आयकर विभाग

वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

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धारा 36

अन्य कटौती

धारा

धारा संख्या

36

अध्याय शीर्षक

अध्याय IV - कुल आय की गणना

अधिनियम

आय-कर अधिनियम, 1961

वर्ष

2002

अन्य कटौती

अन्य कटौती

अन्य कटौतियां

4136. (1) धारा 28 में निर्दिष्ट आय संगणित करने में ऐसी कटौतियां, जो निम्नलिखित खंडों में उपबंधित हैं, उनमें वर्णित मामलों की बाबत अनुज्ञात की जाएंगी—

42(i) कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त स्टाक या स्टोरों43 के नुकसान43 या विनाश43 के जोखिम के विरुद्ध बीमे की बाबत दी गर्इ किसी प्रीमियम की रकम;

44[(iक) किसी परिसंघ दुग्ध सहकारी सोसाइटी द्वारा सहकारी सोसाइटी के किसी सदस्य के स्वामित्वाधीन पशुओं के जीवन का बीमा कराने या उसे प्रवृत्त रखने की बाबत संदत्त प्रीमियम की रकम, जहां वह सहकारी सोसाइटी अपने सदस्यों द्वारा उत्पादित दूध का प्रदाय उस परिसंघ दुग्ध सहकारी सोसाइटी को करने में लगी हुर्इ प्राथमिक सोसाइटी है;]

45[(iख) निर्धारिती द्वारा नियोजक के रूप में, साधारण बीमा कारबार (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972 (1972 का 57) की धारा 9 के अधीन बनाए गए भारतीय साधारण बीमा निगम द्वारा इस निमित्त बनार्इ गर्इ और केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित स्कीम के अधीन अपने कर्मचारियों के स्वास्थ्य का बीमा कराने या उसे प्रवृत्त रखने के लिए चैक द्वारा दी गर्इ प्रीमियम की रकम;]

46(ii) की गर्इ सेवाओं के लिए बोनस या कमीशन47 के रूप में किसी कर्मचारी को संदत्त कोर्इ राशि, जहां ऐसी राशि उसको लाभ या लाभांश के रूप में संदेय न हुर्इ होती यदि वह बोनस या कमीशन47 के रूप में संदत्त न की गर्इ होती;

48[* * *]

49[* * *]

(iiक) 50[वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से लोप किया गया।]

51(iii) कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए उधार ली गर्इ पूंजी52 की बाबत दिए गए ब्याज52 की रकम।

स्पष्टीकरण.–पारस्परिक फायदा सोसाइटियों में, जो ऐसी शर्तें पूरी करती हैं जो विहित की जाएं, शेयरधारकों या अभिदायकर्ताओं द्वारा समय-समय पर दिए गए आवर्ती अभिदाय इस खंड के अर्थ में उधार ली गर्इ पूंजी समझे जाएंगे;

51(iv) 53किसी मान्यताप्राप्त भविष्य निधि या किसी अनुमोदित अधिवार्षिकी निधि के लिए अभिदाय के तौर पर नियोजक के रूप में निर्धारिती द्वारा संदत्त कोर्इ राशि,54 ऐसी परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो यथास्थिति, भविष्य निधि को मान्यता देने या अधिवार्षिकी निधि को अनुमोदित करने के लिए विहित की जाए और ऐसी शर्तों55 के अधीन रहते हुए, जैसी बोर्ड उन दशाओं में विनिर्दिष्ट करना ठीक समझे जिनमें अभिदाय नियत रकमों के वार्षिक अभिदायों के "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय या अभिदायों या निधि के सदस्यों की संख्या के निर्देश में किसी निश्चित आधार पर नियत वार्षिक अभिदायों के प्रकार के नहीं है;

56(v) 57अप्रतिसंहरणीय न्यास के अधीन अपने कर्मचारियों के अनन्य फायदे के लिए अपने द्वारा सृष्ट किसी अनुमोदित उपदान निधि में अभिदाय के तौर पर नियोजक के रूप में निर्धारिती द्वारा संदत्त कोर्इ राशि54;

58[(vक) निर्धारिती द्वारा अपने किसी कर्मचारी से, जिसको धारा 2 के खंड (24) के उपखंड (x) के उपबंध लागू होते हैं, प्राप्त कोर्इ राशि यदि ऐसी राशि निर्धारिती द्वारा निश्चित तारीख को या उसके पूर्व सुसंगत निधि या निधियों में कर्मचारी के खाते में जमा की जाती है।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, ''निश्चित तारीख'' से वह तारीख अभिप्रेत है जिस तक निर्धारिती से यह अपेक्षित है कि वह नियोजक के रूप में कर्मचारी के अभिदाय को किसी अधिनियम, नियम, आदेश या उसके अधीन या किसी स्थायी आदेश, अधिनिर्णय, सेवा संविदा के अधीन या अन्यथा निकाली गर्इ अधिसूचना के अधीन कर्मचारी के सुसंगत निधि के खाते में जमा करे;]

