-र्इ.ए.सी., तारीख 16/17-1-1967 जो वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी किया गया था, परिपत्र सं. 42 [सी.सं. 19(7)-आर्इ.टी./42], तारीख 22.8.1942, परिपत्र सं. 36 [आर.डिस्क.सं. 54 (13) आर्इ.टी./43], तारीख 24.11.1943, परिपत्र सं. 48 [सी.सं. 19(22)-आर्इ.टी./42], तारीख 16.10.1942, परिपत्र सं. 192, तारीख 10.3.1976, परिपत्र सं. 316, तारीख 30.9.1981, बोर्ड का परिपत्र सं. 10/22/65-आर्इ.टी. (ए-1), तारीख 24.5.1965, परिपत्र सं. 651, तारीख 11.6.1993, परिपत्र सं. 671, तारीख 27.10.1993 और प्रैस रिलीज़, तारीख 23.1.2001, अनुदेश सं. 12/2006, तारीख 14.12.2006 और परिपत्र सं. 6/2007, तारीख 11.10.2007.
ब्यौरे के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
15. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
16. 'व्यय' पद के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
17. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से शब्दों "और धारा 80फफ" का, जो कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1975 द्वारा 1.4.1976 से अन्त:स्थापित किए गए थे, लोप किया गया।
18. "पूंजीगत व्यय", "पूर्णत: और अनन्यत:" तथा "कारबार के प्रयोजनों के लिए" पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.
19. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1998 द्वारा 1.4.1962 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।
20. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से लोप किया गया। लोप की गर्इ उपधारा (2), वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से उपधारा (2) और (2क) के स्थान पर रखी गर्इ थी। पूर्ववर्ती उपधारा (2) और (2क) वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1962 द्वारा 1.4.1962 से, वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से, कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.10.1967 से, वित्त अधिनियम, 1968 द्वारा 1.4.1968 से, वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से, वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से और वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1976/ 1.4.1984 से संशोधित की गर्इ थी। लोप किए जाने से पूर्व उपधारा (2), जो वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1993 से प्रतिस्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1993 से भूतलक्षी प्रभाव से संशोधित की गर्इ थी, इस प्रकार थी :
'(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, किसी निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 1992 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले किसी पूर्ववर्ष के दौरान उपगत सत्कार व्यय के प्रकार का कोर्इ व्यय, निम्नलिखित रूप में अनुज्ञात किया जाएगा:
(क) जहां ऐसे व्यय की रकम दस हजार रुपए से अधिक नहीं है, वहां ऐसी सम्पूर्ण रकम;
(ख) किसी अन्य दशा में दस हजार रुपए धन दस हजार रुपए से अधिक ऐसे व्यय के पचास प्रतिशत के बराबर राशि।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए "सत्कार व्यय" के अन्तर्गत है—
(i) निर्धारिती द्वारा किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति को संदत्त सत्कार भत्ते के प्रकार के किसी भत्ते की रकम;
(ii) किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा निर्धारिती के कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए उपगत सत्कार व्यय के [जो खंड (i) में निर्दिष्ट प्रकार के भत्ते में से उपगत व्यय नहीं है] प्रकार के किसी व्यय की रकम ;
(iii) निर्धारिती द्वारा किसी व्यक्ति के लिए किसी भी प्रकार के आतिथ्य की व्यवस्था के लिए व्यय, चाहे वह भोजन या सुपेय की व्यवस्था के रूप में हो या किसी भी अन्य रीति से हो तथा चाहे ऐसी व्यवस्था व्यापार की किसी अभिव्यक्त या विवक्षित संविदा या रूढ़ि या प्रथा के कारण की गर्इ हो, या अन्यथा, किंतु इसके अंतर्गत निर्धारिती द्वारा अपने कर्मचारियों को कार्यालय, कारखाने या उनके कार्य के किसी अन्य स्थान पर दिए गए भोजन या सुपेय पर उपगत व्यय नहीं है।'
21. कराधान विधि (संशोधन) अधिनियम 1978, द्वारा 1.4.1979 से अंत:स्थापित। मूलत: उपधारा, वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अंत:स्थापित की गर्इ थी, जिसका बाद में वित्त अधिनियम, 1976 द्वारा 1.4.1977 से लोप किया गया था।
22. देखिए परिपत्र संख्या 203, तारीख 16.7.1976, परिपत्र सं. 200, तारीख 28.6.1976 और परिपत्र सं. 19, तारीख 13.6.1969. ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।
23. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से लोप किया गया। इसके लोप से पूर्व, उपधारा (3), जो वित्त अधिनियम, 1964 द्वारा 1.4.1964 से अंत:स्थापित की गर्इ थी, निम्न प्रकार थी :
