अनुभाग 148 का संशोधन
धारा 148 का संशोधन
36. आय-कर अधिनियम की धारा 148 की उपधारा (1) में,-
(i) निम्नलिखित परंतुक अंतःस्थापित किए जाएंगे और 1 अक्तूबर, 1991 से अंतःस्थापित किए गए समझे जाएंगे, अर्थात् :-
'परंतु यह कि ऐसे किसी मामले में,-
(क) जहां कि इस धारा के अधीन तामील की गई किसी सूचना के उत्तर में 1 अक्तूबर, 1991 को प्रारंभ होने वाली और 30 सितंबर, 2005 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान कोई विवरणी दी गई है ; और
(ख) तत्पश्चात् धारा 143 की उपधारा (2) के अधीन किसी सूचना की, धारा 143 की उपधारा (2) के परंतुक में, जैसे कि वह वित्त अधिनियम, 2002 (2002 का 20) द्वारा उक्त उपधारा का संशोधन किए जाने से ठीक पूर्व विद्यमान था, विनिर्दिष्ट बारह मास के अवसान के पश्चात् किंतु धारा 153 की उपधारा (2) में यथाविनिर्दिष्ट निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्संगणना करने की समय-सीमा के अवसान से पूर्व, तामील की गई है, वहां इस खंड में निर्दिष्ट प्रत्येक ऐसी सूचना को विधिमान्य सूचना समझा जाएगा :
परंतु यह और कि ऐसे किसी मामले में, -
(क) जहां कि इस धारा के अधीन तामील की गई किसी सूचना के उत्तर में 1 अक्तूबर, 1991 को प्रारंभ होने वाली और 30 सितंबर, 2005 को समाप्त होने वाली अवधि के दौरान कोई विवरणी दी गई है, और
(ख) तत्पश्चात् धारा 143 की उपधारा (2) के खंड (ii) के अधीन किसी सूचना की, धारा 143 की उपधारा (2) के खंड (ii) के परन्तुक विनिर्दिष्ट बारह मास के अवसान के पश्चात् किंतु धारा 153 की उपधारा (2) में यथाविनिर्दिष्ट निर्धारण, पुनर्निर्धारण या पुनर्संगणना करने की समय-सीमा के अवसान से पूर्व, तामील की गई है, वहां इस खंड में निर्दिष्ट प्रत्येक ऐसी सूचना को विधिमान्य सूचना समझा जाएगा । ';
(ii) खंड (i) द्वारा इस प्रकार अंतःस्थापित किए गए दूसरे परंतुक के पश्चात् निम्नलिखित स्पष्टीकरण अंतःस्थापित किया जाएगा और 1 अक्तूबर, 2005 से अंतःस्थापित किया गया समझा जाएगा, अर्थात् :-
"स्पष्टीकरण-शंकाओं को दूर करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि पहले परंतुक या दूसरे परंतुक में की कोई भी बात, इस धारा के अधीन तामील की गई किसी सूचना के उत्तर में 1 अक्तूबर, 2005 को या उसके पश्चात् दी गई विवरणी को लागू नहीं होगी ।"।
[वित्त अधिनियम, 2006]