59(vi) ऐसे जीव-जन्तुओं की बाबत जो व्यापार-स्टाक के रूप में प्रयुक्त किए जाने से अन्यथा कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त किए गए हैं और मर गए हैं या ऐसे प्रयोजनों के लिए स्थायी रूप से बेकार हो गए हैं, निर्धारिती को जीव-जन्तुओं की वास्तविक लागत और जीव-जंतुओं के शवों की बाबत प्राप्त रकम का, यदि कोर्इ हो, अंतर;

60(vii) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन 61[किसी ऐसे डूबंत62 ऋण की रकम या उसका भाग जो पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती के लेखाओं में अवसूलीय रकम के रूप में बट्टे खाते डाल दिया गया है]:

63[परन्तु ऐसे किसी 64[निर्धारिती] की दशा में जिसको खंड (viiक) लागू होता है ऐसे किसी ऋण या उसके भाग के संबंध में कटौती की रकम की सीमा वह रकम होगी जिससे ऐसा ऋण या उसका भाग उस खंड के अधीन डूबंत और शंकास्पद ऋणों के लिए की गर्इ व्यवस्था लेखा में जमा अतिशेष से अधिक है।]

64क[स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए निर्धारिती के लेखा में अवसूलनीय रूप में बट्टे खाते डाले गए डूबंत ऋण या उसके किसी भाग में निर्धारिती के लेखा में डूबंत और शंकास्पद ऋणों के लिये कोर्इ व्यवस्था नहीं होगी;]

65[(viiक) 66[67डूबंत और शंकास्पद ऋणों के लिए की गर्इ व्यवस्था की बाबत—

() जहां ऐसी व्यवस्था किसी ऐसे अनुसूचित बैंक द्वारा की जाती है, [जो 68[* * *] भारत के बाहर किसी देश की विधि द्वारा या उसके अधीन निगमित बैंक नहीं है] या गैर-अनुसूचित बैंक द्वारा की जाती है, वहां कुल आय (इस खंड और अध्याय 6क के अधीन कटौती करने के पूर्व संगणित) के 68क[पांच प्रतिशत से अनधिक] रकम और ऐसे बैंक की ग्रामीण शाखाओं द्वारा दिए गए, विहित रीति से संगणित कुल औसत अग्रिम के 69[दस] प्रतिशत से अनधिक रकम :

70[परन्तु उस उपखंड में निर्दिष्ट अनुसूचित बैंक या गैर-अनुसूचित बैंक को, अपनी इच्छानुसार, किसी भी सुसंगत वर्ष में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस निमित्त जारी दिशानिर्देशों के अनुसार शंकास्पद आस्तियों या हानि की आस्तियों के रूप में उसके द्वारा वर्गीकृत किन्हीं आस्तियों के लिए उसके द्वारा की गर्इ किसी व्यवस्था की बाबत उस रकम की कटौती अनुज्ञात होगी जो पूर्ववर्ष के अंतिम दिन बैंक की बहियों में दर्शित ऐसी आस्तियों की रकम के पांच प्रतिशत से अधिक न हो।

वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के उपखंड (क) के विद्यमान परन्तुक के पश्चात् निम्नलिखित दूसरा परन्तुक अंत:स्थापित किया जाएगा :

परन्तु यह और कि 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले और 1 अप्रैल, 2005 से पूर्व समाप्त होने वाले सुसंगत निर्धारण वर्षों के लिए, पहले परन्तुक के उपबंध इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो "पांच प्रतिशत" शब्दों के स्थान पर "दस प्रतिशत" शब्द रखे गए हों।

स्पष्टीकरण.–इस उपखंड के प्रयोजनों के लिए ''सुसंगत निर्धारण वर्षों'' से 1 अप्रैल, 2000 को या उसके पश्चात् प्रांरभ होने वाले और 1 अप्रैल, 2005 से पूर्व समाप्त होने वाले पांच क्रमवर्ती निर्धारण वर्ष अभिप्रेत हैं;]

() जहां ऐसी व्यवस्था किसी ऐसे बैंक द्वारा की जाती है, जो भारत के बाहर किसी देश की विधि द्वारा या उसके अधीन निगमित बैंक है वहां कुल आय के (इस खंड और अध्याय 6क के अधीन कटौती करने के पूर्व संगणित) पांच प्रतिशत से अनधिक रकम;]

71[() जहां ऐसी व्यवस्था किसी लोक वित्तीय संस्था या राज्य वित्तीय निगम या राज्य औद्योगिक विनिधान निगम द्वारा की जाती है वहां कुल आय के (इस खंड और अध्याय 6क के अधीन कटौती करने के पूर्व संगणित) पांच प्रतिशत से अनधिक रकम:]

वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से धारा 36 की उपधारा (1) के खंड (viiक) के उपखंड (ग) में निम्नलिखित परन्तुक अंत:स्थापित किया जाएगा :

परन्तु यह कि इस उपखंड में निर्दिष्ट कोर्इ लोक वित्तीय संस्था या कोर्इ राज्य वित्तीय निगम अथवा कोर्इ राज्य औद्योगिक विनिधान निगम को उसके विकल्प पर 1 अप्रैल, 2003 को या उसके पश्चात् प्रारंभ होने वाले और 1 अप्रैल, 2005 से पूर्व समाप्त होने वाले दो क्रमवर्ती निर्धारण वर्षों में से किसी वर्ष के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शंकास्पद आस्तियों या हानिप्रद आस्तियों के रूप में इस निमित्त जारी किए गए मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुसार वर्गीकृत किन्हीं आस्तियों के लिए इसके द्वारा बनाए गए किसी उपबंध की बाबत, पूर्ववर्ष के अंतिम दिन, यथास्थिति, ऐसी संस्था या निगम के खातों में दर्शित ऐसी आस्तियों की रकम के दस प्रतिशत से अनधिक रकम की कटौती अनुज्ञात की जाएगी।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