"(3) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी निर्धारिती द्वारा 31 मार्च, 1964 के पश्चात् विज्ञापन पर या किसी निवास-स्थान के बनाए रखने पर, जिसके अंतर्गत अतिथि-गृह के प्रकार की कोर्इ वास-सुविधा भी है अथवा किसी कर्मचारी या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यात्रा के संबंध में (जिसके अंतर्गत ऐसे होटल-व्यय अथवा भत्ते भी हैं जो ऐसी यात्रा के संबंध में संदत्त किए गए हों) उपगत कोर्इ, व्यय केवल उस परिणाम तक तथा ऐसी शर्तों के, यदि कोर्इ हो,ं अधीन रहते हुए, जैसी विहित की जाएं, अनुज्ञात किया जाएगा।"
24. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से लोप किया गया। लोप की गर्इ उपधारा (3क) वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा, 1.4.1984 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।
मूल उपधारा वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से उसका लोप किया गया था।
25. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से लोप किया गया। लोप की गर्इ उपधारा (3ख) वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।
मूल उपधारा वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से उसका लोप किया गया था।
26. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से लोप किया गया। लोप की गर्इ उपधारा (3ग) वित्त अधिनियम 1983 द्वारा 1.4.1984 से अन्त:स्थापित की गर्इ थी।
मूल उपधारा, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से अंत:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से उसका लोप किया गया था।
27. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1986 से लोप किया गया। लोप की गर्इ उपधारा (3घ) वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1984 से अंत:स्थापित की गर्इ थी।
मूल उपधारा, वित्त अधिनियम, 1978 द्वारा 1.4.1979 से अन्त:स्थापित की गर्इ थी और बाद में वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से उसका लोप किया गया था।
28. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से लोप किया गया। इसके लोप से पहले वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1970 से अन्त:स्थापित उपधारा (4) निम्न प्रकार थी :
'(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) में किसी बात के होते हुए भी,—
(i) अतिथि गृह के प्रकार के किसी निवास स्थान को (ऐसे निवास स्थान को इस उपधारा में इसके पश्चात् "अतिथि गृह" कहा गया है) बनाये रखने पर निर्धारिती द्वारा 28 फरवरी, 1970 के पश्चात् उपगत किसी व्यय की बाबत कोर्इ मोक नहीं दिया जाएगा;
(ii) 1 अप्रैल, 1971 से प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी बाद के निर्धारण वर्ष के संबंध में कोर्इ मोक, अतिथि गृह के रूप में उपयोग में लाए गए किसी भवन के अवक्षयण या अतिथि गृह में ही किन्हीं आस्तियों के अवक्षयण की बाबत, नहीं दिया जाएगा :
परन्तु इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए खंड (i) में निर्दिष्ट व्यय तथा खंड (ii) में निर्दिष्ट अवक्षयण की रकम के योग में से ऐसी रकम, यदि कोर्इ हो, घटा दी जाएगी, जो अतिथि गृह का उपयोग करने वाले व्यक्तियों से प्राप्त हुर्इ हो:
परन्तु यह और कि इस उपधारा की कोर्इ बात अवकाश गृह के रूप में बनाये रखे अतिथि गृह को लागू न होगी, यदि वह अतिथि गृह–
(क) ऐसे निर्धारिती द्वारा बनाए रखा जाता है जिसने अपने द्वारा किए जाने वाले कारबार या वृत्ति में पूर्ववर्ष भर एक सौ से अन्यून पूर्णकालिक कर्मचारी नियोजित रखे हों;
(ख) ऐसे कर्मचारी के छुट्टी जाने पर उनके द्वारा अनन्य उपयोग के लिए आशयित हो।
स्पष्टीकरण.–इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए,–
(i) अतिथि गृह के प्रकार के निवास स्थान के अन्तर्गत ऐसा स्थान भी होगा जो निर्धारिती ने किसी होटल में पूर्ववर्ष के दौरान एक सौ बयासी दिन से अधिक की कालावधि के लिए भाड़े पर लिया हो या आरक्षित कराया हो; और
(ii) अतिथि गृह के रखरखाव पर व्यय के अन्तर्गत, उस दशा में जब निवास-स्थान निर्धारिती ने भाड़े पर लिया हो, उस स्थान की बाबत दिया गया किराया भी होगा।'
29. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से लोप किया गया। इसके लोप से पूर्व उपधारा (5), जो वित्त अधिनियम, 1983 द्वारा 1.4.1979 से भूतलक्षी प्रभाव से अन्त:स्थापित की गर्इ थी, निम्न प्रकार थी:
"(5) शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि कोर्इ वास-सुविधा जो किसी भी नाम से ज्ञात हो और जो निर्धारिती द्वारा उस स्थान पर, जहां ऐसी वास सुविधा स्थित है, दौरे पर या निरीक्षण के लिए आने वाले किसी व्यक्ति के लिए (जिसके अन्तर्गत कोर्इ कर्मचारी या जहां निर्धारिती कोर्इ कंपनी है वहां कंपनी का कोर्इ निदेशक या उसमें कोर्इ अन्य पदधारी भी है) आवास या भोजन और आवास की व्यवस्था के प्रयोजन के लिए रखी गर्इ है, भाड़े पर ली गर्इ है, आरक्षित की गर्इ या उसका अन्यथा इंतजाम किया गया है, उपधारा (4) के अर्थ में अतिथि गृह जैसी वास-सुविधा है।"
[वित्त (सं. 2) अधिनियम, 2009 द्वारा संशोधित रूप में]