72[(i) ''गैर-अनुसूचित बैंक'' से बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (1949 का 10) की धारा 5 के खण्ड () में यथा परिभाषित ऐसी बैंककारी कम्पनी73 अभिप्रेत है जो अनुसूचित बैंक नहीं है;]

74[(iक)] ''ग्रामीण शाखा'' से किसी अनुसूचित बैंक 75[या गैर अनुसूचित बैंक] की ऐसी शाखा अभिप्रेत है जो ऐसे स्थान में स्थित है जिसकी जनसंख्या उस अंतिम पूर्ववर्ती जनगणना के अनुसार, जिसके सुसंगत आंकड़े पूर्ववर्ष के पहले दिन के पूर्व प्रकाशित हो गए हैं, दस हजार से अधिक नहीं है;]

76[(ii) ''अनुसूचित बैंक'' से भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम, 1955 (1955 का 23) के अधीन गठित भारतीय स्टेट बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (समनुषंगी बैंक) अधिनियम, 1959 (1959 का 38) में परिभाषित समनुषंगी बैंक, बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1970 (1970 का 5) की धारा 3 के अधीन या बैंककारी कंपनी (उपक्रमों का अर्जन और अंतरण) अधिनियम, 1980 (1980 का 40) की धारा 3 के अधीन गठित तत्स्थानी नया बैंक, या कोर्इ ऐसा अन्य बैंक अभिप्रेत है, जो भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 (1934 का 2) की द्वितीय अनुसूची में सम्मिलित बैंक है, किन्तु इसके अंतर्गत कोर्इ सहकारी बैंक नहीं है;]

77[(iii) ''लोक वित्तीय संस्था'' का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की 78धारा 4क में है;

(iv) ''राज्य वित्तीय निगम'' से अभिप्रेत है राज्य वित्तीय निगम अधिनियम, 1951 (1951 का 63) की धारा 3 या धारा 3क के अधीन स्थापित कोर्इ वित्तीय निगम या धारा 46 के अधीन अधिसूचित कोर्इ संस्था;

(v) ''राज्य औद्योगिक विनिधान निगम'' से अभिप्रेत है कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 के अर्थ में कोर्इ सरकारी कम्पनी,79 जो औद्योगिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने के कारबार में लगी हुर्इ है और 80[इस उपधारा के खंड (viii) के अधीन कटौती के लिए पात्र है];

(viii) 81[किसी वित्तीय निगम82 द्वारा जो 82क[भारत में औद्योगिक या कृषि विकास के लिए दीर्घकालिक वित्त की उपलब्धि कराने में लगी हुर्इ है या भारत में बनार्इ गर्इ और रजिस्ट्रीकृत किसी ऐसी पब्लिक कम्पनी द्वारा जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में आवासिक प्रयोजनों के लिए गृहों के निर्माण या क्रय के लिए दीर्घकालिक वित्त उपलब्ध कराने का कारबार करना है, सृष्ट 83[और बनाए रखे गए] किसी विशेष रिजर्व की बाबत कोर्इ रकम जो उस रिजर्व खाते में अग्रनीत दीर्घकालीन वित्त उपलब्ध कराने के ऐसे कारबार से व्युत्पé लाभों के (84[इस खंड के अधीन कोर्इ कटौती करने से पूर्व]) "कारबार या वृत्ति के लाभ और अभिलाभ" शीर्ष के अधीन संगणित चालीस प्रतिशत से अधिक नहीं है]:]

85[* * *]

परन्तु यह 86[* * *] कि जहां उन रकमों का योग, जो ऐसे रिजर्व खाते में समय-समय पर अग्रनीत की जाती रही हों, 87[यथास्थिति, निगम या कंपनी] की समादत्त शेयर पूंजी 89[और साधारण रिजर्व] 88[की रकम के दो गुने] से अधिक है वहां ऐसे आधिक्य की बाबत इस खंड के अधीन कोर्इ मोक नहीं दिया जाएगा।

90[स्पष्टीकरण.–इस खंड में,—

() ''वित्तीय निगम'' के अंतर्गत पब्लिक कंपनी और सरकारी कंपनी है;

() 91''पब्लिक कंपनी'' का वही अर्थ है जो उसका कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 में है;]

() 92''सरकारी कंपनी'' का वही अर्थ है जो उसका कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 617 में है;]

93[() ''बुनियादी सुविधा'' का वही अर्थ है जो उसका धारा 10 के खंड (23) में है;]

94[() ''दीर्घकालिक वित्त'' से कोर्इ उधार या अग्रिम अभिप्रेत है जहां वे शर्तें जिनके अधीन धन उधार या अग्रिम दिया जाता है पांच वर्ष से अन्यून अवधि के दौरान ब्याज सहित धन वापस लौटाने का उपबंध करती हैं;]

(viiiक) 95[* * *]

96[(ix) कोर्इ ऐसा व्यय, जो किसी कंपनी द्वारा अपने कर्मचारियों में परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करने के प्रयोजन के लिए सद्भावपूर्वक उपगत किया गया हो :

परन्तु यह कि जहां ऐसा व्यय या उसका कोर्इ भाग पूंजीगत प्रकार का है, वहां ऐसे व्यय के पंचमांश की कटौती उस पूर्ववर्ष के लिए की जाएगी जिसमें वह उपगत किया गया था और उसके अतिशेष की कटौती ठीक उत्तरवर्ती चार पूर्ववर्षों में से हर एक वर्ष के लिए बराबर किस्तों में की जाएगी :

परन्तु यह और कि धारा 32 की उपधारा (2) और धारा 72 की उपधारा (2) के उपबंध इस खंड के अधीन अनुज्ञेय कटौतियों के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे अवक्षयण के संबंध में अनुज्ञेय कटौतियों के बारे में लागू होते हैं :

परन्तु यह और कि धारा 35 की उपधारा (2) के खंड (ii), (iii), (iv) और (v) 97[और उपधारा (5)] के, धारा 41 की उपधारा (3) के तथा धारा 43 के खंड (1) के स्पष्टीकरण 1 के उपबंध किसी ऐसी आस्ति के संबंध में, जो परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करने के प्रयोजनों के लिए पूंजीगत प्रकार के व्यय के रूप की है, जहां तक संभव हो, उस प्रकार लागू होंगे जैसे उस आस्ति के संबंध में व्यय को लागू होते हैं जो वैज्ञानिक अनुसंधान पर पूंजीगत प्रकार की है;]

98[(x) धारा 10 के खंड (23) में विनिर्दिष्ट किसी के निधि मद्दे अभिदाय के रूप में किसी लोक वित्तीय संस्था द्वारा दी गर्इ कोर्इ राशि।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए ''लोक वित्तीय संस्था'' का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की 99धारा 4क है;]

1[(xi) निर्धारिती द्वारा 1 अप्रैल, 1999 को या उसके पश्चात्, किंतु 1 अप्रैल, 2000 से पूर्व उपगत कोर्इ व्यय, जो पूर्णत: और अनन्यत: निर्धारिती के स्वामित्वाधीन और कारबार या वृत्ति के प्रयोजनों के लिए प्रयुक्त, गैर-Y2K कम्पलायंट कम्प्यूटर सिस्टम की बाबत किया गया हो, जिससे कि ऐसे कम्प्यूटर सिस्टम को Y2K कम्प्लायंट कम्प्यूटर सिस्टम बनाया जा सके :

परन्तु ऐसी कोर्इ कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन ऐसे व्यय की बाबत अनुज्ञात नहीं की जाएगी :

परन्तु यह और कि ऐसी कोर्इ कटौती तब तक स्वीकार्य नहीं होगी जब तक कि निर्धारिती आय-कर विवरणी के साथ-साथ विहित फार्म2 में लेखापाल की रिपोर्ट न दे दे जैसा कि धारा 288 की उपधारा (2) के नीचे के स्पष्टीकरण में परिभाषित है, जिसमें यह प्रमाणित हो कि कटौती का इस खंड के उपबंधों के अनुसार सही दावा किया गया है।

स्पष्टीकरण.—इस खंड के प्रयोजनों के लिए,—

() ''कम्प्यूटर सिस्टम'' से युक्ति या युक्ति संग्रह अभिप्रेत है जिसमें इनपुट और आउटपुट समर्थन युक्तियां भी शामिल हैं और केलकुलेटर शामिल नहीं हैं जिनका प्रोग्राम नहीं बनाया जा सकता और जो बाहरी फाइलों के योग में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता, या जिनमें से ज्यादातर में कम्प्यूटर प्रोग्राम, इलैक्ट्रानिक हिदायतें, इनपुट आंकड़े और आउटपुट आंकड़े होते हैं जो ऐसे कार्य करते हैं जिनमें तर्क, गणित, डाटा स्टोरेज और पुन: स्थापन, संचार और नियंत्रण भी शामिल हैं किंतु उन्हीं तक सीमित नहीं है;

() ''Y2K कम्प्लायंट कम्प्यूटर सिस्टम'' से ऐसा कम्प्यूटर सिस्टम अभिप्रेत है जो बीसवीं और इक्कीसवीं शताब्दी के भीतर और उनके बीच अद्यतन आंकड़े ठीक से प्रोसेस, प्रोवाइड या ग्रहण कर सकता है।]

3(2) किसी डूबंत ऋण या उसके किसी भाग के लिए कटौती करने में, निम्नलिखित उपबंध लागू होंगे—

4[(i) कोर्इ भी ऐसी कटौती तब के सिवाय अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब ऐसा ऋण या उसका कोर्इ भाग निर्धारिती की ऐसे पूर्ववर्ष की, जिसमें ऐसा ऋण या उसका भाग अपलिखित कर दिया जाता है या किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष की आय की संगणना करने में हिसाब में ले लिया गया है, अथवा बैंककारी या साहूकारी के ऐसे कारबार के मामूली अनुक्रम में, जो निर्धारिती द्वारा चलाया जाता है, उधार दिए गए धन के रूप में है;]

(ii) यदि कोर्इ रकम जो ऐसे किसी ऋण या ऋण के भाग की बाबत अंतत: वसूल की गर्इ है, जब ऋण या उसके भाग और इस प्रकार की कटौती की गर्इ रकम के अंतर से कम है, तो ऐसी कमी उस पूर्ववर्ष में कटौती योग्य होगी जिसमें वह अंतत: वसूली की जाती है;

(iii) ऐसी किसी ऋण या भाग की कटौती तब की जा सकेगी जब उसको किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष 5[(जो 1 अप्रैल, 1988 को प्रारम्भ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है)] के लेखाओं में अवसूलनीय रकम के रूप में पहले ही अपलिखित कर दिया गया है, किन्तु 6[निर्धारण] अधिकारी ने उसकी कटौती इस आधार पर अनुज्ञात नहीं की थी कि यह सिद्ध नहीं किया गया कि उस वर्ष में वह डूबंत ऋण हो गया था;

(iv) जहां ऐसा कोर्इ ऋण या ऋण का भाग उस पूर्ववर्ष के 7[(जो 1अप्रैल, 1988 को प्रारंभ होने वाले निर्धारण वर्ष या किसी पूर्वतर निर्धारण वर्ष से सुसंगत पूर्ववर्ष है)] लेखाओं में अवसूलीय रकम के रूप में अपलिखित कर दिया जाता है और 8[निर्धारण] अधिकारी का समाधान हो जाता है कि ऐसा ऋण या उसका भाग किसी ऐसे पूर्वतर पूर्ववर्ष में डूबंत ऋण हो गया था जो उस पूर्ववर्ष से जिसमें ऐसा ऋण या उसका भाग अपलिखित कर दिया जाता है ठीक पहले के चार पूर्ववर्षों की कालावधि के बाहर नहीं पड़ता है, वहां धारा 155 की उपधारा (6) के उपबंध लागू होंगे;

9[(v) जहां ऐसा ऋण या उसका भाग ऐसे किसी निर्धारिती द्वारा, जिसको उपधारा (1) का खंड (viiक) लागू होता है, दिए गए अग्रिमों के संबंध में है वहां ऐसी कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि निर्धारिती ने ऐसे ऋण या उसके भाग की रकम को पूर्ववर्ष में उस खंड के अधीन डूबंत और शंकास्पद ऋण लेखा के लिए की गर्इ व्यवस्था में डेबिट न कर दिया हो।]

 

41. देखिए परिपत्र संख्या 4-पी(LVIII-30), तारीख 25.11.1965, परिपत्र संख्या 44(3)-आर्इ.टी./49, तारीख 12.2.1949, परिपत्र संख्या 110, तारीख 13.4.1973, पत्र [एफ. सं. 44/13/64-आर्इ.टी.जे.], तारीख 6.9.1964, पत्र [एफ.सं. 216/6/77-आर्इ.टी.(ए-II)], तारीख 7.6.1978, परिपत्र संख्या 403, तारीख 5.12.1984, परिपत्र संख्या 30(XLVII-18), तारीख 30.11.1964, परिपत्र संख्या 14, तारीख 23.4.1969. तारीख 5.11.1966 को हुर्इ डी.टी.ए.सी. की नवीं बैठक के कार्यवृत्त (मद संख्या 31) से उद्धरण, आय-कर आयुक्त बनाम कारपोरेशन बैंक लिमिटेड [1986] 157 आर्इ.टी.आर. 509 (कर्ना.) से उद्धृत परिपत्र तारीख 6.10.1952, परिपत्र संख्या 20, तारीख 13.6.1969, अनुदेश संख्या 370 [एफ.सं. 205/15/71-आर्इ.टी.(ए-II)], तारीख 13.1.1972 और पत्र [एफ. सं. 10/66/61-आर्इ.टी.(ए-I)], तारीख 16.1.1962 से उद्धरण। ब्यौरे के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

42. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

43. "नुकसान", "विनाश" और "स्टॉक या स्टोर" पदों के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

44. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से अंत:स्थापित।

45. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से अंत:स्थापित।

46. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

47. "कमीशन" पद के अर्थ के लिए देखिए टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

48. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से प्रथम परन्तुक का लोप किया गया। लोप से पूर्व, बोनस संदाय (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा 25.9.1975 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित प्रथम परन्तुक निम्न प्रकार था :

"परन्तु किसी कारखाने या अन्य प्रतिष्ठान में, जिस पर बोनस संदाय अधिनियम, 1965 (1965 का 21) के उपबंध लागू होते हैं, नियोजित कर्मचारियों को दिए गए बोनस की बाबत कटौती, उस अधिनियम के अधीन संदेय बोनस राशि से अधिक नहीं होगी।"

49. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से दूसरे परन्तुक का लोप किया गया। लोप से पूर्व, बोनस संदाय (संशोधन) अधिनियम, 1976 द्वारा 25.9.1975 से भूतलक्षी रूप से प्रतिस्थापित, दूसरा परन्तुक निम्न प्रकार था:

"परन्तु यह और कि बोनस (वह बोनस नहीं जिसका उल्लेख प्रथम परन्तुक में किया गया है) या कमीशन की रकम निम्नलिखित के प्रति निर्देश करते हुए युक्तियुक्त हो—

() कर्मचारी का वेतन और उसकी सेवा-शर्तें;

() प्रश्नगत पूर्ववर्ष में कारबार या वृत्ति के लाभ; और

() वैसे ही कारबार या वृत्ति में साधारण परिपाटी।"

50. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1980 द्वारा 1.4.1981 से अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1984 द्वारा 1.4.1984 से और प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से संशोधित खंड (iiक) लोप से पहले निम्न प्रकार था :—

'(iiक) किसी कर्मचारी को 1 मार्च, 1984 से पूर्व नियोजन की किसी अवधि के लिए वेतन के संदाय पर उपगत व्यय की रकम के 11/3 गुणा के बराबर राशि, जहां वह कर्मचारी पूर्ववर्ष के अंत में–

() पूर्णत: अंधा है, अथवा

() (अंधेपन से भिन्न) ऐसी स्थायी शारीरिक नि:शक्तता से ग्रस्त है या उससे पीड़ित है जिसका प्रभाव यह है कि अभिलाभ पूर्ण नियोजन या उपजीविका में लगने का उसका सामथ्र्य प्रर्याप्त रूप से घट गया है :

परन्तु यह तब जबकि ऐसा निर्धारिती उस प्रथम निर्धारण वर्ष के संबंध में, जिसके लिए इस खंड के अधीन ऐसे प्रत्येक कर्मचारी के संबंध में कटौती का दावा किया जाता है, निर्धारण प्राधिकारी के समक्ष निम्नलिखित प्रमाणपत्र पेश करता है :—

(i) उपखंड () में विनिर्दिष्ट दशा में, किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी से, जो नेत्ररोग विशेषज्ञ है, अपने पूर्ण अंधेपन का प्रमाणपत्र, तथा

(ii) उपखंड () में निर्दिष्ट दशा में, किसी रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा व्यवसायी से उस उपखण्ड में निर्दिष्ट स्थायी शारीरिक नि:शक्तता का प्रमाणपत्र :

परन्तु यह और कि इस खंड में अंतर्विष्ट कोर्इ बात ऐसे कर्मचारी की दशा में लागू नहीं होगी जिसकी पूर्ववर्ष में "वेतन" शीर्ष के अधीन प्रभार्य आय बीस हजार रुपये से अधिक है।

स्पष्टीकरण 1.–इस खंड में "वेतन" के अंतर्गत संबलम्, भत्ते, बोनस या मासिक रूप से अन्यथा संदेय कमीशन है।

स्पष्टीकरण 2.–शंकाओं का निराकरण करने के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां इस खंड के अधीन कोर्इ कटौती किसी भी व्यय की बाबत किसी निर्धारण वर्ष में अनुज्ञात की जाती है वहां उसी या किसी अन्य निर्धारण वर्ष के लिए ऐसे व्यय की बाबत कोर्इ कटौती इस अधिनियम के किसी अन्य उपबंध के अधीन अनुज्ञात नहीं की जाएगी;'

51. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

52. "ब्याज" और "पूंजी" पदों के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

53. नियम 75, 87 और 88 देखिये.

54. "संदत्त कोर्इ राशि" पद के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज मैनुअल, खंड 3.

55. बोर्ड द्वारा विनिर्दिष्ट शर्तों के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

56. नियम 103 और 104 देखिये.

57. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

58. वित्त अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1988 से अंत:स्थापित।

59. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

60. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

61. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से "किसी ऐसे ऋण की रकम या उसका भाग जो पूर्ववर्ष में डूबंत ऋण साबित हो गया है," शब्दों के स्थान पर प्रतिस्थापित।

62. 'डूबंत' पद के अर्थ के लिए देखिये टैक्समैन्स डायरेक्ट टैक्सेज़ मैनुअल, खंड 3.

63. वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित।

64. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1992 से भूतलक्षी प्रभाव से 'बैंक' शब्द के स्थान पर प्रतिस्थापित।

64क. वित्त अधिनियम, 2001 द्वारा 1.4.1989 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

65. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से अंत:स्थापित।

66. आय-कर (संशोधन) अधिनियम, 1986 द्वारा 1.4.1987 से प्रतिस्थापित। इससे पूर्व, खण्ड (viiक) का उपरोक्त आरम्भिक पैरा वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से प्रतिस्थापित किया गया था। इसे वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से संशोधित भी किया गया था।

67. नियम 6कखक में यह उपबंध है कि अनुसूचित बैंक की ग्रामीण शाखाओं द्वारा दिए गए कुल औसत अग्रिम निम्नलिखित रीति से संगणित किए जाएंगे :—

() पूर्ववर्ष में आए प्रत्येक मास के अंतिम दिन के अंत में बकाया प्रत्येक ग्रामीण शाखा द्वारा दी गर्इ अग्रिम राशियों का योग अलग-अलग किया जाएगा;

() ऐसी प्रत्येक शाखा की दशा में इस प्रकार निकाली गर्इ राशि उन महीनों की संख्या से विभाजित की जाएगी जिनके लिए बकाया अग्रिमों को खंड () के प्रयोजनों के लिए हिसाब में लिया गया है;

() प्रत्येक ग्रामीण शाखा की बाबत इस प्रकार निकाली गर्इ राशियों का योग अनुसूचित बैंक की ग्रामीण शाखाओं द्वारा दिया गया सकल औसत अग्रिम धन होगा।

68. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से "खंड (viiiक) के प्रयोजनों के लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित बैंक या" का लोप किया गया।

68क. वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा 1.4.2003 से "पांच प्रतिशत से अनधिक" के स्थान पर "साढ़े सात प्रतिशत से अनधिक" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।

69. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से "चार" के स्थान पर प्रतिस्थापित। इससे पहले वित्त अधिनियम, 1993 द्वारा 1.4.1994 से "दो" के स्थान पर "चार" रखा गया था।

70. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

71. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

72. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित।

73. बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 5(ग) में 'बैंककारी कंपनी' पद की परिभाषा इस प्रकार दी गर्इ है:

'() "बैंककारी कम्पनी" से कोर्इ कम्पनी अभिप्रेत है जो भारत में बैंककारी कारबार करती है।

स्पष्टीकरण.–कोर्इ कंपनी जो माल विनिर्माण में लगी हुर्इ है या कोर्इ व्यापार करती है और जो ऐसे विनिर्माता या व्यापारी के रूप में अपने कारबार के वित्त पोषण के लिए ही जनता से धन निक्षेप स्वीकार करती है, इस खंड के अर्थ में बैंककारी कारबार करने वाली नहीं समझी जाएगी;'

74. वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से पुन:संख्यांकित।

75. यथोक्त द्वारा अंत:स्थापित।

76. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 [वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से यथा संशोधित] से निम्नलिखित खंड (ii) के स्थान पर प्रतिस्थापित :

'(ii) "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है, जो धारा 11 की उपधारा (5) के खंड (iii) के स्पष्टीकरण में है किंतु इसके अंतर्गत सहकारी बैंक नहीं है;'

77. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1992 से अंत:स्थापित।

78. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 4क के पाठ के लिए और उसके अधीन अधिसूचित संस्थाओं के लिए देखिये परिशिष्ट एक।

79. 'सरकारी कंपनी' की परिभाषा के लिए देखिये पूर्व पृष्ठ 1.25 पर पाद-टिप्पण 46.

80. वित्त अधिनियम, 2000 द्वारा 1.4.2000 से "इस उपधारा के खंड (viii) के अधीन केंद्रीय सरकार द्वारा अनुमोदित है" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

81. इस खंड का प्रभावी भाग पहले वित्त अधिनियम, 1966 द्वारा 1.4.1966 से और फिर वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1968 से और फिर वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1971 द्वारा 1.4.1972 से और फिर वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से संशोधित किया गया था।

82. अधिसूचित वित्तीय संस्थानों के लिए देखिए टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स एक्ट।

82क. "भारत में औद्योगिक और कृषि विकास" शब्दों से प्रारंभ होने वाले और "से अधिक नहीं है" शब्दों पर समाप्त होने वाले भाग के स्थान पर वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से और वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से यथा संशोधित, उद्धृत भाग निम्न प्रकार था:

"भारत में औद्योगिक या कृषि विकास या निवासीय प्रयोजनों के लिए भारत में मकान बनाने या खरीदने के लिए दीर्घकालीन वित्त सुलभ कराने का कारबार करने के मुख्य उद्देश्य से भारत में निर्मित और रजिस्ट्रीकृत पब्लिक कंपनी द्वारा ऐसे आरक्षित खाते में अग्रनीत कुल आय के (इस खंड और अध्याय 6क के अधीन कोर्इ कटौती किये जाने से पूर्व संगणित) चालीस प्रतिशत से अधिक नहीे है;"

83. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से अंत:स्थापित।

84. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1996 से भूतलक्षी प्रभाव से "इस धारा के अधीन कोर्इ कटौती किये जाने से पूर्व" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

85. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से प्रथम परन्तुक का लोप किया गया। इसके लोप से पहले वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से यथा संशोधित प्रथम परन्तुक निम्न प्रकार था:

"परन्तु, यथास्थिति, निगम या कम्पनी इस खंड के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा तत्समय अनुमोदित हो :"

86. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से "और" का लोप किया गया।

87. वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से "निगम" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

88. वित्त अधिनियम, 1981 द्वारा 1.4.1982 से अंत:स्थापित।

89. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1997 से "(रिजर्व में से पूंजीकृत रकमों को अपवर्जित करके)" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

90. वित्त अधिनियम, 1992 द्वारा 1.4.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1970 द्वारा 1.4.1966 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1974 द्वारा 1.4.1975 से लोपित और वित्त अधिनियम, 1979 द्वारा 1.4.1980 से पुन: अंत:स्थापित तथा वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1991 द्वारा 1.4.1987 से भूतलक्षी प्रभाव से और प्रतिस्थापित स्पष्टीकरण निम्न प्रकार था :

'स्पष्टीकरण.—इस खंड में

() "वित्तीय निगम" के अंतर्गत पब्लिक कंपनी भी हैं;

() "पब्लिक कंपनी" का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 1956 (1956 का 1) की धारा 3 में है।'

91. 'पब्लिक कंपनी' की परिभाषा के लिए देखिये परिशिष्ट एक।

92. 'सरकारी कंपनी' की परिभाषा के लिए देखिये पूर्व पृष्ठ 1.25 पर पाद-टिप्पण 46.

93. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1998 से प्रतिस्थापित। प्रतिस्थापन से पूर्व, वित्त अधिनियम, 1995 द्वारा 1.4.1996 से अंत:स्थापित खंड () इस प्रकार था :

'() "बुनियादी सुविधा" का वही अर्थ है जो उसका धारा 80झक में है।'

94. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1996 द्वारा 1.4.1996 से भूतलक्षी प्रभाव से अंत:स्थापित।

95. वित्त अधिनियम, 1994 द्वारा 1.4.1995 से लोप किया गया। लोप किए जाने से पहले वित्त अधिनियम, 1982 द्वारा 1.4.1983 से अंत:स्थापित और बाद में वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से संशोधित खंड (viiiक) निम्न प्रकार था :

'(viiiक) किसी अनुसूचित बैंक द्वारा (भारत के बाहर किसी देश की विधियों द्वारा या उनके अधीन निगमित बैंक से भिन्न) जो भारत के बाहर बैंककारी संक्रियाओं में लगा है, सृजित किसी विशेष आरक्षिती की बाबत ऐसे आरक्षित खाते में अग्रनीत कुल रकम (इस खंड और अध्याय 6क के अधीन कोर्इ कटौती किए जाने से पूर्व संगणित) के चालीस प्रतिशत से अनधिक राशि :

परन्तु यह कि इसकी पूंजीगत संरचना भारत से बाहर उसकी बैंककारी संक्रियाओं की सीमा, भारत के बाहर ऐसी संक्रियाओं के लिए संसाधनों की उसकी जरूरत और अन्य सुसंगत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए बैंक इस खंड के प्रयोजनों के लिए केंद्रीय सरकार द्वारा तत्समय अनुमोदित हो।

स्पष्टीकरण.–इस खंड के प्रयोजनों के लिए, "अनुसूचित बैंक" का वही अर्थ है जो उसका खंड (viiक) के स्पष्टीकरण के खंड (ii) में है;'

96. वित्त अधिनियम, 1965 द्वारा 1.4.1965 से अंत:स्थापित।

97. वित्त (सं. 2) अधिनियम, 1967 द्वारा 1.4.1967 से अंत:स्थापित।

98. वित्त अधिनियम, 1989 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

99. कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 4क और उसके अधीन अधिसूचित संस्थाओं के पाठ के लिए देखिये परिशिष्ट एक।

1. वित्त अधिनियम, 1999 द्वारा 1.4.2000 से अंत:स्थापित।

2. नियम 6कखख और फार्म सं. 3खक देखिये.

3. सुसंगत केस लॉज़ के लिए देखिये टैक्समैन्स मास्टर गाइड टु इन्कम टैक्स ऐक्ट।

4. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से निम्नलिखित खंड (i) के स्थान पर प्रतिस्थापित :

(i) ऐसी कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि ऐसा ऋण या उसका कोर्इ भाग–

() उस पूर्ववर्ष की या किसी पूर्वतर पूर्ववर्ष की निर्धारिती की आय की संगणना करते समय हिसाब में लिया गया हो, अथवा बैंककारी या धन उधार देने के कारबार के सामान्य अनुक्रम में जो निर्धारिती द्वारा चलाया जाता है, उधार दिए गए धन को दर्शाता हो, और

() उस पूर्ववर्ष के लिए निर्धारिती के लेखाओं में अवसूलनीय मानकर अपलिखित कर दिया गया हो;"

5. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

6. यथोक्त द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

7. प्रत्यक्ष कर विधि (संशोधन) अधिनियम, 1987 द्वारा 1.4.1989 से अंत:स्थापित।

8. यथोक्त द्वारा 1.4.1988 से "आय-कर" के स्थान पर प्रतिस्थापित।

9. वित्त अधिनियम, 1997 द्वारा 1.4.1992 से भूतलक्षी प्रभाव से प्रतिस्थापित। इसके प्रतिस्थापन से पूर्व वित्त अधिनियम, 1985 द्वारा 1.4.1985 से अंत:स्थापित खंड (v) निम्न प्रकार था:

"(v) जहां ऐसा ऋण या उसका भाग ऐसे बैंक द्वारा दिए गए अग्रिम धन से संबंधित है जिस पर उपधारा (1) का खंड (viiक) लागू होता है वहां ऐसी कोर्इ कटौती तब तक अनुज्ञात नहीं की जाएगी जब तक कि बैंक ने उस पूर्ववर्ष में ऐसे ऋण या उसके भाग की रकम को उस खंड के अधीन किए गए डूबंत और शंकास्पद ऋण लेखा के लिए की गर्इ व्यवस्था में डेबिट न कर दिया हो।"

 

 

[वित्त अधिनियम, 2002 द्वारा संशोधित रूप में]

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